
मुंगेर जिले में सम्राट चौधरी के हालिया दौरे ने क्षेत्र के विकास को लेकर नई उम्मीद जगा दी है। असरगंज प्रखंड स्थित ऐतिहासिक ढोल पहाड़ी पहुंचकर उन्होंने सबसे पहले मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद क्षेत्र के समग्र विकास के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इस दौरान स्थानीय लोगों में भारी उत्साह और खुशी देखने को मिली।
ढोल पहाड़ी को इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने के लिए ₹12.49 करोड़ की परियोजना की शुरुआत की गई है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक विकास हरविंदर सिंह के अनुसार, इस योजना के तहत पिकनिक स्पॉट, सुंदर पार्क, भव्य शिव प्रतिमा, बैंक्वेट हॉल और क्राफ्ट शॉप्स का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा आधुनिक पार्किंग, पक्के रास्ते, सोलर लाइट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और बेहतर पेयजल सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
परियोजना में बाबा मौनीनाथ मंदिर और आसपास की प्राचीन गुफाओं को पर्यटन सर्किट से जोड़ने की योजना है, जिससे इसे धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाया जा सके।
इसी क्रम में टेटिया बंबर प्रखंड के देवघरा पहाड़ पर स्थित बाबा उच्चेश्वरनाथ धाम के विकास के लिए ₹26.31 करोड़ की एक और इको-टूरिज्म परियोजना का शिलान्यास किया गया। यह धाम आस्था और इतिहास का महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर विशाल मेला आयोजित होता है।
इस परियोजना के तहत भव्य प्रवेश द्वार, विवाह मंडप, शिव थीम पार्क, तालाब, 350 सीढ़ियों का निर्माण, यात्री शेड, हिल टॉप पार्क और सेल्फी प्वाइंट जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही मुख्य मंदिर तक बेहतर कनेक्टिविटी और विश्राम स्थलों का भी निर्माण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इस ऐतिहासिक पहल से क्षेत्र के लोगों में खासा उत्साह है। उनका मानना है कि लंबे समय से प्रतीक्षित विकास अब साकार होता नजर आ रहा है और मुंगेर जल्द ही बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बनाएगा।


