
भागलपुर। बिहार के अंग जनपद में सूरज के तल्ख तेवर और आसमान से बरसती आग ने जनजीवन को बेहाल करना शुरू कर दिया है। अप्रैल के महीने में ही पारे की उछाल ने सड़कों पर चलने वाले राहगीरों, मजदूरों और रेहड़ी-पटरी वालों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भीषण गर्मी और लू (Heat Wave) के इस शुरुआती दौर में प्यास से व्याकुल लोगों की मदद के लिए सामाजिक संस्थाएं अब धरातल पर उतरने लगी हैं। इसी कड़ी में, रेशम नगरी भागलपुर में सामाजिक सरोकारों के प्रति सदैव समर्पित रहने वाली ‘श्री कशोधन वैश्य महिला समिति’ ने अपनी मानवीय पहल की शुरुआत की है। शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को समिति द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ‘शीतल जल वितरण सेवा’ का विधिवत शुभारंभ किया गया। यह सेवा न केवल प्यास बुझाने का माध्यम है, बल्कि चिलचिलाती धूप में संघर्ष कर रहे आम आदमी के प्रति संवेदना का प्रतीक भी है। समिति ने स्पष्ट किया है कि इस बार गर्मी के भीषण प्रकोप को देखते हुए व्यवस्थाओं को और अधिक व्यापक बनाया गया है, ताकि शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरने वाले किसी भी व्यक्ति को पानी के लिए भटकना न पड़े।
भक्ति और सेवा का संगम: विधिवत उद्घाटन के साथ अभियान की शुरुआत
शुक्रवार की दोपहर जब शहर का तापमान अपने चरम पर था, तब कशोधन वैश्य महिला समिति के सदस्यों ने सेवा के इस महायज्ञ का श्रीगणेश किया। कार्यक्रम का उद्घाटन पूरी गरिमा और सादगी के साथ किया गया। इस अवसर पर उपस्थित समिति के सदस्यों ने संकल्प लिया कि आगामी दो महीनों तक, जब तक गर्मी का प्रकोप शांत नहीं होता, यह सेवा अनवरत जारी रहेगी। भागलपुर के व्यस्ततम इलाकों में शामिल इस स्थल पर शीतल जल के साथ-साथ स्वच्छता का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
समिति की वरिष्ठ सदस्य रत्ना गुप्ता ने कार्यक्रम के दौरान जानकारी साझा करते हुए बताया कि भागलपुर में अप्रैल और मई के महीने में गर्मी अपने रौद्र रूप में होती है। ऐसे में जो लोग काम के सिलसिले में घर से बाहर निकलते हैं, उन्हें लू लगने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। रत्ना गुप्ता ने कहा कि यह सेवा केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि समिति की एक जिम्मेदारी है। यह कार्यक्रम आगामी लगभग दो महीने तक निरंतर संचालित किया जाएगा। समिति ने इसके लिए विशेष वालंटियर्स और संसाधनों की व्यवस्था की है ताकि पानी की उपलब्धता में एक पल की भी कमी न आए।
सत्तू वितरण: बिहार के पारंपरिक ‘एनर्जी ड्रिंक’ से मिली ऊर्जा
सेवा के पहले दिन समिति ने एक अनूठी और प्रशंसनीय पहल की। राहगीरों को केवल पानी ही नहीं पिलाया गया, बल्कि बिहार के पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक आहार सत्तू का भी वितरण किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि सत्तू न केवल पेट को ठंडक प्रदान करता है, बल्कि भीषण गर्मी में शरीर को तुरंत ऊर्जा (Instant Energy) भी देता है।
सत्तू वितरण के पीछे की सोच यह है कि दोपहर के समय कई मजदूर और रिक्शा चालक खाली पेट काम करते हैं, जिससे उन्हें चक्कर आने या बेहोश होने का डर रहता है। समिति द्वारा बांटे गए सत्तू के शरबत और सूखे सत्तू के पैकेटों ने लोगों को काफी राहत पहुँचाई। राहगीरों ने इस पहल की मुक्तकंठ से सराहना की। सत्तू, जिसे ‘गरीबों का प्रोटीन’ भी कहा जाता है, इस चिलचिलाती धूप में एक औषधि की तरह काम कर रहा है। समिति के इस प्रयास ने यह साबित कर दिया कि वे केवल प्यास बुझाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के प्रति भी गंभीर हैं।
तीन वर्षों की निरंतरता और संकल्प: अध्यक्ष विनय कुमार गुप्ता का विजन
कशोधन वैश्य महिला समिति के अध्यक्ष विनय कुमार गुप्ता ने इस अवसर पर समिति के पिछले कार्यों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि समिति पिछले तीन वर्षों से निरंतर ग्रीष्मकाल में इस तरह की सेवाओं का आयोजन कर रही है। विनय कुमार गुप्ता ने कहा कि समाज सेवा का यह कार्य उनके पूर्वजों की प्रेरणा और समिति के सदस्यों के आपसी सहयोग का परिणाम है।
अध्यक्ष के अनुसार, समिति केवल जल सेवा तक ही सीमित नहीं रहना चाहती। आने वाले समय में शहर के अन्य महत्वपूर्ण जंक्शनों पर भी इसी तरह के अस्थाई ‘प्याऊ’ (Water Stalls) लगाने की योजना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कशोधन वैश्य महिला समिति का प्रत्येक सदस्य निस्वार्थ भाव से समाज सेवा के लिए सदैव तत्पर रहेगा। अध्यक्ष ने भागलपुर के अन्य जागरूक नागरिकों और संस्थाओं से भी अपील की कि वे इस भीषण गर्मी में अपने सामर्थ्य अनुसार सड़कों पर चलने वाले बेजुबानों और जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं।
गर्मी का प्रकोप और प्रशासनिक चुनौतियां
भागलपुर में अप्रैल 2026 की शुरुआत से ही पारा 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास मंडरा रहा है। ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा भी जल संकट से निपटने के लिए कई निर्देश जारी किए गए हैं। लेकिन सरकारी प्रयासों के साथ-साथ जब सामाजिक संस्थाएं जैसे कशोधन वैश्य महिला समिति आगे आती हैं, तो व्यवस्था में पारदर्शिता और सहजता बढ़ जाती है।
अक्सर देखा गया है कि शहर के कई सार्वजनिक चापाकल और वॉटर एटीएम तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े रहते हैं। ऐसी स्थिति में समिति द्वारा प्रदान किया जा रहा शीतल और स्वच्छ जल लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस सेवा कार्य में स्वच्छता का भी विशेष महत्व दिया जा रहा है; डिस्पोजेबल गिलासों का उचित निपटान और पानी के टैंकरों की नियमित सफाई समिति की प्राथमिकता सूची में शामिल है।
सामाजिक एकजुटता का उदाहरण: सदस्यों की सक्रिय भागीदारी
इस शीतल जल सेवा कार्यक्रम की सफलता के पीछे कशोधन वैश्य महिला समिति के सदस्यों की अटूट निष्ठा है। कार्यक्रम के पहले दिन रत्ना गुप्ता और विनय कुमार गुप्ता के अलावा समिति के कई अन्य सदस्य और स्थानीय प्रबुद्ध लोग उपस्थित रहे। सभी ने बारी-बारी से राहगीरों को पानी पिलाया और उनकी कुशलता जानी।
वहाँ मौजूद एक रिक्शा चालक ने बताया कि सड़कों पर प्यास तो बहुत लगती है, लेकिन बार-बार बोतलबंद पानी खरीदना उनकी कमाई के बाहर की बात है। ऐसे में ये मुफ्त सेवा केंद्र उनके जैसे सैकड़ों लोगों की जान बचाने का काम कर रहे हैं। समिति के सदस्यों का कहना है कि राहगीरों के चेहरों पर दिखने वाली संतुष्टि ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी और मेहनत का फल है।


