सात समंदर पार से आई दुल्हनिया: भागलपुर के ऋषि और फिलीपींस की सारा का ‘अजब प्रेम’; फेसबुक की 10 साल की दोस्ती के बाद हिंदू रीति-रिवाज से रचाई शादी

भागलपुर। प्रेम की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती और न ही यह भाषाओं के बंधन में बंधता है। आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया के इस दौर में सात समंदर की दूरियां भी अब बेमानी साबित हो रही हैं। बिहार के भागलपुर जिले से एक ऐसी ही ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ सामने आई है, जिसने सरहदों और संस्कृतियों के फासले को मिटा दिया है। यहाँ के एक युवक और फिलीपींस की एक युवती के बीच फेसबुक पर शुरू हुई दोस्ती आखिरकार नौ वर्षों के लंबे इंतजार के बाद शादी के पवित्र बंधन में तब्दील हो गई। सात समंदर पार से आई विदेशी दुल्हन ने न केवल भारतीय संस्कृति को अपनाया, बल्कि पूरे विधि-विधान के साथ शिव मंदिर में अग्नि को साक्षी मानकर अपने प्रेमी के साथ सात फेरे लिए। रविवार, 26 अप्रैल 2026 को संपन्न हुई इस अनोखी शादी की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है और लोग इसे इंटरनेट युग के सच्चे प्रेम की मिसाल मान रहे हैं।

फेसबुक पर दोस्ती और चैटिंग से शुरू हुआ सफर

​इस अनोखी प्रेम कहानी की शुरुआत करीब 9 से 10 वर्ष पूर्व हुई थी। भागलपुर जिले के असरगंज प्रखंड अंतर्गत मिल्की टोला (बेलारी मिल्की) निवासी विजय साह के पुत्र ऋषि कुमार की मुलाकात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए फिलीपींस की रहने वाली सारा पाउलीन क्रूज केरियेजा से हुई थी। शुरुआती दौर में यह महज एक साधारण परिचय था, लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच चैटिंग का सिलसिला शुरू हुआ और समय बीतने के साथ यह दोस्ती गहरे प्रेम संबंध में बदल गई।

​ऋषि कुमार, जो वर्तमान में एक निजी कंपनी (एशियन पेंट) में इंजीनियर/टेक्निकल एसोसिएट के पद पर कार्यरत हैं, और सारा के बीच भाषा और संस्कृति की दीवार कभी आड़े नहीं आई। दोनों ने लगभग नौ वर्षों तक ऑनलाइन माध्यम से अपना संपर्क बनाए रखा और एक-दूसरे को समझने का प्रयास किया। लंबे समय तक डिजिटल दुनिया में एक-दूसरे का साथ निभाने के बाद दोनों ने यह निर्णय लिया कि वे अब साथ में अपना जीवन व्यतीत करेंगे।

इंजीनियर ऋषि का फिलीपींस दौरा और परिवारों की सहमति

​इस प्रेम कहानी में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब ऋषि ने सारा से हकीकत में मिलने का फैसला किया। प्यार की इस डगर पर आगे बढ़ने के लिए ऋषि ने कड़ा संघर्ष किया। उन्होंने करीब ढाई लाख रुपये खर्च कर अपना वीजा और पासपोर्ट बनवाया और सात समंदर पार फिलीपींस जाकर सारा से मुलाकात की। फिलीपींस में ऋषि ने न केवल सारा के साथ समय बिताया, बल्कि उनके माता-पिता से भी मुलाकात की और अपने रिश्ते के बारे में बात की।

​ऋषि के समर्पण और व्यवहार को देखकर सारा के माता-पिता ने इस रिश्ते के लिए अपनी सहमति दे दी। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच बातचीत हुई और यह तय किया गया कि शादी भारतीय परंपरा के अनुसार बिहार में ही होगी। सारा अपने माता-पिता के साथ फिलीपींस से भारत पहुँचीं, जहाँ ऋषि के परिवार ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। विदेशी बहू के आने की खबर से पूरे बेलारी मिल्की गांव में कौतूहल का माहौल बन गया।

शिव मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ विवाह

​रविवार को हवेली खड़गपुर स्थित ऐतिहासिक पंचबदन शिव मंदिर में इस विवाह समारोह का आयोजन किया गया। इस अनोखी शादी को देखने के लिए मंदिर परिसर में स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई यह देखना चाहता था कि कैसे सात समंदर पार से आई एक विदेशी युवती भारतीय साड़ी और गहनों में सजकर हिंदू संस्कारों का पालन करती है।

​मंदिर के पुजारी ने पंचमुखीनाथ (भगवान शिव) को साक्षी मानकर पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विवाह संपन्न कराया। सारा पाउलीन क्रूज केरियेजा ने भारतीय पारंपरिक परिधानों में पूरी श्रद्धा के साथ अग्नि के फेरे लिए और ऋषि के नाम का सिंदूर अपनी मांग में सजाया। विदेशी युवती को पारंपरिक अंदाज में शादी करते देख वहां मौजूद लोग मंत्रमुग्ध हो गए।

संस्कृतियों का मिलन और इलाके में चर्चा

​भागलपुर की यह शादी केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो अलग-अलग देशों और संस्कृतियों का मिलन साबित हुई। सारा के माता-पिता भी भारतीय रीति-रिवाजों और बिहार के लोगों के आतिथ्य सत्कार को देखकर काफी प्रभावित नजर आए। ऋषि के गांव बेलारी मिल्की में सारा का स्वागत पारंपरिक तरीके से किया गया, जहाँ ग्रामीण महिलाओं ने लोकगीत गाकर विदेशी बहू का अभिनंदन किया।

​ऋषि फिलहाल एक निजी कंपनी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, और सारा के भारत आने के बाद अब वे दोनों भागलपुर में ही अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने जा रहे हैं। इलाके के लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर जहां अक्सर धोखाधड़ी की खबरें आती हैं, वहीं ऋषि और सारा की यह कहानी विश्वास और धैर्य की एक मिसाल है, जिन्होंने 10 साल तक अपने प्यार को निभाया और उसे मुकाम तक पहुँचाया।

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