
भागलपुर। बिहार के सिल्क सिटी भागलपुर में एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला है, हालांकि इस बार कुदरत का करिश्मा कहिए या महज एक इत्तेफाक, कि एक बड़ी मानवीय त्रासदी होते-होते रह गई। जिले के नाथनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत फतेहपुर बाईपास के समीप सोमवार, 27 अप्रैल 2026 की सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक अनियंत्रित बस डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और इसकी गूँज काफी दूर तक सुनाई दी। गनीमत यह रही कि जिस वक्त यह दुर्घटना हुई, बस पूरी तरह खाली थी। बारात को गंतव्य तक पहुँचाकर लौट रही इस बस में यदि सवारी मौजूद होती, तो दृश्य कुछ और ही होता। घटना के तुरंत बाद जिम्मेदारी निभाने के बजाय बस के चालक और खलासी मौके से फरार हो गए, जिससे पुलिस की शक की सुई अब उनकी लापरवाही की ओर घूम गई है।
सन्नाटे को चीरती जोरदार आवाज: कैसे घटी यह घटना?
जानकारी के अनुसार, यह बस सुल्तानगंज की ओर से यात्रियों (बारातियों) को छोड़कर वापस भागलपुर की ओर आ रही थी। सोमवार की सुबह जब सड़कें अपेक्षाकृत खाली थीं, तब फतेहपुर बाईपास के पास अचानक बस का संतुलन बिगड़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो बस की रफ्तार काफी अधिक थी। अचानक हुए इस अनियंत्रित मोड़ के कारण चालक वाहन पर काबू नहीं रख सका और बस सीधे बीच सड़क पर बने डिवाइडर से जा भिड़ी।
टक्कर लगते ही बस के टायर फटने और लोहे के टकराने की इतनी भीषण आवाज हुई कि आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग और स्थानीय निवासी सहम गए। लोग जब दौड़कर मौके पर पहुँचे, तो देखा कि बस डिवाइडर पर चढ़ी हुई है और इंजन के पास से धुआं निकल रहा है। स्थानीय लोगों को लगा कि बस के भीतर यात्री फंसे होंगे, लेकिन जब उन्होंने खिड़कियों से झांककर देखा, तो राहत की सांस ली कि बस के भीतर कोई भी सवारी मौजूद नहीं थी।
चालक-खलासी का पलायन: कानून से बचने की कोशिश
हादसे के तुरंत बाद जो दृश्य सामने आया, वह काफी गैर-जिम्मेदाराना था। जैसे ही बस रुकी और आसपास के लोग मदद के लिए दौड़ना शुरू हुए, बस के चालक और खलासी ने खुद को सुरक्षित पाया और भीड़ के इकट्ठा होने से पहले ही वहां से रफूचक्कर हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे दोनों संभवतः नशे की हालत में थे या नींद की झपकी आने के कारण यह हादसा हुआ, और इसी डर से वे मौके से भाग खड़े हुए।
स्थानीय नागरिकों ने बिना देर किए इसकी सूचना डायल 112 की टीम को दी। सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम मौके पर पहुँची और सबसे पहले यह सुनिश्चित किया कि सड़क पर यातायात बाधित न हो। पुलिस ने क्षतिग्रस्त बस का मुआयना किया और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय नाथनगर थाने को सूचित किया।
पुलिसिया जांच और प्रशासनिक सक्रियता
सूचना पाकर नाथनगर थाना अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह अपनी टीम के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने पूरे मामले की पड़ताल शुरू की और क्रेन की मदद से बस को डिवाइडर से अलग कर किनारे लगवाने की प्रक्रिया शुरू की। थाना अध्यक्ष ने बताया कि बस के भीतर से कुछ कागजात मिले हैं, जिनके आधार पर बस के मालिक और फरार चालक की पहचान की जा रही है।
राजीव रंजन सिंह ने कहा कि यह लापरवाही का स्पष्ट मामला है। तेज रफ्तार और अनियंत्रित ड्राइविंग के कारण न केवल सरकारी संपत्ति (डिवाइडर) को नुकसान पहुँचा है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा था। पुलिस अब बस के रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए परिवहन विभाग से संपर्क कर रही है ताकि मालिक तक पहुँचा जा सके और यह पता लगाया जा सके कि घटना के वक्त स्टेयरिंग पर कौन बैठा था।
बाईपास पर बढ़ते खतरे: एक गंभीर चिंता
फतेहपुर बाईपास और भागलपुर के आसपास के मुख्य मार्ग इन दिनों बारात की बसों और भारी वाहनों के लिए ‘हॉटस्पॉट’ बनते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के समय और सुबह के शुरुआती घंटों में बस चालक अत्यधिक थकान और नींद के बावजूद वाहन चलाते हैं। साथ ही, सड़कों के खाली होने का फायदा उठाकर वे तय सीमा से अधिक रफ्तार में गाड़ी दौड़ाते हैं।
इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा के उन दावों की पोल खोल दी है, जहाँ भारी वाहनों के फिटनेस और चालकों की मानसिक स्थिति की नियमित जांच की बात की जाती है। यदि यह बस बारातियों से भरी होती, तो डिवाइडर से टकराने के बाद बस के पलटने की पूरी संभावना थी, जिससे दर्जनों परिवारों के चिराग बुझ सकते थे। प्रशासन अब इस बात पर विचार कर रहा है कि बाईपास पर स्पीड ब्रेकर या लाइटिंग की व्यवस्था को और बेहतर किया जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों पर अंकुश लगाया जा सके।
अगली कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
नाथनगर पुलिस ने बस को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस अब फरार चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने और दुर्घटना के बाद मौके से भागने की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी कर रही है। साथ ही, बस मालिक को भी नोटिस भेजने की तैयारी है कि आखिर क्यों ऐसे गैर-जिम्मेदार चालक को गाड़ी की कमान सौंपी गई थी।
वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क की टीम जब मौके पर पहुँची, तो पाया कि डिवाइडर का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह टूट चुका था, जो यह बताने के लिए काफी था कि टक्कर कितनी भयावह थी। फिलहाल, पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं और उम्मीद है कि जल्द ही चालक और खलासी कानून की गिरफ्त में होंगे।
सबक लेने की जरूरत
अंततः, 27 अप्रैल 2026 की यह घटना हम सबके लिए एक चेतावनी है। बारात और शादी-ब्याह के इस मौसम में अक्सर चालक कम समय में ज्यादा ट्रिप लगाने के चक्कर में अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं। भागलपुर के फतेहपुर बाईपास पर हुआ यह हादसा किसी बड़े मातम में बदल सकता था, लेकिन ‘खाली बस’ ने इस बार सबकी लाज रख ली।
वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क का मानना है कि केवल चालकों की गिरफ्तारी काफी नहीं है, बल्कि बस मालिकों को भी अपने वाहनों की सुरक्षा और चालकों की कार्य-अवधि (Duty Hours) के प्रति जवाबदेह बनाना होगा। सड़कें सफर के लिए होती हैं, कब्रगाह बनने के लिए नहीं। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इस मामले में कितनी सख्त कार्रवाई करता है ताकि भागलपुर की सड़कों पर फिर कोई अनियंत्रित पहिया मौत बनकर न दौड़े।


