
पटना। बिहार की राजनैतिक आबोहवा में आर्थिक संकट की सुगबुगाहट अब एक बड़े विवाद में तब्दील हो गई है। नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को जारी एक कड़े बयान में तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार का खजाना पूरी तरह खाली हो चुका है और अब स्थिति ऐसी है कि कर्मियों के वेतन और बुजुर्गों की पेंशन पर भी आफत आ गई है। भ्रष्टाचार और चुनाव के दौरान किए गए अंधाधुंध खर्चों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार अब ‘जुगाड़’ और ‘ब्याज के कर्ज’ पर टिका हुआ है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई विभागों में वित्तीय अनुशासन लागू करने के लिए पत्र जारी किए जा रहे हैं, जिससे सरकारी गलियारों में भी बेचैनी बढ़ गई है।
खाली खजाना और निकासी पर रोक: तेजस्वी के दावों का आधार
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में राज्य सरकार द्वारा हाल के दिनों में जारी किए गए प्रशासनिक पत्रों को अपने आरोपों का मुख्य आधार बनाया है। उन्होंने कहा कि वित्तीय संकट की गंभीरता इसी बात से समझी जा सकती है कि सरकार ने बहुत कम समय के अंतराल पर दूसरी बार ‘निधि निकासी एवं व्यय नियंत्रण’ से संबंधित पत्र जारी किया है।
विपक्ष का आरोप है कि:
- व्यय नियंत्रण: सरकार ने ट्रेजरी से पैसा निकालने पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी हैं।
- वित्तीय अस्थिरता: लगातार ऐसे पत्र जारी होना यह संकेत देता है कि सरकार के पास नियमित खर्चों के लिए भी तरल धन (Liquid Cash) की कमी है।
- प्राथमिकताओं का अभाव: खजाना खाली होने के बावजूद सरकार वास्तविक समस्याओं के बजाय केवल अपनी कुर्सी बचाने के प्रबंधन में जुटी है।
तेजस्वी ने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को इस खजाना खाली होने का सबसे बड़ा कारण बताया है। उनका कहना है कि योजनागत विकास के बजाय धन का बंदरबांट हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप आज बिहार एक गंभीर आर्थिक अराजकता के मुहाने पर खड़ा है।
41 हजार करोड़ का ‘चुनावी खेल’ और रिटायर्ड अधिकारियों की भूमिका
तेजस्वी यादव ने सरकार पर एक अत्यंत गंभीर और विशिष्ट आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चुनाव के आखिरी 30 दिनों में अपनी सत्ता को बचाने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। उनके अनुसार, सरकार के पसंदीदा और महत्वपूर्ण पदों पर बैठे रिटायर्ड अधिकारियों ने चुनाव के अंतिम एक महीने में करीब 41 हजार करोड़ रुपये बंटवा दिए।
इस आरोप के पीछे के निहितार्थ को तेजस्वी ने इस प्रकार समझाया:
- रिटायर्ड अधिकारियों का प्रभाव: तेजस्वी का तर्क है कि सरकार तंत्र और यंत्र (मशीनरी) के साथ-साथ ऐसे अधिकारियों पर निर्भर है जो सेवा विस्तार या संविदा पर काम कर रहे हैं।
- चुनावी रेवड़ियां: 41 हजार करोड़ रुपये की यह विशाल राशि चुनाव जीतने और वोट बैंक को प्रभावित करने के लिए खर्च की गई, न कि राज्य के स्थायी बुनियादी ढांचे के लिए।
- परिणाम: इसी बेहिसाब खर्च का नतीजा है कि आज सरकार के पास जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए धन का नितांत अभाव हो गया है।
आम नागरिक पर मार: पेंशन, छात्रवृत्ति और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड ठप
राजद नेता ने अपने बयान में उन वर्गों का विशेष रूप से उल्लेख किया जो सरकारी आर्थिक मदद पर आश्रित हैं। उन्होंने कहा कि खजाना खाली होने का सबसे दुखद पहलू यह है कि समाज के सबसे कमजोर तबके—बुजुर्गों और छात्रों—का हक मारा जा रहा है।
तेजस्वी ने निम्नलिखित योजनाओं में भुगतान रुकने का दावा किया है:
- सामाजिक सुरक्षा पेंशन: महीनों से बुजुर्गों को दी जाने वाली पेंशन का भुगतान नहीं हो सका है, जिससे उनके जीवन-यापन पर संकट खड़ा हो गया है।
- स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड: उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को दी जाने वाली सहायता राशि भी रुकी हुई है।
- छात्रवृत्ति (Scholarship): गरीब मेधावी छात्रों को समय पर स्कॉलरशिप नहीं मिल रही है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
विपक्ष का मानना है कि जो पैसा इन योजनाओं में जाना चाहिए था, उसे सरकार ने अपने राजनैतिक हितों को साधने में झोंक दिया। अब छात्र और बुजुर्ग कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सरकार ‘फंड नहीं होने’ का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ रही है।
सरकारी कर्मियों पर आफत: वेतन और पेंशन का संकट
केवल सामाजिक योजनाएं ही नहीं, बल्कि सरकार का अपना प्रशासनिक ढांचा भी आर्थिक तंगी की चपेट में आता दिख रहा है। तेजस्वी यादव ने आगाह किया है कि अब सरकारी कर्मियों को सैलरी और रिटायर्ड कर्मियों को पेंशन देने के लिए भी सरकार के पास पैसा नहीं बचा है।
यह स्थिति राज्य के लिए चिंताजनक है क्योंकि:
- वेतन में देरी: कई विभागों में कर्मचारियों के वेतन में देरी की खबरें पहले से ही आ रही हैं।
- पेंशन भोगियों की चिंता: लाखों परिवार जो सरकारी पेंशन पर निर्भर हैं, उन्हें समय पर भुगतान न होने का डर सता रहा है।
- कर्ज का जाल: तेजस्वी ने कहा कि यह सरकार अब पूरी तरह कर्ज और ब्याज के सहारे चल रही है। उधार लेकर घी पीने वाली यह नीति बिहार को दिवालियेपन की ओर ले जा रही है।


