​भागलपुर: नशेड़ियों ने फूंकी दुकानें; तिलकामांझी में मची भारी तबाही

भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर के हृदय स्थल तिलकामांझी में गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 की रात रूह कंपा देने वाला मंजर देखने को मिला। जेल रोड स्थित ‘गंजी मिल’ के ठीक सामने उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब मुख्य सड़क किनारे बनी गुमटीनुमा दुकानों से आग की भीषण लपटें उठने लगीं। रात करीब 10:15 बजे हुए इस अग्निकांड ने न केवल तीन दुकानों और दो घरों को अपनी चपेट में लिया, बल्कि कई परिवारों के सिर से छत और उनकी जीवन भर की जमा-पूंजी भी छीन ली। इस घटना में सबसे दुखद पहलू एक माँ की बेबसी है, जिसकी बेटी की शादी अगले महीने होने वाली थी और दहेज के लिए पाई-पाई जोड़कर रखा गया सामान चंद मिनटों में राख के ढेर में तब्दील हो गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि इलाके में सक्रिय नशेड़ियों की एक सोची-समझी खौफनाक करतूत है। पुलिस अब इस मामले की जांच और नुकसान के आकलन में जुट गई है, लेकिन पीड़ितों के पास अब केवल राख और आंसू शेष हैं।

अग्निकांड का मंजर: 10:15 बजे का वो खौफनाक सन्नाटा

​तिलकामांझी थाना क्षेत्र के जेल रोड पर रोज की तरह गतिविधियां सामान्य थीं। दुकानदार अपनी दुकानों के शटर गिराकर घर जाने की तैयारी में थे या बगल में ही स्थित अपने कमरों में आराम कर रहे थे। तभी अचानक एक चिंगारी ने विकराल रूप धारण कर लिया। गंजी मिल के सामने स्थित पंक्चर, चाय और किराना की दुकानें देखते ही देखते धू-धू कर जलने लगीं। चश्मदीदों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को भी सामान बाहर निकालने का मौका नहीं मिला। दुकानों के ठीक पीछे इन गरीब परिवारों के आशियाने थे, जहाँ वे रात बिताते थे। आग की तपिश इतनी अधिक थी कि आसपास के पक्के घरों के लोग भी दहशत में बाहर निकल आए।

​सड़क किनारे होने के कारण आग की लपटें काफी दूर से दिखाई दे रही थीं। स्थानीय युवाओं ने अपने स्तर पर पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग बेकाबू हो चुकी थी। सूचना मिलने के बाद भागलपुर अग्निशमन विभाग की दो बड़ी दमकल गाड़ियां मौके पर पहुँचीं। घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक आरती देवी, मुर्शीद के बेटे राजा (पंक्चर दुकान), अर्जुन चौधरी और गीता देवी की तमाम संपत्तियां खाक हो चुकी थीं।

नशेड़ियों की दबंगई: “मना किया तो फूंक दी गृहस्थी”

​इस पूरी घटना के पीछे एक बेहद गंभीर और सामाजिक रूप से चिंताजनक आरोप सामने आया है। पीड़ित परिवारों और मौके पर मौजूद महिलाओं ने सीधे तौर पर इलाके के ‘नशेड़ी गैंग’ को इस तबाही का जिम्मेदार ठहराया है। पीड़ितों का कहना है कि जेल रोड के इस हिस्से में कुछ शरारती तत्वों और नशेड़ियों का लंबे समय से जमावड़ा रहता है। ये युवक पास की एक दुकान की छत पर बैठकर सरेआम गांजा, शराब और सिगरेट का नशा करते हैं।

​आरोप है कि ये नशेड़ी अक्सर दुकानदारों को परेशान करते थे। वे कभी माचिस मांगते, तो कभी मुफ्त में नाश्ता और सिगरेट के लिए दबाव बनाते थे। जब दुकानदारों ने उनकी इन नाजायज मांगों का विरोध किया और उन्हें वहां नशा करने से मना किया, तो उन युवकों ने पूर्व में भी दुकान फूंकने की धमकी दी थी। घटना वाली रात भी वे युवक वहां देखे गए थे। पीड़ितों का मानना है कि उन्हीं युवकों ने प्रतिशोध की भावना से आग लगाई है। यह घटना भागलपुर में बढ़ते नशाखोरी के जाल और उसके कारण होने वाले अपराधों का एक भयावह उदाहरण है।

एक माँ का विलाप: काजल की शादी के अरमान हुए राख

​इस अग्निकांड की सबसे मार्मिक कहानी गीता देवी की है। दिनेश चौधरी की पत्नी गीता देवी जेल रोड किनारे चाय और नाश्ते की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं। उनकी बेटी काजल की शादी मई माह में तय थी। एक गरीब माँ ने अपनी बेटी के सुनहरे भविष्य के लिए साल भर से एक-एक रुपया बचाया था। घर में शादी के लिए नए कपड़े, गहने, बर्तन और कुछ नकद राशि रखी हुई थी।

​आंखों में आंसू लिए गीता देवी ने बताया कि आग ने उनके सारे सपनों को जला दिया। उन्होंने जो कुछ भी अपनी बेटी के लिए संजोया था, वह अब कोयला बन चुका है। “मई में बारात आनी थी, अब मैं बेटी को विदा कैसे करूंगी?”—यह सवाल पूरी व्यवस्था और कानून-व्यवस्था के मुंह पर तमाचा है। उनके पास न तो अब दुकान बची है और न ही रहने के लिए घर। वहीं, आरती देवी की स्थिति भी अलग नहीं है। वह कोल्ड ड्रिंक और किराना की दुकान चलाती थीं, जो उनके परिवार की आय का एकमात्र जरिया था। उनके पति टोटो चलाकर लौटे ही थे और टोटो दुकान में खड़ा कर घर गए थे कि तभी आग लग गई।

10 लाख का नुकसान: राख में बदली मेहनत की कमाई

​प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस अग्निकांड में कुल मिलाकर 10 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ है। इसमें केवल दुकानें ही नहीं, बल्कि घरों के भीतर रखे अनाज, सोने-चांदी के जेवरात, नकद रुपए और रोजमर्रा का सामान शामिल है। राजा की पंक्चर की दुकान में रखे टायर और मशीनें जल गई हैं, तो वहीं अर्जुन चौधरी के घर का सारा फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक सामान बर्बाद हो गया है। सड़क किनारे गुजरने वाली बिजली की तारों को भी नुकसान पहुँचा है, जिससे इलाके की बिजली भी कुछ देर के लिए बाधित रही। पीड़ित अब पूरी तरह से सड़क पर आ गए हैं और सरकार से मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका

​घटना के बाद तिलकामांझी थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर शंभू पासवान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया। थानाध्यक्ष ने स्वीकार किया कि पीड़ित महिलाओं ने नशेड़ियों पर जानबूझकर आग लगाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है। अग्निशमन विभाग से आग लगने के तकनीकी कारणों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

​पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह वाकई ‘शॉर्ट सर्किट’ का मामला है या फिर शरारती तत्वों द्वारा पेट्रोल या किसी ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल कर जानबूझकर आग लगाई गई है। शंभू पासवान के अनुसार, “आरोपों की सत्यता जांची जा रही है और यदि यह जानबूझकर किया गया कृत्य पाया जाता है, तो दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।” हालांकि, स्थानीय लोगों में पुलिस के प्रति भी गुस्सा है कि जेल रोड जैसे संवेदनशील इलाके में नशेड़ियों का जमावड़ा कैसे होने दिया जाता है।

  • ये भी पढ़े..

    नालंदा में संतोष डॉन के खिलाफ बड़ा एक्शन, STF-EOU और पुलिस की संयुक्त छापेमारी से मचा हड़कंप

    Share Add as a preferred…

    मोतिहारी में 2 करोड़ की अफीम के साथ अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, STF और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 4 गिरफ्तार

    Share Add as a preferred…