
पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों ऊर्जा आपूर्ति और विकास मॉडल को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है। विपक्ष लगातार सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है और इसी कड़ी में अब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से जुड़ी रोहिणी आचार्य ने भी मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने बिहार में कोयला आपूर्ति को लेकर लिए गए सरकारी फैसले पर तीखा हमला करते हुए इसे “रिवर्स गियर वाला विकास” करार दिया है। उनके इस बयान ने सियासी माहौल को और गरमा दिया है।
रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस दौर में देश डिजिटल इंडिया और आधुनिक सुविधाओं की ओर बढ़ रहा है, उस समय बिहार में लोगों को फिर से कोयले की ओर धकेलने की बात करना बेहद चौंकाने वाला है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए लिखा कि “डबल इंजन सरकार रिवर्स गियर में चल रही है, गैस सिलेंडर की जगह अब कोयला देने की बात हो रही है।” इस टिप्पणी के बाद से ही यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बिहार में ऊर्जा और ईंधन आपूर्ति को लेकर सरकार की ओर से कुछ फैसले लिए गए हैं, जिनमें कोयले की उपलब्धता को लेकर चर्चा तेज हुई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार गैस सिलेंडर की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने में असफल रही है, जिसके कारण अब कोयले जैसे पुराने विकल्पों की बात की जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से इस पर स्पष्ट और विस्तृत प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।
रोहिणी आचार्य ने इसी मुद्दे को उठाते हुए सवाल किया कि जब केंद्र और राज्य सरकारें बार-बार यह दावा करती रही हैं कि देश में रसोई गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर बिहार में कोयले की व्यवस्था की बात क्यों की जा रही है? उनके अनुसार यह न सिर्फ विरोधाभासी है, बल्कि सरकार की नीतियों की असफलता को भी उजागर करता है।
‘विकास या पीछे की ओर कदम?’
रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में यह भी कहा कि कोयला अब आम घरों की रसोई से वर्षों पहले खत्म हो चुका है। उन्होंने इसे “हास्यास्पद स्थिति” बताते हुए कहा कि आज के समय में जब एलपीजी, पाइप्ड गैस और अन्य आधुनिक ऊर्जा स्रोत उपलब्ध हैं, तब लोगों को फिर से कोयले की ओर लौटाने की सोच विकास नहीं, बल्कि पिछड़ेपन की निशानी है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह ‘विकास मॉडल’ दरअसल सरकार की नाकामियों को छिपाने का एक तरीका है। उनके मुताबिक, सरकार अपनी कमजोरियों से ध्यान हटाने के लिए पुराने दौर की याद दिलाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।
तेजस्वी यादव पहले से हमलावर
यह पहली बार नहीं है जब इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा है। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी लगातार राज्य सरकार पर हमलावर रहे हैं। उन्होंने अपराध, महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दों पर सरकार की आलोचना की है।
तेजस्वी यादव ने कई बार आंकड़ों के साथ यह दावा किया है कि बिहार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है और सरकार जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं का समाधान करने में असफल रही है। ऐसे में रोहिणी आचार्य का यह बयान उसी राजनीतिक रणनीति का विस्तार माना जा रहा है, जिसमें विपक्ष सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की कोशिश कर रहा है।
सियासी रणनीति या वास्तविक चिंता?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रोहिणी आचार्य का यह बयान सिर्फ एक तंज नहीं, बल्कि एक बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। बिहार में आगामी चुनावों को देखते हुए विपक्ष लगातार ऐसे मुद्दे उठाने की कोशिश कर रहा है, जो आम जनता से सीधे जुड़े हों।
ऊर्जा और रसोई गैस जैसे मुद्दे आम लोगों के दैनिक जीवन से जुड़े होते हैं, इसलिए इन पर राजनीति करना प्रभावी भी साबित हो सकता है। विपक्ष का लक्ष्य है कि वह सरकार को ऐसे मुद्दों पर घेरकर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करे।
सरकार की चुनौती
वहीं, राज्य सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है कि वह इन आरोपों का ठोस जवाब दे और अपनी नीतियों को स्पष्ट करे। यदि सरकार यह साबित नहीं कर पाती कि उसके फैसले जनता के हित में हैं, तो विपक्ष के आरोपों को बल मिल सकता है।
सरकार को यह भी दिखाना होगा कि वह आधुनिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी हाल में लोगों को पुराने विकल्पों पर निर्भर होने के लिए मजबूर नहीं करेगी।
“रिवर्स गियर वाला विकास” जैसे बयान ने बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। रोहिणी आचार्य के इस तीखे हमले ने न सिर्फ सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में ऊर्जा और विकास जैसे मुद्दों पर सियासत और तेज होगी।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस आरोप का किस तरह जवाब देती है और क्या यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेता है या फिर राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाता है।


