मुंगेर में ईको टूरिज्म को बढ़ावा, CM सम्राट चौधरी ने ढोल पहाड़ी और उच्चेश्वर नाथ धाम में योजनाओं का शिलान्यास

पटना: बिहार में पर्यटन विकास को नई दिशा देने की पहल के तहत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुंगेर जिले में बड़े पैमाने पर ईको टूरिज्म परियोजनाओं का शिलान्यास किया। असरगंज प्रखंड स्थित ढोल पहाड़ी और टेटियाबंबर प्रखंड के देवघरा गांव में स्थित उच्चेश्वर नाथ धाम में इन योजनाओं की शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री ने शिलापट्ट अनावरण कर परियोजनाओं का विधिवत शुभारंभ किया और अधिकारियों से इसके विस्तृत क्रियान्वयन की जानकारी भी ली।

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को साइट प्लान और प्रस्तावित लेआउट के माध्यम से ढोल पहाड़ी और उच्चेश्वर नाथ धाम में होने वाले विकास कार्यों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं को राज्य के पर्यटन विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने ढोल पहाड़ी स्थित मां दुर्गा के मंदिर में पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि बिहार के धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों को विकसित कर राज्य की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया जाएगा।

ढोल पहाड़ी, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के लिए जानी जाती है, को एक आधुनिक ईको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा 1249 करोड़ रुपये की विशाल योजना स्वीकृत की गई है। इस परियोजना के तहत यहां पाथ-वे, शुद्ध पेयजल व्यवस्था, सुरक्षा सुविधाएं, हरित क्षेत्र का विस्तार, पक्के रास्ते, सीढ़ियां, पार्किंग और आकर्षक प्रवेश द्वार का निर्माण किया जाएगा। साथ ही यहां एक विशाल शिव प्रतिमा स्थापित करने की भी योजना है, जो पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी।

ढोल पहाड़ी का धार्मिक महत्व भी काफी गहरा है। यहां स्थित प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां विशेषकर सावन के महीने में भारी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। ऐतिहासिक रूप से भी यह स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारी यहां से ढोल बजाकर अंग्रेजों के खिलाफ संदेश देते थे, जिससे इसका नाम ‘ढोल पहाड़ी’ पड़ा।

इसी प्रकार उच्चेश्वर नाथ धाम, जो टेटियाबंबर प्रखंड के देवघरा गांव में स्थित है, को भी एक प्रमुख ईको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए 26.31 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गई है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और चारों ओर घने जंगलों एवं प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ है, जो इसे अत्यंत आकर्षक बनाता है।

उच्चेश्वर नाथ मंदिर को इस क्षेत्र का एक प्राचीन और जाग्रत शिव मंदिर माना जाता है। यहां स्थापित शिवलिंग सदियों पुराना बताया जाता है और यह मंदिर स्थानीय संस्कृति और आस्था का केंद्र है। महाशिवरात्रि और सावन के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।

सरकार द्वारा इस धाम में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे यहां आने वाले लोगों को बेहतर अनुभव मिल सके। इन योजनाओं से क्षेत्र में पर्यटन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

शिलान्यास कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने बैजलपुर, लखनपुर और तारापुर सहित कई क्षेत्रों में रोड शो किया। इस दौरान स्थानीय लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला। लोगों ने ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और पुष्प वर्षा के साथ मुख्यमंत्री का जोरदार स्वागत किया। जगह-जगह मिठाइयां बांटी गईं और लोगों ने अपने नेता के स्वागत में उमंग और उत्साह का प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री ने रोड शो के दौरान लोगों का अभिवादन स्वीकार किया और उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जनता का यह प्रेम और समर्थन ही उन्हें और बेहतर काम करने की प्रेरणा देता है।

इस मौके पर कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। विधायक कुमार प्रणय, पूर्व विधायक राजीव सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष अरुण पोद्दार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, पुलिस महानिदेशक (ऑपरेशन) कुंदन कृष्णन, मुंगेर प्रमंडल के आयुक्त प्रेम सिंह मीणा, पुलिस उप-महानिरीक्षक राकेश कुमार, जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पनिकर और पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और आमजन कार्यक्रम में शामिल हुए।

यह परियोजना बिहार में पर्यटन को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों को विकसित कर राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाए और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। आने वाले समय में इन योजनाओं के पूरा होने के बाद मुंगेर जिला पर्यटन के नक्शे पर एक प्रमुख स्थान के रूप में उभर सकता है।

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