​भागलपुर: पृथ्वी दिवस पर जल संरक्षण और पौधारोपण का महाअभियान

भागलपुर। पर्यावरण असंतुलन और तेजी से गहराते जल संकट के इस दौर में ‘सिल्क सिटी’ भागलपुर ने बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर एक नई चेतना का परिचय दिया है। जीवन जागृति सोसाइटी द्वारा आयोजित “जल बचाओ–जीवन बचाओ” और “पौधा लगाओ–पर्यावरण बचाओ” अभियान ने शहर के गलियारों में पर्यावरण संरक्षण की एक नई गूँज पैदा की है। वर्तमान समय में जब ग्लोबल वार्मिंग और घटता भू-जल स्तर पूरी मानवता के लिए चुनौती बना हुआ है, तब भागलपुर की सड़कों पर निकले सैकड़ों युवा, एनसीसी कैडेट्स और जागरूक नागरिक भविष्य की सुरक्षा का संकल्प लेते नजर आए। इस वृहद जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल लोगों को पेड़ों के महत्व से रूबरू कराना था, बल्कि बूंद-बूंद पानी की कीमत को समझाना भी था। भागलपुर प्रमंडलीय आयुक्त अवनीश कुमार सिंह और जीवन जागृति सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में शुरू हुए इस अभियान ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि आज हम प्रकृति की रक्षा नहीं करेंगे, तो कल प्रकृति हमारा अस्तित्व बचाने में सक्षम नहीं होगी।

जागरूकता रैली: मनाली चौक से घंटाघर तक गूँजा ‘जल है तो कल है’

​पृथ्वी दिवस के कार्यक्रमों की शुरुआत एक विशाल जागरूकता रैली के साथ हुई। इस रैली का नेतृत्व स्वयं भागलपुर प्रमंडलीय आयुक्त अवनीश कुमार सिंह, जिला खेल पदाधिकारी जय नारायण कुमार और सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर अजय कुमार सिंह ने किया। इन अतिथियों ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। मनाली चौक से शुरू हुई यह रैली शहर के हृदय स्थल घंटाघर तक पहुँची। रैली का दृश्य काफी प्रभावशाली था, जहाँ हाथों में तख्तियां और बैनर लिए बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, एनसीसी कैडेट्स और विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थी शामिल थे।

​पूरी रैली के दौरान “जल है तो कल है” और “पानी बचाओ–जीवन बचाओ” जैसे नारों ने शहरवासियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। प्रमंडलीय आयुक्त ने इस दौरान युवाओं के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि पृथ्वी की रक्षा का जिम्मा अब नई पीढ़ी के कंधों पर है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास जल की बर्बादी को रोकने के लिए ‘अवेयरनेस एंबेसडर’ की भूमिका निभाएं। रैली में शामिल एनसीसी कैडेट्स के अनुशासन और नारों ने वातावरण को पूरी तरह पर्यावरण संरक्षण के रंग में रंग दिया।

पौधारोपण: केवल रोपना नहीं, संरक्षण है असली लक्ष्य

​रैली के समापन के पश्चात, अभियान का दूसरा चरण टेलीफोन एक्सचेंज के सामने स्थित उप श्रम आयुक्त कार्यालय परिसर में आयोजित किया गया। यहाँ एक औपचारिक पौधारोपण कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें सरकारी तंत्र और नागरिक समाज का साझा प्रयास देखने को मिला। उप श्रम आयुक्त सुधांशु कुमार और डॉक्टर अजय कुमार सिंह ने सोसाइटी के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर परिसर में कई फलदार और छायादार पौधे लगाए।

​पौधारोपण के दौरान डॉक्टर अजय कुमार सिंह ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैचारिक बिंदु पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि लोग उत्सव के तौर पर पौधे तो लगा देते हैं, लेकिन बाद में उनकी सुध नहीं लेते। डॉक्टर सिंह ने स्पष्ट किया कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित संरक्षण और देखभाल उतनी ही जरूरी है। उन्होंने सोसाइटी के सदस्यों और वहां मौजूद लोगों से संकल्प लिया कि लगाए गए इन पौधों को तब तक संरक्षित किया जाएगा जब तक वे खुद को पर्यावरण में स्थापित न कर लें। उनका मानना है कि जब ये पौधे बड़े होंगे, तभी वे पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अपना वास्तविक योगदान दे पाएंगे।

संगोष्ठी: बढ़ते जल संकट पर विशेषज्ञों की चेतावनी

​अभियान के अंतर्गत एक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें पर्यावरण विशेषज्ञों और वक्ताओं ने जल संरक्षण और हरियाली के अंतर्संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। संगोष्ठी का मुख्य केंद्र बिंदु ‘भविष्य का अकाल’ रहा। वक्ताओं ने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि कैसे भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर हर साल नीचे जा रहा है, जिससे आने वाले समय में पेयजल की भारी किल्लत हो सकती है।

​डॉक्टर अजय कुमार सिंह ने संगोष्ठी में एक गंभीर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हम अभी भी जल और पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर नहीं हुए और कड़े कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में मानव जीवन के सामने एक ऐसा संकट खड़ा होगा जिसका समाधान किसी तकनीक के पास नहीं होगा। उन्होंने कहा कि नदियों का सूखना, जंगलों का कटना और कंक्रीट के जंगलों का बढ़ना साक्षात विनाश की आहट है। संगोष्ठी में मौजूद अन्य बुद्धिजीवियों ने भी इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारी जीवन रक्षा के लिए अनिवार्य शर्त बन गया है।

नागरिकों से अपील: हर शुभ अवसर पर लगाएं एक पौधा

​कार्यक्रम के अंत में जीवन जागृति सोसाइटी ने सभी नागरिकों से एक भावनात्मक और व्यावहारिक अपील की। सोसाइटी ने आह्वान किया कि हर नागरिक अपने दैनिक जीवन में पानी की बचत की आदत डाले। साथ ही, यह सुझाव भी दिया गया कि लोग अपने जीवन के हर शुभ अवसर—जैसे जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ या किसी प्रियजन की स्मृति—पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं।

​सोसाइटी का मानना है कि यदि व्यक्तिगत स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी ली जाए, तो सामूहिक रूप से हम एक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण आने वाली पीढ़ियों को सौंप सकेंगे। इस अभियान की सफलता ने भागलपुर में पर्यावरण के प्रति एक नई चेतना का संचार किया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और आम जनता इस संदेश को कितनी गंभीरता से लेते हैं और धरातल पर पानी बचाने और हरियाली बढ़ाने के लिए क्या निरंतर प्रयास किए जाते हैं।

भागलपुर की बदली हुई आबोहवा

​पृथ्वी दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम भागलपुर के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जिला गंगा के किनारे बसा है। गंगा की अविरलता और यहाँ के जलस्रोतों की रक्षा सीधे तौर पर यहाँ की जलवायु को प्रभावित करती है। जीवन जागृति सोसाइटी जैसी संस्थाओं के ये प्रयास सरकारी अभियानों के लिए पूरक का काम करते हैं। ‘पानी बचाओ-जीवन बचाओ’ का यह नारा तभी सफल होगा जब नगर निगम और पीएचईडी (PHED) जैसे विभाग भी शहर की पाइपलाइनों से होने वाली बर्बादी को रोकने के लिए डॉक्टर अजय कुमार सिंह द्वारा उठाए गए मुद्दों पर ध्यान देंगे।

​2026 का यह पृथ्वी दिवस भागलपुर के लिए केवल एक कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि एक भविष्यगामी विजन का आरंभ होना चाहिए। युवाओं की भागीदारी ने यह उम्मीद जगाई है कि जागरूकता की यह लहर केवल रैलियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि घरों की टोंटियों और मैदानों की हरियाली में भी दिखाई देगी।

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