दूल्हा बनने से पहले ही बुझ गया चिराग, नेपाल में भीषण सड़क हादसे में सीतामढ़ी के विशाल की मौत

सीतामढ़ी जिले के बैरगनिया क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। जिस घर में कुछ ही दिनों बाद शहनाइयां गूंजने वाली थीं, वहां अचानक एक सड़क हादसे ने सबकुछ बदल दिया। 19 वर्षीय विशाल कुमार, जिसकी शादी आगामी 8 मई को तय थी, नेपाल में हुए एक भीषण सड़क हादसे में अपनी जान गंवा बैठा। इस घटना ने न केवल उसके परिवार, बल्कि पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है।

बैरगनिया नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 01 स्थित सिंदुरिया गांव निवासी प्रदीप महतो का परिवार इन दिनों शादी की तैयारियों में जुटा हुआ था। विशाल कुमार, जो उनका बेटा था, अपने जीवन के नए सफर की शुरुआत करने वाला था। परिवार के लोग उत्साह के साथ शादी की तैयारी कर रहे थे, रिश्तेदारों को न्योता भेजा जा चुका था और घर में खुशी का माहौल था। लेकिन किसे पता था कि यह खुशी कुछ ही पलों में मातम में बदल जाएगी।

घटना के बारे में मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार की रात करीब 10 बजे विशाल कुमार अपने गांव के ही 18 वर्षीय अवनीश कुमार के साथ मोटरसाइकिल से नेपाल जा रहा था। बताया जा रहा है कि वह अपनी फुआ लक्ष्मीनिया देवी के घर जयनगर (नेपाल) जा रहा था। इसी दौरान नेपाल के रौतहट जिले के सबगाढ़ा क्षेत्र के पास एक निर्माणाधीन पुल से उनकी बाइक अनियंत्रित होकर टकरा गई।

हादसा इतना भयानक था कि विशाल कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके साथ जा रहे अवनीश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत घटना की सूचना नेपाल पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों को उठाकर गौर जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने विशाल को मृत घोषित कर दिया, जबकि अवनीश का इलाज शुरू किया गया।

इस घटना की खबर जैसे ही गांव और परिजनों तक पहुंची, पूरे परिवार में कोहराम मच गया। जिस घर में शादी की तैयारियों को लेकर हंसी-खुशी का माहौल था, वहां अचानक मातम छा गया। मां रुक्मिणी देवी, पिता प्रदीप महतो और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बड़े भाई रितेश कुमार और छोटे भाई सुमित कुमार सहित पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

विशाल कुमार की शादी नेपाल के ही रौतहट जिले के एक गांव में तय हुई थी। दोनों परिवारों में शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं। दूल्हा बनने का सपना देख रहे विशाल के लिए यह समय जीवन का सबसे खुशहाल दौर होना चाहिए था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक पल में सब कुछ खत्म हो गया।

नेपाल पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद रविवार को शव परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद शव को गांव लाया गया, जहां स्थानीय लालबकेया नदी के किनारे हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान गांव के सैकड़ों लोग मौजूद रहे और सभी की आंखें नम थीं।

घटना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी मृतक के घर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। नगर परिषद के सभापति प्रतिनिधि ब्रजमोहन कुमार, उपसभापति धीरज कुमार सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता राम आशीष राय सहित कई लोगों ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया।

यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े करता है। निर्माणाधीन सड़कों और पुलों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम न होने के कारण अक्सर इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। अगर वहां उचित संकेत, बैरिकेडिंग और रोशनी की व्यवस्था होती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी आम बात है, जिससे आए दिन हादसे होते रहते हैं। प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।

विशाल कुमार की असमय मौत ने यह भी दिखा दिया कि जीवन कितना अनिश्चित है। जो युवक कुछ दिनों बाद दूल्हा बनने वाला था, उसकी अर्थी उठी। यह घटना हर किसी को झकझोर देने वाली है। गांव के लोग आज भी इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं।

परिवार के लोग अब भी इस घटना पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। उनके लिए यह किसी बुरे सपने जैसा है, जिससे वे जागना चाहते हैं, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा कठोर है। मां की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे और पिता गम में टूट चुके हैं।

यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही या असुरक्षा कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। जरूरत है कि हम सभी सतर्क रहें और प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए।

फिलहाल, सीतामढ़ी का सिंदुरिया गांव शोक में डूबा हुआ है। जहां शादी की शहनाइयां बजनी थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है। विशाल की यादें और उसकी अधूरी ख्वाहिशें अब सिर्फ परिवार के दिलों में ही रह गई हैं।

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