गयाजी के वैश्विक स्वरूप की आधारशिला: 2390 करोड़ की विष्णुपद कॉरिडोर परियोजना को मिली मंजूरी; फल्गु में विराजेंगे 108 फीट ऊंचे भगवान विष्णु

पटना/गयाजी। मोक्ष की धरती गयाजी अब केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि स्थापत्य और आधुनिक सुविधायों के संगम का वैश्विक केंद्र बनने जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को पटना स्थित मुख्य सचिवालय के अधिवेशन कक्ष में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर परियोजना के भव्य स्वरूप को हरी झंडी दे दी गई। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 2390 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसका उद्देश्य विष्णुपद मंदिर परिसर, फल्गु नदी के तटीय क्षेत्रों और आसपास के पूरे इलाके को एक नए अंतरराष्ट्रीय कलेवर में ढालना है। सरकार का विजन स्पष्ट है कि देश-विदेश से आने वाले लाखों पिंडदानियों और श्रद्धालुओं को मुख्य मंदिर तक पहुँचने या धार्मिक अनुष्ठान करने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। यह कॉरिडोर न केवल बिहार के पर्यटन की तस्वीर बदलेगा, बल्कि गयाजी की पौराणिक गरिमा को आधुनिकता के साथ जोड़कर एक नया मानक स्थापित करेगा।

694 संरचनाओं का महाजाल: कॉरिडोर का तकनीकी ब्लूप्रिंट

​इस परियोजना की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कॉरिडोर क्षेत्र के भीतर कुल 694 अलग-अलग संरचनाएं (स्ट्रक्चर्स) विकसित की जाएंगी। अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष दिए गए प्रस्तुतीकरण के अनुसार, इन संरचनाओं को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि वे स्थानीय संस्कृति के अनुकूल हों और श्रद्धालुओं की हर जरूरत को पूरा कर सकें।

​परियोजना के प्रमुख घटकों में शामिल हैं:

  • व्यावसायिक परिसर: स्थानीय व्यापार और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए कमर्शियल शॉप्स का निर्माण।

  • घाटों का कायाकल्प: फल्गु नदी के घाटों का व्यापक विकास और सौंदर्याकरण, जिससे नदी का तट एक आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभरे।

  • सीता कुंड का विकास: विष्णुपद मंदिर से लेकर मानपुर तक के पूरे घाट क्षेत्र और सीता कुंड के इलाके को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना।

  • आश्रय और शेड: पिंडदानियों और श्रद्धालुओं के बैठने के लिए 24 विशेष शेड तैयार किए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक शेड में 20 लोगों के बैठने की क्षमता होगी।

108 फीट की प्रतिमा: फल्गु की लहरों के बीच आध्यात्मिक आकर्षण

​इस पूरे कॉरिडोर का सबसे बड़ा और मुख्य आकर्षण फल्गु नदी के बीचों-बीच स्थापित होने वाली भगवान विष्णु की विशाल प्रतिमा होगी। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, विष्णुपद मंदिर और सीता कुंड के मध्य नदी की लहरों के बीच भगवान विष्णु की 108 फीट ऊँची मिस्रधातु की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह प्रतिमा न केवल धार्मिक श्रद्धा का केंद्र होगी, बल्कि स्थापत्य कला का एक बेजोड़ नमूना भी बनेगी।

​प्रतिमा तक श्रद्धालुओं की सुगम पहुँच सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष पेडेस्ट्रियन पथ (पैदल मार्ग) का निर्माण कराया जाएगा। समीक्षा के दौरान सम्राट चौधरी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि इस पैदल पथ की चौड़ाई कम से कम 20 फीट रखी जाए, ताकि अत्यधिक भीड़ की स्थिति में भी आवागमन में कोई कठिनाई न हो और सुरक्षा के मानकों का पूर्ण पालन हो सके।

लॉजिस्टिक प्रबंधन: पार्किंग और भीड़ नियंत्रण की पुख्ता व्यवस्था

​गयाजी में पिंडदान के समय जुटने वाली भारी भीड़ को देखते हुए यातायात और पार्किंग प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है। परियोजना के तहत तीन प्रमुख स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी, जहाँ कुल 750 चार पहिया वाहन खड़े किए जा सकेंगे। इसके अलावा, तीर्थयात्रियों की बड़ी बसों के लिए 20 बसों की अलग पार्किंग क्षमता भी विकसित की जाएगी।

​मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वाहनों की पार्किंग की उपलब्धता पर्याप्त होनी चाहिए, ताकि शहर के भीतर जाम की स्थिति न बने। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी यहाँ पहुँचते हैं, इसलिए कॉरिडोर की पूरी कार्यप्रणाली अंतरराष्ट्रीय स्तर की होनी चाहिए।

समीक्षा बैठक के अन्य महत्वपूर्ण पहलू

​बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष वॉक-थ्रू के जरिए पूरी परियोजना का एक मॉडल प्रस्तुत किया गया, जिसमें निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद के विहंगम दृश्य को दिखाया गया। सम्राट चौधरी ने निर्देश दिया कि विकास की इस दौड़ में मुख्य मंदिर के अस्तित्व और उसकी प्राचीनता पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए, बल्कि विकास ऐसा हो जो मंदिर तक पहुँचने की राह आसान बनाए।

​इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में शासन के कई वरिष्ठ चेहरा मौजूद थे, जिनमें उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और पुलिस महानिदेशक विनय कुमार शामिल थे। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, कुमार रवि, डॉ० चन्द्रशेखर सिंह, विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह और बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक नंदकिशोर ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

बिहार के पर्यटन का नया अध्याय

​विष्णुपद कॉरिडोर परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि यह बिहार की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे विश्व स्तरीय बनाने की दिशा में उठाया गया एक साहसिक कदम है। 2390 करोड़ का यह निवेश गया की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को बदलने की क्षमता रखता है। जब फल्गु नदी के बीच 108 फीट ऊंचे भगवान विष्णु विराजेंगे और 20 फीट चौड़े पथ पर श्रद्धालुओं का रेला चलेगा, तब गयाजी सही मायने में विश्व के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों की सूची में अग्रिम पंक्ति में खड़ा होगा। प्रशासन अब इस महत्वाकांक्षी योजना को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने की तैयारी में जुट गया है।

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