
भागलपुर/सबौर। बिहार की मिट्टी में ज्ञान और विज्ञान की जो जुगलबंदी ‘बिहार कृषि विश्वविद्यालय’ (बीएयू), सबौर में देखने को मिलती है, वह राज्य के भविष्य की एक सुनहरी तस्वीर पेश करती है। शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को विश्वविद्यालय का परिसर किसी उत्सव की तरह जगमगा रहा था, जहाँ अवसर था 9वें दीक्षांत समारोह का। बिहार के राज्यपाल और कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन की अध्यक्षता में संपन्न हुए इस समारोह में केवल डिग्रियां नहीं बंटीं, बल्कि 2047 के विकसित भारत का रोडमैप भी तैयार किया गया। राज्यपाल ने अपनी सैन्य पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव को शब्दों में पिरोते हुए छात्रों को राष्ट्र निर्माण की शपथ दिलाई। गरिमा, अनुशासन और गौरव के इस त्रिवेणी संगम में जब 443 छात्र-छात्राओं ने अपनी स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की उपाधियां प्राप्त कीं, तो सबौर का करपुरी सभागार तालियों की गूँज से गूँज उठा। यह समारोह केवल एक शैक्षणिक औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार के कृषि वैज्ञानिकों की एक नई फौज की विदाई और उनकी नई जिम्मेदारी की शुरुआत का गवाह बना।
सैन्य अनुशासन और शैक्षणिक गरिमा का संगम
राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के माहौल की जो प्रशंसा की, वह चर्चा का विषय रही। उन्होंने समारोह की गुणवत्ता और अनुशासन की तुलना भारतीय सेना के उच्च मानकों से करते हुए कहा कि सबौर में उत्कृष्टता की एक नई संस्कृति जन्म ले रही है। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे हुई, लेकिन इससे पहले राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में नए स्विमिंग पूल का उद्घाटन किया और रुद्राक्ष का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
राज्यपाल ने छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि “वर्क इज वर्शिप” (काम ही पूजा है) केवल एक कहावत नहीं, बल्कि जीवन का आधार होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि क्षेत्र से जुड़े विद्यार्थी और वैज्ञानिक देश की खाद्य सुरक्षा के असली रक्षक हैं। उनकी मजबूती ही भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। राज्यपाल ने चीन के विकास मॉडल का उदाहरण देते हुए देंग शियाओपिंग के ‘चार आधुनिकीकरण’—कृषि, तकनीकी शिक्षा, उद्योग और सशस्त्र बल—का विशेष उल्लेख किया और बताया कि कैसे भारत के लिए भी कृषि अनुसंधान और तकनीक की जुगलबंदी अनिवार्य है।
डिग्रियों का वितरण और मखाना ‘उत्कृष्टता केंद्र’ की सौगात
इस दीक्षांत समारोह में कुल 443 छात्र-छात्राओं को उनके कठिन परिश्रम का फल मिला। शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर 6 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक (Gold Medal) से नवाजा गया। उपाधि प्राप्त करने वालों में 13 पीएचडी शोधार्थी शामिल थे, जो अब कृषि विज्ञान के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता का योगदान देंगे। पाठ्यक्रमों की विविधता इस विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गहराई को दर्शाती है—चाहे वह पीएचडी एग्रीकल्चर हो, एमएससी हॉर्टिकल्चर हो या एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट में एमबीए।
समारोह की सबसे बड़ी उपलब्धि बिहार के गौरव मखाना को लेकर रही। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में “मखाना उत्कृष्टता केंद्र” (Centre of Excellence for Makhana) की स्थापना पर अपनी सहमति प्रदान की। उन्होंने आश्वस्त किया कि मखाना अनुसंधान, उत्पादन और प्रसंस्करण को नई दिशा देने के लिए राजभवन और सरकार हर संभव सहयोग देगी। यह घोषणा सीमांचल और कोसी क्षेत्र के मखाना उत्पादकों के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी।
नवाचार और तकनीक: एआई फिल्म से समर्थ पोर्टल तक
बीएयू सबौर अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है। समारोह के दौरान ‘समर्थ ई-गवर्नेंस पोर्टल’ का लोकार्पण और कृषि ज्ञान पर आधारित एआई (AI) आधारित फिल्म का प्रदर्शन यह बताता है कि संस्थान तकनीक की दौड़ में कितना आगे है। राज्यपाल ने मीडिया सेंटर द्वारा बनाई गई शैक्षणिक फिल्मों की सराहना करते हुए घोषणा की कि अब ऐसी फिल्में ‘लोक भवन’ के माध्यम से भी तैयार की जाएंगी ताकि तकनीकी ज्ञान का प्रसार गांव-गांव तक हो सके।
विश्वविद्यालय ने इस अवसर पर अपनी वार्षिक स्मारिका और वार्षिक प्रतिवेदन 2025-26 का विमोचन भी किया। सबौर पेयजल संयंत्र का उद्घाटन और नीरा पाउच (अनार एवं ऑरेंज फ्लेवर) का शुभारंभ भी इस समारोह के आकर्षण का केंद्र रहा, जो कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन (Value Addition) की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कुलपति की रिपोर्ट: NAAC A-ग्रेड और वैश्विक रैंकिंग का लक्ष्य
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने स्वागत संबोधन के साथ अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बड़े गर्व के साथ बताया कि विश्वविद्यालय NAAC A-grade प्राप्त कर चुका है और इसे आईसीएआर (ICAR) से उच्च मान्यता प्राप्त है। नीति आयोग ने भी बीएयू को नोडल एजेंसी के रूप में मान्यता दी है, जो इसकी बढ़ती साख का प्रमाण है।
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय “एक वैज्ञानिक–एक उत्पाद” के सिद्धांत पर काम कर रहा है। “सबौर मखाना-1”, मखाना हार्वेस्टर, और ब्लूबेरी-ब्लैकबेरी जैसे नवाचारों ने बिहार को कृषि मानचित्र पर नई पहचान दी है। उनका संकल्प है कि 2027-28 तक बिहार कृषि विश्वविद्यालय QS वर्ल्ड रैंकिंग में अपना स्थान बनाए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत किए गए सुधारों और विस्तारित पुस्तकालय समय जैसी छात्र-हितैषी योजनाओं की भी जानकारी दी।
सामाजिक जिम्मेदारी: प्लास्टिक मुक्त बिहार और नशा मुक्ति
दीक्षांत समारोह केवल डिग्री बांटने तक सीमित नहीं रहा, राज्यपाल ने इसे सामाजिक जागरूकता के मंच के रूप में भी इस्तेमाल किया। उन्होंने परिसर को पूरी तरह से ‘प्लास्टिक मुक्त’ बनाने के प्रयासों की सराहना की और छात्रों से अपील की कि वे “प्लास्टिक मुक्त बिहार”, नशा मुक्ति और टीबी उन्मूलन जैसी मुहिमों में अग्रणी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि एक वैज्ञानिक केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं होना चाहिए, उसे समाज की बुराइयों के खिलाफ भी लड़ना होगा।
भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने भी छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि यह डिग्री आपके वर्षों के अनुशासन और समर्पण का उत्सव है। उन्होंने आह्वान किया कि छात्र अपने ज्ञान का उपयोग किसानों की समृद्धि के लिए करें।
उपस्थिति और गरिमा
समारोह में राज्यपाल के प्रधान सचिव गोपाल मीणा, बिहार सरकार के विशेष सचिव शैलेन्द्र कुमार, पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विवेकानंद सिंह, और बीएयू के कुलसचिव डॉ. मिजानुल हक सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य, विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में अभिभावक इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बने।
सबौर से निकली उम्मीद की किरण
अंततः, बिहार कृषि विश्वविद्यालय का यह 9वां दीक्षांत समारोह एक नए बिहार और नए भारत की उम्मीदों का प्रतिबिंब है। जब राज्यपाल जैसे उच्च पद पर आसीन व्यक्ति कृषि को राष्ट्र की सुरक्षा और विकास का प्राथमिक आधार बताते हैं, तो इस क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं का मनोबल सातवें आसमान पर होता है। सबौर की यह पवित्र भूमि, जो कभी प्राचीन काल से ही ज्ञान का केंद्र रही है, आज आधुनिक कृषि तकनीक के माध्यम से बिहार के किसानों की समृद्धि का द्वार खोल रही है। 2047 का लक्ष्य दूर जरूर है, लेकिन जिस तरह की प्रतिभा और तकनीक सबौर से निकल रही है, वह यह सुनिश्चित करती है कि भारत का भविष्य सुरक्षित और आत्मनिर्भर हाथों में है। जय हिंद।


