
मधेपुरा। नियति का खेल भी बड़ा अजीब और क्रूर होता है। कभी-कभी जिस घर से शहनाइयों की गूँज उठती है, वहीं से चंद घंटों बाद चीख-पुकार और मातम की आवाजें आने लगती हैं। बिहार के मधेपुरा जिले से एक ऐसी ही हृदयविदारक और रूह कँपा देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ एक तरफ बहन की डोली उठ रही थी, तो दूसरी तरफ उसी के सगे भाई की अर्थी सज रही थी। मधेपुरा-पूर्णिया NH-107 पर मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 की देर रात हुए एक भीषण सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियों को ताउम्र के गम में तब्दील कर दिया। इस हादसे में दो युवकों की दर्दनाक मौत हो गई। सबसे दुखद पहलू यह है कि मृतक सुधीर कुमार राम अपने घर की सबसे छोटी बहन की शादी की खुशियों के बीच बारात की अगवानी करने निकला था, लेकिन वह खुद ‘काल’ के गाल में समा गया। घटना के बाद पूरे मुरलीगंज और जानकीनगर इलाके में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
भीषण भिड़ंत: आधे सड़क पर खड़े ट्रक ने ली दो जानें
यह दर्दनाक हादसा मधेपुरा और पूर्णिया जिले की सीमा के पास जानकीनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत चैनपुरा गांव के समीप घटित हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक ट्रक (रजिस्ट्रेशन संख्या NL 01AB 6220) सड़क के किनारे काफी असुरक्षित तरीके से खड़ा था। बताया जा रहा है कि ट्रक का आधा हिस्सा सड़क पर और आधा नीचे था, जो पूर्णिया की ओर जाने के लिए खड़ा था।
रात के अंधेरे में सड़क पर खड़े इस भारी वाहन ने ‘किलर’ की भूमिका निभाई। इसी दौरान मुरलीगंज की ओर से जानकीनगर की तरफ जा रही एक तेज रफ्तार हीरो होंडा स्प्लेंडर बाइक (रजिस्ट्रेशन संख्या BR 11AR 1913) अनियंत्रित होकर खड़े ट्रक में पीछे से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और उस पर सवार दोनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
मृतकों की पहचान: घर का इकलौता सहारा और रिश्तेदार
इस हादसे ने दो अलग-अलग गांवों के घरों का चिराग बुझा दिया है। मृतकों की पहचान निम्नलिखित रूप में हुई है:
- सुधीर कुमार राम: उम्र लगभग 28 वर्ष, पिता- मनोज राम, निवासी- वार्ड संख्या 10, नगर पंचायत मुरलीगंज। सुधीर अपने परिवार का मुख्य आधार था।
- विक्की राम: पिता- सचेन्द्र राम, निवासी- नारायणपट्टी मुरहो, जिला मधेपुरा। विक्की सुधीर के रिश्तेदार थे (सुधीर की बहन के देवर)।
दर्दनाक दास्तां: बारात रिसीव करने निकले थे दोनों
हादसे के पीछे की कहानी किसी भी पत्थर दिल इंसान को रुला देने वाली है। सुधीर के परिजनों ने बताया कि घर में उसकी छोटी बहन की शादी का उत्सव चल रहा था। पूरे घर में मेहमान भरे हुए थे और मंगल गीत गाए जा रहे थे। तभी सूचना मिली कि बारात रास्ता भटक गई है और कहीं और रुक गई है। सुधीर ने एक जिम्मेदार भाई की तरह अपने बहन के देवर विक्की को साथ लिया और बाइक से बारात को रिसीव करने के लिए निकल पड़ा।
परिजनों ने बताया कि उनके जाने के कुछ ही देर बाद बारात खुद-ब-खुद सही रास्ते पर आ गई और घर पहुँच गई। शादी की रस्में शुरू हो गईं। बारात के स्वागत और अन्य विधि-विधान के बीच किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया कि सुधीर और विक्की अभी तक नहीं लौटे हैं। सभी को लगा कि शायद वे किसी अन्य काम में व्यस्त होंगे। लेकिन विडंबना देखिए, जिस समय मंडप में भांवरे पड़ रही थीं और बहन अपने नए जीवन की शुरुआत कर रही थी, उसी समय उसके भाई का शव सड़क पर पड़ा था।
विदाई के वक्त टूटा दुखों का पहाड़
शादी की रस्में पूरी होने के बाद जब विदाई का समय आया, तब सुधीर की खोजबीन शुरू हुई। उसके मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तभी चैनपुरा के समीप हुए हादसे की खबर परिजनों तक पहुँची। जैसे ही यह पुष्टि हुई कि ट्रक से टकराने वाले युवक सुधीर और विक्की ही हैं, शादी वाले घर में कोहराम मच गया। जिस आंगन से बेटी की डोली उठनी थी, वहां से भाई की अर्थी की तैयारी होने लगी।
विदाई की खुशियाँ चीख-पुकार में बदल गईं। सुधीर के पिता मनोज राम और माता का हाल देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आँखें नम हो गईं। यह मंजर इतना भयावह था कि बारात पक्ष के लोग भी स्तब्ध रह गए।
मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
सुधीर की मौत ने केवल एक भाई को नहीं छीना, बल्कि दो मासूमों के भविष्य को भी अंधकारमय बना दिया है। सुधीर के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं—एक 5 साल का बेटा और मात्र 21 दिन की एक नवजात बेटी। सुधीर की पत्नी की स्थिति वर्णन से परे है; उसने तो अभी अपनी बेटी का चेहरा ठीक से सुधीर को दिखाने और खुशियाँ बांटने का समय भी नहीं पाया था कि सुधीर हमेशा के लिए दूर चला गया। 21 दिन की बच्ची जिसे पिता का स्पर्श भी ठीक से नहीं मिला, अब वह ताउम्र अनाथ कहलाएगी।
पुलिस की कार्रवाई और अंतिम संस्कार
हादसे की सूचना मिलते ही जानकीनगर थाना पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की। चूंकि मामला रात का था, इसलिए शवों को पूर्णिया सदर अस्पताल भेजा गया जहाँ गुरुवार सुबह पोस्टमार्टम किया गया।
पोष्टमार्टम के बाद गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 की शाम करीब 4:00 बजे जब सुधीर का पार्थिव शरीर मुरलीगंज स्थित उसके पैतृक घर पहुँचा, तो मानो पूरे मोहल्ले का कलेजा फट गया। सिसकियों और चीखों के बीच सुधीर को अंतिम विदाई दी गई। ग्रामीण सुरेंद्र राम और अन्य परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क पर अवैध रूप से खड़े होने वाले ट्रकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी और का ‘सुधीर’ इस तरह न जाए।
विशेष विश्लेषण: NH-107 पर ‘खड़ा मौत’ का खतरा
मधेपुरा-पूर्णिया एनएच-107 पर यह कोई पहली घटना नहीं है। रात के समय हाइवे पर बिना पार्किंग लाइट और गलत तरीके से खड़े ट्रक अक्सर मौत का कारण बनते हैं।
- अंधेरा और लापरवाही: चैनपुरा के पास स्ट्रीट लाइट्स का अभाव और ट्रक चालक की लापरवाही (आधा ट्रक सड़क पर खड़ा करना) इस घटना की मुख्य वजह बनी।
- सुरक्षा मानकों की कमी: यातायात नियमों के अनुसार, यदि कोई वाहन खराब होता है या खड़ा किया जाता है, तो उसे सड़क से पर्याप्त दूरी पर और रिफ्लेक्टर के साथ खड़ा होना चाहिए, जिसका पालन नहीं किया गया।
- तेज रफ्तार: बाइक की तेज रफ्तार ने भी स्थिति को घातक बना दिया, क्योंकि अचानक सामने खड़े वाहन को देखकर संतुलन बनाना मुश्किल हो गया।
सुलगते सवाल
सुधीर और विक्की की मौत ने समाज और प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या हाइवे पेट्रोलिंग टीम इन अवैध खड़े ट्रकों को हटाने में विफल रही है? क्या एक गरीब परिवार के मुखिया की मौत का जिम्मेदार केवल वह ट्रक चालक है या वह व्यवस्था भी, जो सड़कों को सुरक्षित बनाने का दावा करती है? आज मधेपुरा की उस बेटी की डोली तो विदा हो गई, लेकिन उसकी आँखों में अपने भाई की अर्थी का वह मंजर ताउम्र एक टीस बनकर रहेगा। ‘वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) पीड़ित परिवार के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करता है और प्रशासन से उचित मुआवजे व दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करता है।


