कटिहार में वज्रपात से 3 की मौत पर CM सम्राट चौधरी मर्माहत, परिजनों को 4-4 लाख मुआवजा

पटना: बिहार के कटिहार जिले में वज्रपात से तीन लोगों की दर्दनाक मौत की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे अत्यंत दुखद और पीड़ादायक बताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि इस कठिन समय में राज्य सरकार पूरी तरह से उनके साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि प्राकृतिक आपदाएं कभी भी और कहीं भी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती हैं, और इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वज्रपात जैसी घटनाएं कितनी घातक हो सकती हैं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और शोक संतप्त परिवारों को इस दुख को सहने की शक्ति दें।

कटिहार जिले में हुई इस घटना के बारे में बताया जा रहा है कि अचानक मौसम में बदलाव के दौरान तेज गरज-चमक के साथ बारिश शुरू हुई, जिसके बीच वज्रपात की चपेट में आने से तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग गहरे सदमे में हैं। ग्रामीणों ने बताया कि घटना इतनी अचानक हुई कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल राहत देने का निर्देश जारी किया है। उन्होंने सभी मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का आदेश दिया है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि सहायता राशि बिना किसी देरी के पीड़ित परिवारों तक पहुंचाई जाए, ताकि उन्हें इस कठिन समय में आर्थिक सहारा मिल सके।

उन्होंने संबंधित जिला प्रशासन को भी निर्देश दिया है कि वे प्रभावित परिवारों से संपर्क बनाए रखें और हर संभव सहायता उपलब्ध कराएं। साथ ही, आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को भी सतर्क रहने और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन को लेकर पूरी तरह गंभीर है और हर स्तर पर तैयारी की जा रही है। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, खेतों या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।

इस घटना के बाद प्रशासन ने इलाके में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कदम उठाने की बात कही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वज्रपात के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग, खुले मैदान में खड़ा रहना या पेड़ के नीचे शरण लेना बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों ने घटनास्थल का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, जबकि परिजनों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया गया है। गांव में इस घटना के बाद शोक का माहौल है और लोग एक-दूसरे को सांत्वना देते नजर आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से यह भी कहा है कि वे राज्य के सभी जिलों में वज्रपात से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाएं, ताकि लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके। उन्होंने कहा कि तकनीकी साधनों का उपयोग कर लोगों को मौसम की जानकारी समय पर देना बेहद जरूरी है, जिससे जान-माल की हानि को कम किया जा सके।

यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सजग रहना कितना आवश्यक है। सरकार द्वारा दी जा रही आर्थिक सहायता और प्रशासन की सक्रियता निश्चित रूप से प्रभावित परिवारों के लिए राहत का काम करेगी, लेकिन अपनों को खोने का दर्द कभी कम नहीं हो सकता।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे हर मामले में त्वरित कार्रवाई और संवेदनशीलता के साथ राहत पहुंचाना उसकी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह कदम पीड़ित परिवारों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को दर्शाता है।

इस दुखद घटना के बाद पूरे राज्य में लोगों ने मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की है और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। सरकार और प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं।

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