​Patna Zoo Summer Care: पटना जू में गर्मी से राहत के लिए कूलर-एसी के इंतजाम, बाघ और चिम्पांजी का बदला डाइट चार्ट

पटना। बिहार में सूरज के तल्ख तेवर और बढ़ते पारे ने इंसानों के साथ-साथ बेजुबानों की मुश्किलों को भी बढ़ा दिया है। राजधानी के सबसे बड़े फेफड़े यानी संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू) में वन्यप्राणियों को ‘हीट स्ट्रोक’ और लू के थपेड़ों से बचाने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को जू प्रबंधन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उद्यान के भीतर एक व्यापक ‘समर एक्शन प्लान’ को धरातल पर उतारा गया है। यह योजना न केवल बाड़ों के तापमान को नियंत्रित करने तक सीमित है, बल्कि इसमें जानवरों के चयापचय (Metabolism) और खान-पान के वैज्ञानिक पहलुओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है। जहाँ एक तरफ बाघ और शेर के ‘नाइट हाउस’ में कूलर की ठंडी हवा का पहरा है, वहीं दूसरी तरफ चिम्पांजी और भालू जैसे जीवों के लिए रसीले फलों और नारियल पानी का विशेष ‘समर मेन्यू’ तैयार किया गया है। प्रशासन की इस सक्रियता का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गर्मी की मार से किसी भी वन्यजीव के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

कूलिंग सिस्टम का जाल: 17 कूलर और 53 पंखों का सुरक्षा कवच

​पटना जू के अधिकारियों ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए बाड़ों के ‘माइक्रो-क्लाइमेट’ को बदलने के लिए आधुनिक उपकरणों का सहारा लिया है। विशेष रूप से उन मांसाहारी जीवों पर नजर रखी जा रही है जो तापमान के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। जू प्रशासन ने शेर, बाघ, तेंदुआ, लकड़बग्घा और हिमालयन भालू जैसे शक्तिशाली जीवों के नाइट हाउस में कुल 17 कूलर और 53 पंखे स्थापित किए हैं। ये कूलर केवल हवा नहीं फेंकते, बल्कि बाड़ों के भीतर की नमी को बरकरार रखते हैं ताकि गर्म हवा के थपेड़ों का असर कम हो सके।

​इसके अतिरिक्त, पक्षियों और हिरणों के बाड़ों में ‘मिस्ट फोगर’ और ‘स्प्रिंकलर’ तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यह तकनीक पानी की अत्यंत सूक्ष्म बूंदों का छिड़काव करती है, जिससे बाड़े का तापमान बाहरी वातावरण की तुलना में 5 से 8 डिग्री तक कम बना रहता है। एमू, ऑस्ट्रिच और भालू के बाड़ों में फव्वारे (Fountain) चालू कर दिए गए हैं, जहाँ ये जीव अपनी मर्जी से स्नान कर शरीर को ठंडा रखते हैं। हाथियों के लिए ‘वॉटर थेरेपी’ अपनाई जा रही है, जिसमें उनके विशाल शरीर पर स्प्रिंकलर से पानी की बौछार की जाती है और उनके कुंड (मोट) को हमेशा ताजे पानी से भरा रखा जाता है।

खान-पान में ‘वैज्ञानिक’ बदलाव: मीट कम, इलेक्ट्रोलाइट्स ज्यादा

​गर्मी के मौसम में जानवरों की पाचन शक्ति अक्सर धीमी हो जाती है, जिसे ध्यान में रखते हुए उनके ‘डाइट चार्ट’ में बड़े बदलाव किए गए हैं। मांसाहारी वन्यजीवों को अपच (Indigestion) की समस्या न हो, इसके लिए उनके मांस की मात्रा में आंशिक कटौती की गई है। इसके पीछे का तर्क यह है कि भारी भोजन गर्मी में शरीर के तापमान को और बढ़ा सकता है। शरीर में पानी और खनिज लवणों की कमी को रोकने के लिए वन्यजीवों के पेयजल में ग्लूकॉन डी, इलेक्ट्रॉल पाउडर और डायरेस्ट जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का नियमित उपयोग किया जा रहा है।

​सबसे दिलचस्प बदलाव चिम्पांजी के भोजन में देखा जा रहा है। उनके आहार में अब नारियल पानी, तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा, अनार का रस और अंगूर जैसे रसीले फल शामिल किए गए हैं। साथ ही उन्हें ‘दही-भात’ भी परोसा जा रहा है, जो प्रोबायोटिक गुणों के कारण उनके पेट को ठंडा और सुरक्षित रखता है। भालुओं को केले के थम्ब (तने का कोमल हिस्सा) नियमित रूप से दिए जा रहे हैं। वहीं, मगरमच्छ और घड़ियाल जैसे जीवों में ऊर्जा की कमी न हो, इसके लिए उनके आहार में थोड़ी वृद्धि की गई है क्योंकि वे पानी के भीतर ऊर्जा का अधिक क्षय करते हैं।

सरीसृप और शाकाहारी जीवों के लिए विशेष सुरक्षा

​सांप, अजगर, कोबरा और वाइपर जैसे सरीसृप (Reptiles) के लिए गर्मी का मौसम काफी चुनौतीपूर्ण होता है। पटना जू के स्नेक हाउस में फर्श पर लगातार पानी का छिड़काव किया जा रहा है ताकि उनकी खाल में नमी बनी रहे। सरीसृपों के रहने के स्थान पर मिट्टी के टीलों और गीली घास का उपयोग किया गया है। शाकाहारी वन्यजीवों को लू से बचाने के लिए विशेष होम्योपैथिक दवाएं और ग्लूकोज की खुराक दी जा रही है। उद्यान के सभी बोरवेल की मरम्मत का कार्य समय से पहले पूरा कर लिया गया है, ताकि बाड़ों के साथ-साथ उद्यान के मार्ग किनारे लगे पौधों पर भी पानी का छिड़काव निरंतर किया जा सके और पूरे परिसर में शीतलता बनी रहे।

पर्यटकों और कर्मियों के लिए आधुनिक व पारंपरिक सुविधाएं

​पटना जू केवल जानवरों की ही नहीं, बल्कि यहाँ आने वाले हजारों पर्यटकों की सुविधा का भी पूरा ख्याल रख रहा है। उद्यान के विभिन्न हिस्सों में कुल 14 वॉटर कूलर (RO सहित) लगाए गए हैं। प्रशासन ने आधुनिकता के साथ परंपरा का भी तालमेल बिठाया है; परिसर में 30 अलग-अलग स्थानों पर मिट्टी के घड़ों में ठंडे पानी की व्यवस्था की गई है। यह कदम पर्यटकों को ‘देसी’ तरीके से तृप्त करने के लिए उठाया गया है।

​प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए जू के सभी कर्मियों को नई टी-शर्ट और टोपी का वितरण किया गया है। वन्यजीवों पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है और इसके लिए विशेषज्ञों की एक टीम तैनात है। गर्मी के मौसम में आग लगने के खतरों को देखते हुए जू के कर्मचारियों को ‘आकस्मिक अग्नि सुरक्षा’ का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

सुशासन और संवेदना का संगम

​अंततः, पटना जू के ये पुख्ता इंतजाम दर्शाते हैं कि प्रशासन वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति कितना गंभीर है। 24 अप्रैल 2026 की यह रिपोर्ट बताती है कि तकनीक और संवेदना की जुगलबंदी से हम भीषण गर्मी में भी इन बेजुबानों का जीवन आसान बना सकते हैं। 17 कूलर, दर्जनों पंखे और इलेक्ट्रोलाइट्स से लैस यह ‘समर प्लान’ बिहार के अन्य उद्यानों के लिए भी एक मिसाल है। अब जब सूरज अपनी तपिश बढ़ा रहा है, पटना जू के जानवर कूलर की ठंडी हवा और तरबूज के जायके के साथ सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

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