भागलपुर में ‘सेल्फ-इन्यूमरेशन’ पर जोर; डीएम ने मुखियाओं को दिया प्रतिदिन 500 फॉर्म का लक्ष्य

भागलपुर। भारत की नई जनगणना की प्रक्रिया अब अपने निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी है। भागलपुर जिले में 17 अप्रैल से 1 मई 2026 तक चलने वाले मकान सूचीकरण (House Listing) अभियान को लेकर प्रशासनिक सक्रियता चरम पर है। मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को भागलपुर के समीक्षा भवन में जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘डिजिटल स्वरूप’ था, जहाँ जिले के सभी मुखिया ऑनलाइन माध्यम से अपने-अपने प्रखंड मुख्यालयों से जुड़े रहे। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस बार की जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह तकनीक और पारदर्शिता का एक ऐसा मेल है जिसमें जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। बैठक में जिलाधिकारी ने ‘सेल्फ-इन्यूमरेशन’ (स्व-गणना) पोर्टल की बारीकियों को समझाते हुए जनप्रतिनिधियों को टास्क दिया कि वे अपने क्षेत्रों में लोगों को तकनीक से जोड़ें ताकि जनगणना कार्य को त्रुटि रहित बनाया जा सके।

डिजिटल जनगणना: तकनीक के जरिए पारदर्शिता की कोशिश

​जनगणना 2026 को लेकर सरकार का सबसे बड़ा दांव ‘सेल्फ-इन्यूमरेशन’ पर है। जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने बैठक को संबोधित करते हुए बताया कि जनगणना के प्रथम चरण में मकानों का सूचीकरण किया जा रहा है। इस बार आम लोगों को यह विकल्प दिया गया है कि वे सरकारी प्रगणक के आने से पहले खुद ही अपने परिवार और मकान से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर सकें। जिलाधिकारी ने इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट http://se.census.gov.in का उल्लेख करते हुए बताया कि परिवार का कोई भी जिम्मेदार सदस्य अपने मोबाइल नंबर के जरिए ओटीपी (OTP) आधारित पंजीकरण कर सकता है।

​यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि आंकड़ों में किसी भी प्रकार की मानवीय त्रुटि की गुंजाइश न रहे। जिलाधिकारी ने मुखियाओं से आग्रह किया कि वे ग्रामीणों को इस पोर्टल के प्रति जागरूक करें। स्व-गणना के तहत लोगों को अपने मकान का प्रकार, कमरों की संख्या, पेयजल की सुविधा, बिजली की व्यवस्था, पानी की निकासी, और रसोई घर से जुड़ी जानकारियां भरनी हैं। इसके अलावा, परिवार के पास मौजूद आधुनिक सुख-सुविधाओं जैसे रेडियो, टेलीविजन, लैपटॉप, इंटरनेट, मोबाइल, साइकिल, स्कूटर और जीप के संबंध में भी डेटा साझा करना है। यहाँ तक कि परिवार द्वारा उपयोग किए जाने वाले मुख्य अनाज का विवरण भी इस बार की जनगणना का हिस्सा है।

11 डिजिट का सुरक्षा कोड: सत्यापन की अंतिम कड़ी

​बैठक में जिलाधिकारी ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदु पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जब कोई परिवार पोर्टल पर अपनी जानकारी ‘सबमिट’ करेगा, तो उसे 11 अंकों का एक विशेष ‘सुरक्षा कोड’ प्राप्त होगा। यह कोड उस परिवार की डिजिटल पहचान होगा। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि जानकारी भरने के बाद इस कोड को सुरक्षित रखना अत्यंत अनिवार्य है।

​जब आधिकारिक प्रगणक (Enumerator) घर-घर सर्वेक्षण के लिए पहुँचेंगे, तो परिवार को वही 11 अंकों का कोड उन्हें दिखाना होगा। प्रगणक उस कोड को अपने डिवाइस में दर्ज करेंगे, जिससे पहले से भरी गई जानकारी स्वतः सत्यापित हो जाएगी। इसके बाद प्रगणक डेटा को अंतिम रूप से सबमिट करेंगे। यह प्रक्रिया न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि प्रगणक और आम जनता के बीच होने वाले संवाद में किसी भी तरह के भ्रम को भी दूर करेगी। जिलाधिकारी ने मुखियाओं से कहा कि वे इस संदेश को हर घर तक पहुँचाएँ कि ‘सेल्फ-इन्यूमरेशन’ के बाद कोड को संभाल कर रखना ही असली जिम्मेदारी है।

प्रखंडवार फीडबैक और कड़े निर्देश: 100 से 500 का लक्ष्य

​ऑनलाइन बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने जिले के विभिन्न प्रखंडों के जनप्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया और मकान सूचीकरण कार्य की प्रगति का फीडबैक लिया। कई मुखियाओं ने उत्साहपूर्वक बताया कि उन्होंने स्वयं अपना फॉर्म ऑनलाइन भर लिया है और वे अपने पंचायत के अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने इस पहल की सराहना की, लेकिन साथ ही उन्होंने प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) के लिए कड़े लक्ष्य भी निर्धारित किए।

​जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि आज प्रत्येक पंचायत में कम से कम 100 लोगों का फॉर्म ऑनलाइन सबमिट करवाया जाए। कल से इस लक्ष्य को बढ़ाकर 500 फॉर्म प्रतिदिन करने का आदेश दिया गया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनगणना के इस कार्य में शिथिलता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने वरीय पदाधिकारियों को भी निर्देश दिया कि वे अपने आवंटित प्रखंडों में कैंप करें और सुनिश्चित करें कि पोर्टल पर डेटा अपलोड करने की गति धीमी न पड़े। बैठक में सुल्तानगंज प्रखंड से उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह और अन्य वरीय पदाधिकारी भी वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।

छात्रों और जीविका दीदियों की ‘स्मार्ट’ भूमिका

​जनगणना जैसे महाभियान को सफल बनाने के लिए जिलाधिकारी ने एक अनूठा ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ आइडिया साझा किया। उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी तकनीक के मामले में बहुत आगे है। जिलाधिकारी ने शिक्षा विभाग और प्रखंड अधिकारियों को निर्देश दिया कि नवम और दशम वर्ग के स्कूली बच्चों का सहयोग लिया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि “बच्चे मोबाइल चलाने में बहुत स्मार्ट होते हैं और वे अपने अभिभावकों की जानकारी पोर्टल पर भरने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।” स्कूलों के माध्यम से बच्चों को प्रेरित किया जाएगा कि वे अपने परिवार और पड़ोसियों का डेटा ऑनलाइन सबमिट करवाएं।

​इसके अलावा, जिलाधिकारी ने इस कार्य में ‘जीविका दीदी’, ‘विकास मित्र’ और पंचायत स्तर पर कार्यरत ‘कार्यपालक सहायकों’ को भी प्रशिक्षित करने का आदेश दिया है। इन सभी को आवश्यक प्रशिक्षण देकर फील्ड में उतारा जाएगा ताकि वे उन लोगों की मदद कर सकें जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है या जो तकनीक का उपयोग करने में सक्षम नहीं हैं। जिलाधिकारी का मानना है कि यदि समाज के हर वर्ग को इस कार्य में लगाया गया, तो भागलपुर जिला जनगणना के पहले चरण के लक्ष्यों को समय से पूर्व हासिल कर लेगा।

प्रशासनिक अमला और जमीनी निगरानी

​समीक्षा भवन में हुई इस बैठक में केवल चर्चा ही नहीं हुई, बल्कि कार्यान्वयन की पूरी रूपरेखा भी तैयार की गई। बैठक में संयुक्त निदेशक जनसंपर्क नागेंद्र कुमार गुप्ता और जिला सांख्यिकी पदाधिकारी लखी राम मुरमू भी उपस्थित थे। सांख्यिकी विभाग को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे प्रतिदिन पोर्टल पर अपलोड होने वाले डेटा की मॉनिटरिंग करें और जहाँ भी तकनीकी समस्या आए, उसे तुरंत दूर करें।

​जिलाधिकारी ने मुखियाओं को आगाह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि कोई भी घर छूटने न पाए। मकान सूचीकरण का यह कार्य भविष्य की सरकारी योजनाओं के निर्माण के लिए आधार बनेगा, इसलिए सटीक जानकारी का होना अनिवार्य है। जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया कि वे पंचायत स्तर पर कैंप लगाकर लोगों की मदद करेंगे। जिलाधिकारी ने अंत में कहा कि जनगणना का यह डिजिटल प्रयोग भागलपुर को बिहार के अन्य जिलों की तुलना में एक मॉडल के रूप में पेश कर सकता है।

सुशासन और सटीक आंकड़ों की ओर बढ़ता कदम

​21 अप्रैल 2026 को हुई यह बैठक भागलपुर के प्रशासनिक इतिहास में तकनीक के उपयोग का एक मील का पत्थर है। ‘सेल्फ-इन्यूमरेशन’ का यह अभियान न केवल लोगों को डिजिटल साक्षर बना रहा है, बल्कि उन्हें देश की विकास गाथा में एक सक्रिय भागीदार के रूप में भी जोड़ रहा है। जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी का 500 फॉर्म प्रतिदिन का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन मुखियाओं, छात्रों और जीविका दीदियों के संयुक्त प्रयास से इसे हासिल करना संभव दिखता है।

​आने वाले दिनों में भागलपुर की गलियों में प्रगणकों के साथ-साथ डिजिटल लहर भी दिखाई देगी। 1 मई 2026 तक चलने वाले इस सूचीकरण अभियान की सफलता ही जनगणना के दूसरे चरण की नींव रखेगी। भागलपुर जिला प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि वे आधुनिक भारत की डिजिटल जनगणना की इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब जिम्मेदारी मुखिया और आम जनता की है कि वे इस पोर्टल पर अपनी सटीक जानकारी दर्ज कर एक सशक्त और पारदर्शी भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।

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