
पटना। बिहार की राजधानी पटना में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले अपराधियों के विरुद्ध पुलिस ने बुधवार, 22 अप्रैल 2026 की सुबह एक बड़ी और साहसिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। राजधानी के बेऊर थाना क्षेत्र अंतर्गत सिपारा इलाके में पुलिस और अपराधियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में एक कुख्यात सोना लुटेरा पुलिस की गोली का शिकार हुआ है। पुलिस की जवाबी फायरिंग में अपराधी के पैर में गोली लगी है, जिसे तत्काल इलाज के लिए पटना एम्स (AIIMS) में भर्ती कराया गया है। यह मुठभेड़ उस समय हुई जब पुलिस की एक विशेष टीम रामकृष्ण नगर में हाल ही में हुए चर्चित सोना लूटकांड के सिलसिले में छापेमारी और हथियार बरामदगी के लिए निकली थी। पटना एसएसपी कार्तिकेय एस शर्मा ने इस सफल ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए बताया कि इस मामले में अब तक कुल चार अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और लूट के माल की बरामदगी के लिए सघन तलाशी अभियान जारी है। इस घटना के बाद पूरे बेऊर और सिपारा इलाके में हड़कंप मच गया है।
मुठभेड़ का घटनाक्रम: जब हथियार बरामदगी के दौरान चली गोलियां
घटना बुधवार सुबह की है, जब पटना पुलिस की विशेष टीम रामकृष्ण नगर सोना लूटकांड के मुख्य आरोपी दिलीप कुमार को लेकर हथियार बरामदगी के लिए सिपारा के कृषि फार्म क्षेत्र में पहुँची थी। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियारों को अपराधियों ने इसी सुनसान इलाके में छिपा रखा है। जैसे ही पुलिस की टीम चिह्नित स्थान पर पहुँची और घेराबंदी शुरू की, आरोपी दिलीप कुमार ने पुलिस को चकमा देने की कोशिश की और वहां पहले से मौजूद या छिपाकर रखे गए हथियार से पुलिस टीम पर फायरिंग झोंक दी।
अचानक हुई इस फायरिंग से पुलिस टीम में अफरा-तफरी मच सकती थी, लेकिन अधिकारियों ने त्वरित सूझबूझ का परिचय दिया। पुलिस कर्मियों ने पहले अपराधियों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी, लेकिन जब फायरिंग नहीं रुकी, तो आत्मरक्षा में पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। पुलिस द्वारा चलाई गई गोली सीधे दिलीप कुमार के पैर में लगी, जिससे वह वहीं गिर पड़ा। उसे गिरता देख पुलिस ने उसे तुरंत दबोच लिया। घायल अवस्था में उसे प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए पटना एम्स भेजा गया, जहाँ वह फिलहाल कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच उपचाराधीन है।
अपराधी का प्रोफाइल: कौन है दिलीप कुमार?
पुलिस की गोली से घायल हुए अपराधी की पहचान दिलीप कुमार के रूप में हुई है, जो बेऊर थाना क्षेत्र के ही ब्रह्मस्थानी इलाके का रहने वाला है। एसएसपी कार्तिकेय एस शर्मा के अनुसार, दिलीप कोई मामूली अपराधी नहीं है, बल्कि वह रामकृष्ण नगर में हुई डकैती की वारदात का मुख्य सूत्रधार था। जांच में यह बात सामने आई है कि डकैती के दौरान जब लुटेरे ज्वेलरी शॉप के अंदर दाखिल हुए थे, तो दिलीप ही वह शख्स था जिसने दुकान के मालिक के साथ बेरहमी से मारपीट की थी और कट्टे की नोक पर सोने के गहने लूटने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
दिलीप कुमार की गिरफ्तारी और उससे हुई शुरुआती पूछताछ ने पुलिस को इस पूरे गिरोह की जड़ों तक पहुँचाने में मदद की है। पुलिस को जानकारी मिली है कि दिलीप का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और वह पेशेवर तरीके से आभूषण दुकानों को निशाना बनाने वाले गिरोह का सक्रिय सदस्य है।
जांच का सिलसिला: उदित से लेकर रोहन तक का कनेक्शन
रामकृष्ण नगर में हुई डकैती के बाद पटना पुलिस पर अपराधियों को पकड़ने का भारी दबाव था। एसएसपी ने इसके लिए एक विशेष टीम गठित की थी, जो सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर अपराधियों का पीछा कर रही थी। जांच के दौरान पुलिस को सबसे पहले उदित नाम के एक व्यक्ति के बारे में सुराग मिला। जब उदित को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने इस पूरी साजिश की परतें खोल दीं।
उदित के बयान के आधार पर ही पुलिस को दिलीप और रोहन के नाम मिले। उदित ने बताया कि किस तरह इन लोगों ने रेकी की थी और घटना के बाद भागने का रास्ता तैयार किया था। पुलिस ने इन सुरागों का पीछा करते हुए छापेमारी की और अंततः दिलीप तक पहुँचने में सफलता हासिल की। इस मामले में अब तक हुई चार गिरफ्तारियों ने इस गिरोह की कमर तोड़ दी है, हालांकि कुछ अन्य सदस्यों की तलाश में अभी भी छापेमारी जारी है।
कृषि फार्म में हुआ था ‘लूट के माल’ का बंटवारा
एसएसपी कार्तिकेय एस शर्मा ने बताया कि पूछताछ में दिलीप ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी अपराधी योजना के अनुसार पटना के कृषि फार्म क्षेत्र में एकत्रित हुए थे। वहां एक आम के पेड़ के नीचे बैठकर सभी ने लूटे गए सोने के गहनों और नकदी का आपस में बंटवारा किया था। अपराधियों ने इस सुनसान जगह को इसलिए चुना था ताकि वे पुलिस की नजरों से बच सकें और आसानी से अपना हिस्सा लेकर अलग-अलग दिशाओं में फरार हो सकें।
पुलिस अब उस विशिष्ट स्थान की भी शिनाख्त कर रही है जहाँ गहने बांटे गए थे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वहां कोई और सुराग या लूटे गए माल का कोई हिस्सा अभी भी मौजूद है। पुलिस की टीमें अब इस गिरोह द्वारा बताए गए विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही हैं ताकि लूटे गए शत-प्रतिशत सोने की बरामदगी सुनिश्चित की जा सके।
राजधानी में पुलिस की सक्रियता और एसएसपी का बयान
मुठभेड़ के बाद घटनास्थल पर पहुँचे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया। एसएसपी कार्तिकेय एस शर्मा ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि अपराधियों के खिलाफ पटना पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि वारदात में इस्तेमाल किया गया हथियार बरामद कर लिया गया है। यह वही हथियार है जिससे दिलीप ने पुलिस टीम पर हमला करने की कोशिश की थी।
एसएसपी ने पुलिस टीम की सराहना करते हुए कहा कि अधिकारियों ने अत्यंत पेशेवर तरीके से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस की गोली आत्मरक्षा में चलाई गई थी। फिलहाल, पुलिस रोहन और अन्य फरार अपराधियों की तलाश में जुटी है। एसएसपी ने दावा किया है कि बहुत जल्द इस गिरोह के सभी सदस्य सलाखों के पीछे होंगे और लूटी गई संपत्ति बरामद कर ली जाएगी।
इलाके में तनाव और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
सुबह-सुबह हुई इस मुठभेड़ और गोलीबारी की आवाज़ से सिपारा और बेऊर इलाके के लोग दहशत में आ गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की सक्रियता से अपराधियों में खौफ पैदा होना जरूरी है। घटना के बाद पुलिस ने पूरे कृषि फार्म इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है और फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया है ताकि वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा सकें।
एम्स पटना में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जहाँ घायल अपराधी का इलाज चल रहा है। पुलिस को अंदेशा है कि दिलीप के गिरोह के अन्य सदस्य उसकी स्थिति जानने या उसे भगाने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए अस्पताल परिसर में सादे लिबास में भी पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।


