
बिहार में लागू शराबबंदी कानून जहां एक ओर सामाजिक सुधार और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू किया गया था, वहीं दूसरी ओर इसी कानून की आड़ में कुछ लोगों द्वारा अवैध वसूली का खेल भी सामने आता रहा है। ताजा मामला जमुई जिले के सोनो थाना क्षेत्र के डुमरी चेकपोस्ट से सामने आया है, जहां तीन होमगार्ड जवानों को शराबबंदी कानून के नाम पर यात्रियों से अवैध वसूली करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इस घटना ने एक बार फिर कानून के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह दिखाया है कि कैसे कुछ लोग नियमों का दुरुपयोग कर आम जनता का शोषण कर रहे हैं।
घटना की शुरुआत 21 अप्रैल को हुई, जब झारखंड के गिरिडीह निवासी श्यामसुंदर यादव अपने पांच साथियों के साथ एक पारिवारिक तिलक समारोह में शामिल होने के लिए बिहार आ रहे थे। उनकी स्कॉर्पियो गाड़ी जैसे ही डुमरी चेकपोस्ट पर पहुंची, वहां तैनात होमगार्ड जवानों ने उन्हें रोक लिया और वाहन की जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान न केवल गाड़ी की तलाशी ली गई, बल्कि यात्रियों की शराब सेवन की जांच भी की गई। आरोप है कि जांच के नाम पर जवानों ने यात्रियों को यह कहकर डराया कि वे शराब के नशे में हैं और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के कारण आम लोगों में कानून का डर पहले से ही मौजूद है। इसी का फायदा उठाते हुए आरोपित जवानों ने यात्रियों पर दबाव बनाना शुरू किया। स्थिति ऐसी बना दी गई कि यात्रियों को लगा कि अब उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा या भारी जुर्माना भरना पड़ेगा। इसी दौरान जवानों ने मामला ‘सेट’ करने की बात कही और पैसों की मांग की। बातचीत के बाद अंततः 16,000 रुपये में सौदा तय हुआ।
बताया जाता है कि यात्रियों ने मजबूरी में 9,500 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए, जबकि 5,500 रुपये नकद दिए। पैसे मिलते ही जवानों ने बिना किसी कानूनी कार्रवाई के उन्हें जाने दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह कोई सामान्य जांच नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से की जा रही अवैध वसूली थी।
घटना के बाद पीड़ित श्यामसुंदर यादव ने हिम्मत जुटाकर पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल को लिखित शिकायत दी और पूरे मामले की जानकारी दी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान आरोप सही पाए गए और यह पुष्टि हुई कि चेकपोस्ट पर तैनात तीनों होमगार्ड जवान शराबबंदी कानून की आड़ में अवैध वसूली कर रहे थे।
इसके बाद सोनो थाना में मामला दर्ज किया गया और तीनों आरोपितों—सूर्यमणि कुमार, नवीन कुमार और आशीष कुमार—को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा का माहौल है और लोग प्रशासन की तत्परता की सराहना भी कर रहे हैं।
झाझा एसडीपीओ राजेश कुमार ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कहा कि कानून की आड़ में किसी भी प्रकार की अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और कड़ी की जाएगी।
यह घटना केवल एक मामला नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक समस्या की ओर इशारा करती है, जहां कुछ लोग सरकारी व्यवस्था और कानून का दुरुपयोग कर आम नागरिकों को परेशान करते हैं। शराबबंदी जैसे सख्त कानून का उद्देश्य समाज को बेहतर बनाना है, लेकिन जब इसी कानून का इस्तेमाल डर पैदा करने और पैसे वसूलने के लिए किया जाता है, तो यह न केवल कानून की छवि को धूमिल करता है, बल्कि जनता का भरोसा भी कमजोर करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन कई बार लोग डर या झंझट से बचने के लिए शिकायत नहीं करते। इस मामले में पीड़ित द्वारा शिकायत करना और प्रशासन का त्वरित एक्शन लेना एक सकारात्मक संकेत है, जिससे उम्मीद की जा सकती है कि आगे ऐसे मामलों में कमी आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी है। चेकपोस्ट पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, डिजिटल रिकॉर्डिंग और नियमित निरीक्षण जैसे कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अपने अधिकारों का दुरुपयोग न कर सके।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कानून का सही तरीके से पालन हो रहा है या फिर कुछ लोग इसका फायदा उठाकर अपनी जेब भरने में लगे हैं। हालांकि, इस बार प्रशासन की सख्ती ने यह संदेश जरूर दिया है कि अगर कोई भी कानून के नाम पर गलत काम करेगा, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है और क्या वास्तव में सिस्टम में सुधार आता है या नहीं। फिलहाल, जमुई की इस घटना ने पूरे राज्य में एक बार फिर शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर बहस छेड़ दी है और लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कानून का सही उपयोग ही समाज को सुरक्षित और न्यायपूर्ण बना सकता है।


