​IIIT भागलपुर: TMBU छात्रों ने सीखी स्टार्टअप और AI की बारीकियां

भागलपुर। बिहार के शैक्षणिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव की लहर महसूस की जा रही है, जहाँ पारंपरिक शिक्षा को आधुनिक तकनीक और उद्यमिता के साथ जोड़ने के प्रयास तेज हो गए हैं। इसी कड़ी में, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के बी.एससी. तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों के लिए आयोजित 15 दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) के तहत बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को एक विशेष शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। यह भ्रमण भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) भागलपुर के परिसर में संपन्न हुआ। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी सिद्धांतों तक सीमित न रखकर उन्हें राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के तकनीकी वातावरण, नवाचार पारितंत्र (Innovation Ecosystem) और भविष्य की प्रौद्योगिकियों से रूबरू कराना था। 100 से अधिक प्रतिभागियों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लेकर यह समझा कि कैसे एक छोटा सा तकनीकी विचार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को सच कर सकता है।

नवाचार और तकनीकी परिवेश का जीवंत अनुभव

​आईआईआईटी भागलपुर का परिसर अपनी अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और शोध-अनुकूल संस्कृति के लिए जाना जाता है। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने संस्थान के उस वातावरण को करीब से महसूस किया, जहाँ तकनीक को वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में बदलने पर जोर दिया जाता है। टीएमबीयू के विद्यार्थियों के लिए यह एक ऐसा अवसर था, जहाँ वे अपनी विज्ञान की शिक्षा को धरातल पर उतरते देख रहे थे।

​विद्यार्थियों को विशेष रूप से संस्थान की इन्क्यूबेशन सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई। इन्क्यूबेशन सेंटर वह स्थान होता है जहाँ किसी नए स्टार्टअप आइडिया को तकनीकी और रणनीतिक सहयोग देकर उसे बाजार के लिए तैयार किया जाता है। छात्रों ने देखा कि कैसे उभरती प्रौद्योगिकियां आने वाले समय में व्यापार और उद्योग के तरीकों को पूरी तरह बदलने वाली हैं। इस तकनीकी प्रदर्शन ने विद्यार्थियों के बीच अनुसंधान और विकास (R&D) के प्रति एक नई सोच विकसित की, जो उन्हें भविष्य में खुद का स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित करेगी।

उद्घाटन सत्र: नवाचार ही भविष्य का आधार

​कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन आईआईआईटी भागलपुर के रजिस्ट्रार गौरव कुमार ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी दक्षता विकसित करना होना चाहिए जो समाज के लिए मूल्यवान हो। उन्होंने कहा कि नवाचार और उद्यमिता आज के दौर की सबसे बड़ी मांग है। बिना नए विचारों के कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता।

​गौरव कुमार ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि भागलपुर जैसे ऐतिहासिक शहर में असीम संभावनाएं छिपी हैं। यहाँ के रेशम उद्योग, कृषि उत्पादों और पारंपरिक कलाओं को यदि आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ दिया जाए, तो यहाँ के युवा न केवल स्थानीय बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। उनके संबोधन ने विद्यार्थियों के भीतर एक नया आत्मविश्वास भरा कि वे भी तकनीक आधारित उद्यमिता की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

विशेष व्याख्यान: प्रोडक्ट डेवलपमेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

​इस भ्रमण का सबसे महत्वपूर्ण और तकनीकी हिस्सा स्टार्टअप सेल के फैकल्टी इंचार्ज संदीप राज का विशेष व्याख्यान रहा। उन्होंने “प्रोडक्ट डेवलपमेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)” विषय पर छात्रों के साथ गहन संवाद किया। वर्तमान युग को ‘एआई क्रांति’ का युग बताते हुए उन्होंने समझाया कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग किसी भी नए उत्पाद के निर्माण, उसकी टेस्टिंग और मार्केटिंग में किया जा सकता है।

​संदीप राज ने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि स्टार्टअप्स के लिए एआई कैसे एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। डेटा का सटीक विश्लेषण कर ग्राहकों की पसंद को समझना और उत्पादन की लागत कम करना—ये सभी एआई के माध्यम से संभव हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को स्टार्टअप विकास के नए आयामों से परिचित कराया और आधुनिक तकनीकों के सही उपयोग के तरीके बताए। इस व्याख्यान ने विज्ञान के विद्यार्थियों को तकनीक और वाणिज्य के अंतर्संबंधों को समझने में बड़ी मदद की।

संगठनात्मक टीम का समर्पित प्रयास

​15 दिवसीय इस सघन उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) का सफल संचालन एक सक्षम टीम के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इस टीम में समन्वयक एवं सह-संयोजक के रूप में गरिमा त्रिपाठी, सह-समन्वयक के रूप में दीपक कुमार शर्मा और आयोजन सचिव के रूप में निधि वर्मा अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन शिक्षाविदों का मानना है कि ऐसे भ्रमणों से छात्रों का दृष्टिकोण व्यापक होता है और वे केवल नौकरी की तलाश करने के बजाय ‘जॉब क्रिएटर’ बनने की दिशा में सोचने लगते हैं।

​भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने संस्थान के संकाय सदस्यों के साथ भी विस्तृत संवाद किया। इस चर्चा का मुख्य केंद्र उद्यमिता की शुरुआत, अनुसंधान की प्रक्रिया और स्टार्टअप के विकास के दौरान आने वाली चुनौतियों का सामना करना रहा। यह संवाद विद्यार्थियों के लिए एक ऐसा अनुभव था, जहाँ वे अपनी शंकाओं का समाधान सीधे उन विशेषज्ञों से प्राप्त कर रहे थे जो तकनीक की दुनिया में निरंतर नए प्रयोग कर रहे हैं।

अकादमिक सहयोग और गौरवपूर्ण उपस्थिति

​इस कार्यक्रम की सफलता में टी.एन.बी. कॉलेज के भूगोल विभागाध्यक्ष जैनेंद्र कुमार का भी बड़ा योगदान रहा। उनकी उपस्थिति ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। इसके अतिरिक्त, संसाधन व्यक्ति (Resource Persons) के रूप में श्वेता पाठक और सबा नाज़ ने भी कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दर्ज कराई। इन शिक्षकों के सहयोग से विद्यार्थियों को बहुआयामी दृष्टिकोण प्राप्त हुआ, जो उनके सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।

​कार्यक्रम के समापन पर संदीप राज और गौरव कुमार ने आईआईआईटी भागलपुर के निदेशक प्रोफेसर मधुसूदन सिंह के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त किया। प्रोफेसर मधुसूदन सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व और सहयोग के कारण ही विश्वविद्यालय के छात्रों को इस राष्ट्रीय संस्थान के संसाधनों का लाभ मिल सका। कार्यक्रम का औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन दीपक कुमार शर्मा द्वारा किया गया।

निष्कर्ष: ‘आत्मनिर्भर बिहार’ की ओर बढ़ते कदम

​तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय द्वारा शुरू की गई यह पहल केवल एक अकादमिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक और आर्थिक बदलाव का संकेत है। 15 दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम और आईआईआईटी जैसे संस्थानों का भ्रमण विद्यार्थियों को मानसिक रूप से मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम बना रहा है। जब युवा मस्तिष्क एआई, स्टार्टअप और इन्क्यूबेशन जैसे आधुनिक शब्दों को अपनी वास्तविकता के साथ जोड़ते हैं, तो एक नई ऊर्जा का संचार होता है।

​यह पहल विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए प्रेरित करेगी। बिहार के सुदूर अंचलों से आए इन छात्रों के लिए तकनीक और व्यापार का यह संगम भविष्य की नई राहें खोलेगा। वॉयस ऑफ बिहार (VOB) इस प्रकार के दूरगामी कार्यक्रमों का स्वागत करता है, जो राज्य के युवाओं को वास्तव में सशक्त और आत्मनिर्भर बना रहे हैं।

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