
भागलपुर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को अपना 58वां स्थापना दिवस पूरे देश के साथ-साथ भागलपुर में भी संकल्प दिवस के रूप में मनाया। यह दिन वामपंथी राजनीति के लिए दोहरे उत्सव का अवसर रहा, क्योंकि इसी दिन विश्व सर्वहारा क्रांति के महान नायक कॉमरेड व्लादिमीर इल्यिच लेनिन की 156वीं जयंती भी मनाई गई। भागलपुर के सुरखीकल स्थित यूनियन कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं ने लाल झंडे के नीचे एकजुट होकर देश के सम्प्रभु, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक स्वरूप की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करने का संकल्प लिया। नक्सलबाड़ी के किसान विद्रोह की कोख से जन्मी इस पार्टी ने 2026 के राजनैतिक परिदृश्य में अपनी प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि फासीवादी ताकतों के खिलाफ असली लड़ाई जनता के साहस और कम्युनिस्ट परचम के नेतृत्व में ही लड़ी जा सकती है।
लाल झंडा और शहीद वेदी: सुरखीकल में उमड़ा जोश
स्थापना दिवस के अवसर पर सुबह से ही भागलपुर के सुरखीकल स्थित पार्टी कार्यालय में गहमागहमी रही। कार्यक्रम की शुरुआत शहीद वेदी पर पुष्प अर्पित करने के साथ हुई, जहाँ कार्यकर्ताओं ने उन तमाम शहीदों और दिवंगतों को याद किया जिन्होंने वामपंथी आंदोलन की मशाल जलाए रखने के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से दो मिनट का मौन रखकर इन शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
इसके पश्चात, पार्टी का गौरवपूर्ण प्रतीक—हंसुआ और हथौड़ा निशान वाला लाल झंडा फहराया गया। झंडोत्तोलन के दौरान इंकलाबी नारों से पूरा परिसर गूँज उठा। कार्यकर्ताओं ने यह शपथ ली कि वे हर संभव तरीके से पार्टी का विस्तार करेंगे और गाँव-गाँव, टोले-टोले तक माले के वैचारिक आधार को मजबूत बनाएंगे। 2026 के इस दौर में, जहाँ डिजिटल और सूचना युद्ध चरम पर है, पार्टी ने अपने जमीनी संगठन को पुनर्जीवित करने पर विशेष जोर दिया।
मुकेश मुक्त का संबोधन: नक्सलबाड़ी की विरासत और फासीवाद को चुनौती
पार्टी के नगर प्रभारी मुकेश मुक्त ने इस अवसर पर उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के गौरवशाली इतिहास और वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह पार्टी किसी ड्राइंग रूम की चर्चा से नहीं, बल्कि नक्सलबाड़ी के उन खेतों और खलिहानों से निकली है जहाँ किसानों ने शोषण के खिलाफ विद्रोह की ज्वाला जलाई थी।
मुकेश मुक्त ने अपने संबोधन में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित किया:
- क्रांतिकारी विरासत: भाकपा (माले) ने समूचे कम्युनिस्ट आंदोलन की क्रांतिकारी विरासत को गर्व के साथ अपनाया है और तमाम मुश्किलों के बावजूद खुद को निरंतर नवीनीकृत (Renew) किया है।
- दमन और प्रतिरोध: शासक वर्ग ने समय-समय पर कम्युनिस्टों के अस्तित्व को मिटाने का प्रयास किया और ‘उन्मादी विलाप’ किया, लेकिन हर बार कम्युनिस्ट आंदोलन और अधिक शक्ति के साथ खड़ा हुआ।
- साम्राज्यवाद और फासीवाद: वर्तमान समय में जब फासीवादी ताकतें साम्राज्यवाद के साथ मिलकर नागरिकों का दमन कर रही हैं और कम्युनिस्टों को बदनाम करने का प्रयास कर रही हैं, तब भाकपा (माले) की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
- जनता का भारत: मुकेश मुक्त ने आह्वान किया कि हमें जनता का भारत बनाने की लड़ाई को आगे बढ़ाना होगा, जहाँ सम्प्रभुता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र केवल कागज पर नहीं बल्कि हकीकत में मौजूद हों।
लेनिन की 156वीं जयंती: सर्वहारा चेतना का संचार
स्थापना दिवस के साथ-साथ कॉमरेड लेनिन की 156वीं जयंती मनाना इस कार्यक्रम को एक अंतरराष्ट्रीय और वैचारिक गहराई प्रदान कर गया। व्लादिमीर लेनिन, जिन्होंने रूस की धरती पर पहली सफल सर्वहारा क्रांति का नेतृत्व किया था, आज भी दुनिया भर के वंचितों और मजदूरों के लिए प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं।
भागलपुर के माले कार्यकर्ताओं ने चर्चा की कि कैसे लेनिन के सिद्धांत आज के दौर के कॉरपोरेट लूट और पूंजीवादी वर्चस्व के खिलाफ लड़ने में सहायक हो सकते हैं। वक्ताओं ने कहा कि लेनिन ने सिखाया था कि संगठित शक्ति ही सबसे बड़ी ताकत है, और आज जब आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला हो रहा है, तो लेनिनवादी संगठनात्मक अनुशासन की बहुत अधिक आवश्यकता है।
संगठनात्मक विस्तार और भविष्य का संकल्प
इस कार्यक्रम में केवल भाषण ही नहीं हुए, बल्कि पार्टी की भविष्य की रणनीति पर भी मंथन किया गया। नगर प्रभारी मुकेश मुक्त ने स्पष्ट किया कि पार्टी का विस्तार केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज बनना चाहिए।
पार्टी ने संकल्प लिया कि:
- जमीनी जुड़ाव: स्थानीय स्तर पर आवास, पेयजल, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर निरंतर आंदोलन चलाया जाएगा।
- युवा सहभागिता: नए युवाओं को पार्टी की विचारधारा से जोड़कर उन्हें एक बेहतर भारत के निर्माण के लिए तैयार किया जाएगा।
- लोकतांत्रिक सुरक्षा: संविधान पर होने वाले किसी भी हमले के खिलाफ भाकपा (माले) सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ेगी।
कार्यक्रम में प्रमुख उपस्थिति
स्थापना दिवस समारोह में भागलपुर के वामपंथी आंदोलन के कई प्रमुख चेहरे शामिल हुए। इनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
- मुकेश मुक्त: नगर प्रभारी।
- अमर कुमार: तिलकामांझी ब्रांच सचिव।
- बुधनी उरांव एवं पूनम देवी: नगर कमिटी सदस्य।
- इसके अतिरिक्त किरण देवी, करण कुमार, कविता देवी, सुनील गुप्ता, प्रमोद ठाकुर और अन्य दर्जनों कार्यकर्ताओं ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।
संघर्ष ही समाधान है
भाकपा (माले) का 58वां स्थापना दिवस भागलपुर में केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आने वाले समय की राजनैतिक चुनौतियों के लिए एक ‘तैयारी का बिगुल’ था। 2026 के बदलते राजनैतिक परिवेश में, जहाँ क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर बड़े गठबंधन बन और बिगड़ रहे हैं, माले ने अपनी स्वतंत्र और जुझारू पहचान को बरकरार रखने का संदेश दिया है। ‘जनता का भारत बनाने’ का उनका आह्वान यह दर्शाता है कि पार्टी भविष्य में भी अपनी ‘क्रांतिकारी छवि’ को बनाए रखेगी। भागलपुर जैसे औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्र में माले का यह शक्ति प्रदर्शन आने वाले स्थानीय चुनावों और जन-आंदोलनों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।


