भागलपुर समाहरणालय पर ‘गौ रक्षा’ की गूँज: अवैध बूचड़खानों के खिलाफ हिंदू संगठनों का हल्लाबोल; डीएम से मिलने की जिद पर अड़े कार्यकर्ता, प्रशासन से तीखी नोकझोंक

भागलपुर। बिहार के सिल्क सिटी भागलपुर में गौ रक्षा का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को जिले के विभिन्न हिंदू संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) के मुख्य द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया। ‘गौ माता की जय’ और ‘अवैध बूचड़खाने बंद करो’ के नारों से पूरा परिसर गूँज उठा। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर जिलाधिकारी (डीएम) को ज्ञापन सौंपने पहुँचे थे, लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा के कड़े पहरे के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई। जिलाधिकारी से मिलने की जिद पर अड़े कार्यकर्ताओं को जब समाहरणालय गेट पर ही रोक दिया गया, तो उनका आक्रोश सातवें आसमान पर पहुँच गया। सुरक्षा कर्मियों और कार्यकर्ताओं के बीच काफी देर तक बहस और नोकझोंक होती रही। प्रशासन की इस कार्रवाई को कार्यकर्ताओं ने अपनी आस्था के प्रति ‘अनदेखी’ करार दिया और भ्रष्टाचार व मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए।

गेट पर सुरक्षा का पहरा और बढ़ता आक्रोश: जिलाधिकारी से मिलने पर रोक

​जैसे ही हिंदू संगठनों के प्रतिनिधिमंडल और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता समाहरणालय गेट पर पहुँचे, वहां पहले से मुस्तैद सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। कार्यकर्ताओं का तर्क था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात जिलाधिकारी के समक्ष रखना चाहते हैं। लेकिन, सुरक्षा अधिकारियों ने प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी और उन्हें सदर अनुमंडल कार्यालय (SDO Office) जाकर अपना ज्ञापन सौंपने का निर्देश दिया।

​प्रशासन के इस रवैये से कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी देखी गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह जनता की समस्या है और जिलाधिकारी को सीधे तौर पर उनकी बात सुननी चाहिए। गेट पर ही रोके जाने से आहत कार्यकर्ताओं ने वहीं सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनके अनुसार, संवेदनशील मुद्दों पर जिलाधिकारी का व्यक्तिगत हस्तक्षेप अनिवार्य है, लेकिन उन्हें निचले अधिकारियों के पास भेजकर मामले को टालने की कोशिश की जा रही है।

अवैध बूचड़खानों का जाल: “शहर की गलियों में हो रहा है गौवंश का कत्ल”

​प्रदर्शन कर रहे संगठनों का मुख्य आरोप भागलपुर शहर में संचालित हो रहे अवैध बूचड़खानों को लेकर था। कार्यकर्ताओं ने सनसनीखेज दावा किया कि भागलपुर की घनी आबादी वाले इलाकों और शहर की सीमाओं पर प्रतिदिन अवैध रूप से गौ हत्या की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये बूचड़खाने बिना किसी लाइसेंस और मानकों के चल रहे हैं, जहाँ गौवंश को क्रूरतापूर्वक मारा जा रहा है।

​हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि प्रशासन को इन अवैध ठिकानों की कई बार लिखित और मौखिक जानकारी दी गई है। इसके बावजूद, धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कार्यकर्ताओं ने संदेह जताया कि इन अवैध गतिविधियों को कहीं न कहीं स्थानीय स्तर पर संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण पुलिस और प्रशासन की नजरों के सामने यह सब घटित हो रहा है। उन्होंने मांग की कि शहर के चप्पे-चप्पे पर छापेमारी की जाए और जहाँ भी इस तरह के अवैध धंधे चल रहे हैं, उन्हें तुरंत ध्वस्त किया जाए।

धार्मिक आस्था और कानून का सवाल: “बर्दाश्त नहीं किया जाएगा आघात”

​हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि गौ हत्या हिंदू समाज की आस्था पर एक सीधा और गहरा आघात है। भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और उसकी हत्या करना न केवल अपराध है, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत करना भी है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि कानूनन गौ हत्या पर प्रतिबंध होने के बावजूद यदि शहर में यह कृत्य खुलेआम हो रहा है, तो यह सुशासन के दावों की विफलता है। उन्होंने कहा कि “हम शांतिप्रिय हैं, लेकिन अपनी आस्था की रक्षा के लिए सड़क पर उतरने से पीछे नहीं हटेंगे।” उन्होंने प्रशासन को आगाह किया कि यदि जल्द ही इन अवैध बूचड़खानों पर ताला नहीं जड़ा गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

बिशू मंगल और सोनू सम्राट के कड़े तेवर: नेतृत्व का दो टूक संदेश

​इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बिशू मंगल (सहसंयोजक, बजरंग दल भागलपुर) और सोनू सम्राट (हिंदुत्व सेवा संघ अध्यक्ष, भागलपुर) ने प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े प्रहार किए।

  • बिशू मंगल ने कहा कि वे केवल ज्ञापन देने नहीं आए हैं, बल्कि प्रशासन को उनकी सोई हुई नींद से जगाने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गौ तस्करी का एक बड़ा सिंडिकेट भागलपुर में सक्रिय है, जो रात के अंधेरे में गौवंश को एक जगह से दूसरी जगह ले जाता है। प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है और कार्यवाही के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
  • सोनू सम्राट ने कहा कि भागलपुर जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से समृद्ध शहर में इस तरह की अवैध गतिविधियां होना शर्मनाक है। उन्होंने मांग की कि केवल बूचड़खानों को बंद करना ही काफी नहीं है, बल्कि इसमें शामिल उन तमाम रसूखदार लोगों पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए जो इस काले धंधे को वित्तीय और राजनैतिक संरक्षण प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो कार्यकर्ता खुद पहरेदारी करेंगे और गौवंश को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।

ज्ञापन में दर्ज मुख्य मांगें: त्वरित कार्रवाई का अल्टीमेटम

​काफी देर तक चले हंगामे और मान-मनौवल के बाद, कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन प्रशासन के प्रतिनिधि को सौंपा। ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया गया है:

  1. ​भागलपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित सभी अवैध बूचड़खानों की पहचान कर उन्हें 48 घंटे के भीतर सील किया जाए।
  2. ​गौ तस्करी में शामिल गिरोहों के खिलाफ एनएसए (NSA) या अन्य कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित हो।
  3. ​पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का कड़ाई से पालन कराया जाए और संवेदनशील इलाकों में पुलिस की नियमित गश्त बढ़ाई जाए।
  4. ​समाहरणालय में आम जनता और संगठनों के प्रतिनिधियों को अपनी समस्याएं रखने के लिए जिलाधिकारी से मिलने की प्रक्रिया को सुगम बनाया जाए।

प्रशासनिक रुख: “जांच के बाद होगी उचित कार्रवाई”

​इधर, प्रशासन की ओर से मौके पर पहुँचे अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने का प्रयास किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि ज्ञापन में उठाए गए सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। सदर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस की एक विशेष टीम गठित कर चिन्हित क्षेत्रों में छापेमारी की योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी और अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। हालांकि, कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं, उन्हें धरातल पर परिणाम चाहिए।

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