
पटना। बिहार के प्रशासनिक गलियारों में सोमवार, 27 अप्रैल 2026 का दिन विकास कार्यों की गहन पड़ताल और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की मुस्तैदी के नाम रहा। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने आज मुख्यमंत्री सचिवालय के ‘संवाद’ कक्ष में एक के बाद एक कई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकें कीं। इन बैठकों में सिंचाई परियोजनाओं की सुस्त रफ्तार पर जहां कड़ा रुख अपनाया गया, वहीं पांडुलिपि संरक्षण और जनगणना की तैयारियों में बिहार की राष्ट्रीय बढ़त पर संतोष भी व्यक्त किया गया। बढ़ते तापमान और ‘हीट वेव’ को देखते हुए मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि आम जनता को पेयजल और बिजली की समस्या न हो, इसके लिए सभी विभाग ‘अलर्ट मोड’ पर रहें। आज की मैराथन बैठकों में लिए गए निर्णयों और जारी किए गए निर्देशों का सीधा असर राज्य की कृषि, ऊर्जा, संस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ने वाला है।
सिंचाई परियोजनाओं को अल्टीमेटम: खरीफ से पहले चाहिए पानी
मुख्य सचिव ने जल संसाधन विभाग की दो सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं—उत्तर कोयल जलाशय (लागत: 1367.61 करोड़ रुपये) और मंडई वीयर एवं नहर प्रणाली (लागत: 232.83 करोड़ रुपये)—की प्रगति पर गहरा असंतोष जताया। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसान हैं और खरीफ मौसम शुरू होने से पहले इन परियोजनाओं का लाभ खेतों तक पहुँचना चाहिए।
समीक्षा में सामने आया कि उत्तर कोयल परियोजना की राइट मेन कैनाल (RMC) की प्रगति अभी केवल 31.17% है, जबकि समग्र कार्य 57.09% तक पहुँचा है। मुख्य सचिव ने कार्यस्थल पर मैनपावर और मशीनों (एक्स्कवेटर, टिपर, रोलर) की संख्या तुरंत बढ़ाने के निर्देश दिए। औरंगाबाद और गया जिलों में भूमि अधिग्रहण के बचे हुए कार्यों, विशेषकर औरंगाबाद के 42 रैयतों की जमीन रजिस्ट्री इसी सप्ताह पूर्ण करने का लक्ष्य दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नहरों का निर्माण इस प्रकार हो कि निर्माण के साथ-साथ सिंचाई शुरू की जा सके।
सांस्कृतिक उपलब्धि: पांडुलिपि सत्यापन में बिहार देश में तीसरे स्थान पर
बैठक में ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ की समीक्षा के दौरान एक सुखद आंकड़ा सामने आया। बिहार अब पांडुलिपियों के सत्यापन में राजस्थान और मध्य प्रदेश के बाद देश में तीसरे स्थान पर पहुँच गया है। पिछले 20 दिनों (09 से 27 अप्रैल 2026) के भीतर राज्य ने रिकॉर्ड प्रगति की है। सत्यापित पांडुलिपियों की संख्या 3.69 लाख से बढ़कर 7.49 लाख हो गई है।
भारत की कुल सर्वेक्षित पांडुलिपियों में बिहार की हिस्सेदारी अब 22% है। जिलावार प्रदर्शन में मधुबनी (3,96,487 पांडुलिपियां) राज्य में अव्वल है, जबकि गया और सीतामढ़ी क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। हालांकि, जमुई में मात्र 10 पांडुलिपियां दर्ज होने पर मुख्य सचिव ने खोज अभियान को और सघन बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे हर जिले में विषय विशेषज्ञों का एक ‘अनौपचारिक समूह’ बनाएं ताकि छिपी हुई ऐतिहासिक धरोहरों को दुनिया के सामने लाया जा सके।
ऊर्जा और रसोई: पीएनजी कनेक्शन 1.07 लाख के पार
’क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप’ की बैठक में राज्य में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के विस्तार की समीक्षा की गई। राज्य के 38 जिलों को 14 भौगोलिक क्षेत्रों में बांटकर 6 कंपनियों को काम दिया गया है। 26 अप्रैल 2026 तक बिहार में 1,06,835 घरेलू पीएनजी कनेक्शन लाइव हो चुके हैं। सहरसा जिले में गैस आपूर्ति शुरू होने के साथ ही बिहार के 50% जिले अब ‘गैसीफाइड’ हो चुके हैं।
मुजफ्फरपुर का ‘धरफरी एन्क्लेव’ बिहार की पहली ‘एलपीजी मुक्त’ सोसाइटी बन गई है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि अप्रैल में जो प्रति माह 9,132 कनेक्शन दिए गए हैं, उसे बढ़ाकर 12,000 प्रति माह किया जाए। बांका में 30 अप्रैल तक और दरभंगा व मधुबनी में जुलाई-अगस्त तक गैस पहुँचाने का लक्ष्य तय किया गया है।
जनगणना 2027: डिजिटल सीमांकन और स्व-गणना में बिहार की छलांग
आगामी ‘जनगणना-2027’ की तैयारियों को लेकर मुख्य सचिव ने बताया कि बिहार ने मात्र एक सप्ताह में एच.एल.बी. सीमांकन का कार्य 20% से बढ़ाकर 99.64% पहुँचा दिया है। जियो-टैगिंग की प्रगति भी 99.67% हो गई है। बिहार के 33 जिलों ने 100% लक्ष्य हासिल कर लिया है।
’स्व-गणना’ (Self-Enumeration) के मामले में वैशाली जिला 4.46 लाख गणनाओं के साथ राज्य में प्रथम स्थान पर है। मुख्य सचिव ने शेष 5 जिलों को अगले 24 घंटों में सीमांकन पूर्ण करने का सख्त निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि डेटा की शुद्धता के लिए फील्ड स्तर पर 100% भौतिक सत्यापन अनिवार्य है।
गर्मी का कहर और जलापूर्ति: पीएचईडी को 24 घंटे का अल्टीमेटम
बढ़ते तापमान और हीट वेव को देखते हुए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) को ‘हाई अलर्ट’ पर रखा गया है। राज्य में संचालित 1.29 लाख जलापूर्ति योजनाओं के जरिए 92% परिवारों तक पानी पहुँच रहा है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि जहाँ भी चापाकल या पाइपलाइन खराब है, उसे 24 घंटे के भीतर ठीक किया जाए।
गर्मी से निपटने के लिए राज्य में 525 चलंत मरम्मती दल (मोबाइल वैन) सक्रिय किए गए हैं। पानी की किल्लत वाले क्षेत्रों के लिए टैंकरों की व्यवस्था रखने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने कहा कि पंप ऑपरेटरों का मानदेय लंबित न रहे और बिजली विभाग से समन्वय कर जलापूर्ति योजनाओं को निर्बाध बिजली दी जाए। किसी भी शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 1800-123-1121 को पूरी तरह सक्रिय रखने का निर्देश दिया गया है।
मौसम पूर्वानुमान: मानसून 2026 में कम बारिश की आशंका
’बिहार मौसम सेवा केंद्र’ (BMSK) के प्रस्तुतीकरण में इस वर्ष के मानसून को लेकर चिंताजनक बातें सामने आईं। पूर्वानुमान के अनुसार, जून और जुलाई में बिहार में ‘सामान्य से कम’ (Below Normal) वर्षा होने की संभावना है। मानसून के शुरुआती महीनों में बारिश की कमी कृषि के लिए चुनौती बन सकती है।
मुख्य सचिव ने इस स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को ‘सनस्ट्रोक’ से निपटने के लिए अस्पतालों में विशेष वार्ड बनाने और पशुपालन विभाग को पशुओं के लिए पानी के हौद और ओआरएस (ORS) सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अगले एक सप्ताह (27 अप्रैल से 05 मई) तक तापमान में भारी वृद्धि हो सकती है, इसलिए बिजली विभाग ‘क्विक रिस्पांस टीम’ (QRT) तैयार रखे ताकि ट्रांसफार्मर जलने या तार टूटने पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
प्रशासन का ‘एक्शन मोड’
आज की ये समीक्षा बैठकें दर्शाती हैं कि बिहार प्रशासन वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ जहां 2027 की जनगणना और ऐतिहासिक पांडुलिपियों के जरिए भविष्य का डेटा और गौरव संजोया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ गर्मी और कम मानसून की आशंकाओं के बीच आम आदमी की बुनियादी जरूरतों (पानी, बिजली, गैस) को सुरक्षित करने की जद्दोजहद जारी है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के कड़े रुख और स्पष्ट समय-सीमा ने अधिकारियों को यह संदेश दे दिया है कि अब केवल फाइलों पर काम नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम चाहिए।


