
भागलपुर। डिजिटल युग में रिश्तों के बनने और बिगड़ने की रफ्तार जितनी तेज है, उनके अंजाम भी उतने ही नाटकीय और कभी-कभी हृदयविदारक होते हैं। सोशल मीडिया के ‘लाइक’ और ‘कमेंट’ से शुरू हुआ प्यार जब वास्तविकता की जमीन पर उतरता है, तो अक्सर उम्मीदों का महल ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है। भागलपुर जिले के जोगसर थाना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक बूढ़ानाथ मंदिर परिसर गुरुवार की रात एक ऐसे ही हाई-वोल्टेज ड्रामे का गवाह बना। जहाँ एक प्रेमी जोड़ा जीवन भर साथ निभाने की कसमें खाने वाला था, वहीं दूल्हे ने ऐन मौके पर मंडप पर बैठकर शादी करने से साफ इनकार कर दिया। यह घटना केवल एक शादी का टूटना नहीं है, बल्कि यह उन हजारों युवाओं के लिए एक चेतावनी है जो इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर पनपने वाले ‘वर्चुअल’ रिश्तों को बिना सोचे-समझे ‘परमानेंट’ मान लेते हैं। इस घटना के बाद मंदिर परिसर में घंटों तक अफरा-तफरी का माहौल रहा और लड़की पक्ष के अरमानों पर पानी फिर गया।
इंस्टाग्राम की रील से शुरू हुई रीयल कहानी: अगस्त का वह महीना
इस प्रेम कहानी की शुरुआत पिछले साल अगस्त महीने में हुई थी। भागलपुर के बाथ थाना क्षेत्र का रहने वाला शिवम कुमार और भीखनपुर की निवासी तुलसी कुमारी के बीच पहली मुलाकात ‘इंस्टाग्राम’ के जरिए हुई। शिवम, जो कोलकाता में ड्राइवर के रूप में कार्यरत है, अपनी रील और प्रोफाइल के जरिए तुलसी के संपर्क में आया। शुरुआती बातचीत का सिलसिला जल्द ही घंटों लंबी कॉल और वीडियो कॉल में बदल गया। शिवम ने तुलसी को अपने प्यार के जाल में इस कदर उलझाया कि शादी के बड़े-बड़े वादे कर दिए गए। तुलसी, जो शिवम की बातों पर पूरी तरह भरोसा कर चुकी थी, उसके साथ घर बसाने के सपने देखने लगी।
शिवम करीब 20 दिन पहले कोलकाता से भागलपुर आया था। कारण था उसके परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु, लेकिन इस शोक के माहौल के बीच भी उसकी और तुलसी की बातचीत का सिलसिला थमा नहीं। शिवम ने तुलसी को भरोसा दिलाया कि वह इस बार शादी करके ही वापस जाएगा। प्यार के इस परवान चढ़ते दौर में किसी को यह अंदाजा नहीं था कि स्क्रीन पर दिखने वाला यह अनुराग मंडप की वेदी तक पहुँचते-पूँछते नफरत या मुकरने में बदल जाएगा।
चूड़ी का साइज और शगुन की रस्म: जब परिवारों ने भरी हामी
अक्सर प्रेम विवाहों में परिवार का विरोध देखने को मिलता है, लेकिन इस मामले में स्थिति अलग थी। शिवम के परिजनों ने भी इस रिश्ते को अपनी मंजूरी दे दी थी। घटना की संजीदगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शिवम के पिता ने खुद तुलसी को फोन कर उसके चूड़ी का साइज पूछा था, ताकि शादी के गहने और श्रृंगार का सामान तैयार किया जा सके। इतना ही नहीं, करीब 15 दिन पहले लड़के के परिवार की ओर से कुछ लोग भीखनपुर स्थित लड़की के घर पहुँचे और शगुन की रस्म भी निभाई गई।
शगुन की रस्म होने के बाद लड़की पक्ष पूरी तरह आश्वस्त हो गया। उन्हें लगा कि अब सामाजिक और पारिवारिक रूप से यह रिश्ता पक्का हो चुका है। तुलसी के माता-पिता ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार शादी की तैयारियां शुरू कर दीं। हलवाई से लेकर टेंट और रिश्तेदारों को न्योता भेजने तक का काम पूरा हो चुका था। विवाह के लिए बाबा बूढ़ानाथ का पावन मंदिर तय किया गया, जो भागलपुर के लोगों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है।
शादी की रात का इंतजार: 7 बजे से 9 बजे तक का तनाव
गुरुवार की शाम जब तुलसी लाल जोड़े में सज-धजकर अपने परिवार के साथ बूढ़ानाथ मंदिर पहुँची, तो उसकी आँखों में नए जीवन की चमक थी। लड़की पक्ष के लोग शाम 7 बजे तक मंदिर परिसर में अपनी स्थिति संभाल चुके थे। रस्मों के लिए जरूरी सामान और पुजारी का इंतजाम कर लिया गया था। लेकिन समय बीतता गया और दूल्हा शिवम वहां नहीं पहुँचा।
जब लड़की वालों ने बेचैन होकर शिवम को फोन किया, तो उसने बहानेबाजी शुरू कर दी। पहले उसने कहा कि वह ई-रिक्शा भेज रहा है, जिससे वह मंदिर आएगा। लड़की वालों ने यहाँ तक कह दिया कि वह किसी भी गाड़ी से आ जाए, किराए का भुगतान वे कर देंगे। काफी मिन्नतें करने और दबाव डालने के बाद रात करीब 9 बजे शिवम अपने एक दोस्त के साथ बाइक पर सवार होकर मंदिर पहुँचा। उसे देखते ही लड़की पक्ष ने राहत की सांस ली, लेकिन उन्हें क्या पता था कि असली तूफान अभी आना बाकी है।
आधार कार्ड का पेंच और दूल्हे की ‘यू-टर्न’
जैसे ही शादी की रस्में शुरू होने वाली थीं, बूढ़ानाथ मंदिर प्रशासन ने अपनी मानक प्रक्रिया (SOP) के तहत दूल्हा और दुल्हन से संबंधित कानूनी दस्तावेज मांगे। मंदिर की ओर से दोनों के आधार कार्ड और उनके अभिभावकों की उपस्थिति की मांग की गई। यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है जो आजकल हर मंदिर और विवाह स्थल पर अनिवार्य कर दी गई है ताकि किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े या कानूनी अड़चन से बचा जा सके।
आधार कार्ड की मांग सुनते ही शिवम के हाव-भाव अचानक बदल गए। उसने दस्तावेज दिखाने में आनाकानी शुरू कर दी। जब मंदिर प्रशासन और लड़की पक्ष ने जोर दिया, तो शिवम अचानक उखड़ गया। उसने सबके सामने चिल्लाकर कह दिया— “मैं यह शादी नहीं करूँगा।” मंडप पर बैठे दूल्हे के मुँह से यह शब्द सुनते ही वहां सन्नाटा पसर गया। तुलसी के माता-पिता उसके पैरों में गिर पड़े, उसे वादे याद दिलाए, शगुन की दुहाई दी, लेकिन शिवम टस से मस नहीं हुआ। वह बिना किसी ठोस कारण के शादी से पीछे हट गया।
धोखा, हंगामा और समाज पर उठते सवाल
शिवम के इस व्यवहार से मंदिर परिसर में भारी हंगामा खड़ा हो गया। लड़की पक्ष के लोगों का कहना है कि अगर उसे शादी नहीं करनी थी, तो उसने शगुन क्यों लिया? उसने इतने महीनों तक तुलसी को धोखे में क्यों रखा? तुलसी की मां रश्मि कुमारी (नाम परिवर्तित) का रो-रोकर बुरा हाल था। उनका कहना था कि समाज में अब वे किस मुँह से वापस जाएँगी। बेटी की शादी के लिए उन्होंने जो जमा-पूँजी लगाई थी, वह तो बर्बाद हुई ही, साथ ही उनकी इज्जत भी नीलाम हो गई।
इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर होने वाले रिश्तों की गहराई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंस्टाग्राम पर जो रिश्ते महज एक ‘क्लिक’ से शुरू होते हैं, उनमें अक्सर जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता का अभाव होता है। शिवम का अचानक पीछे हटना इस बात का संकेत है कि वह शायद इस रिश्ते को लेकर कभी गंभीर था ही नहीं या फिर आधार कार्ड और कानूनी औपचारिकताओं के डर से उसके मन में कोई छिपा हुआ डर उजागर हो गया।
न्याय की गुहार और विधिक पहलू
लड़की पक्ष ने इस पूरे मामले को विश्वासघात और मानहानि का मामला बताया है। स्थानीय लोगों और प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि इस तरह सरेआम किसी की भावनाओं के साथ खेलना अपराध की श्रेणी में आता है। शिवम ने न केवल तुलसी का भरोसा तोड़ा है, बल्कि दो परिवारों के बीच हुए सामाजिक समझौते का भी उल्लंघन किया है। लड़की पक्ष अब स्थानीय पुलिस और प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहा है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, अगर शादी का वादा करके उसे निभाया नहीं जाता और इसके पीछे दुर्भावनापूर्ण मंशा (Malafide Intention) होती है, तो पीड़ित पक्ष धोखाधड़ी और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज करा सकता है। खासकर जब शगुन जैसी रस्में पूरी हो चुकी हों, तो यह मामला और भी गंभीर हो जाता है। भागलपुर के इस चर्चित मामले ने पूरे शहर में चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है। लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि कोई युवक इतनी हिम्मत कैसे कर सकता है कि वह मंडप तक आए और फिर बिना किसी ठोस वजह के मुकर जाए।


