​नीतीश ही ‘मालिक’ हैं, जिसको चाहेंगे वही बनेगा: अनंत सिंह

पटना। बिहार की सियासत में इन दिनों हर दिन एक नई इबारत लिखी जा रही है। मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई एनडीए सरकार के गठन के बाद राज्य का राजनैतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। इसी बदलते घटनाक्रम के बीच सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को पटना में जनता दल (यूनाइटेड) विधायक दल की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की सबसे खास बात रही मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह की मौजूदगी, जिन्होंने बैठक के बाद अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में मीडिया से बातचीत की। अनंत सिंह ने साफ कर दिया कि भले ही नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं हैं, लेकिन पार्टी के भीतर आज भी उनकी हैसियत ‘मालिक’ की है। उनके इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जेडीयू के भीतर सत्ता का केंद्र आज भी नीतीश कुमार ही बने हुए हैं और पार्टी का हर बड़ा फैसला उन्हीं की मर्जी से होगा।

बैठक का एजेंडा: 200 सीटों का लक्ष्य और विधायकों को ‘टास्क’

​मुख्यमंत्री आवास में आयोजित इस बैठक में नीतीश कुमार ने अपने विधायकों को भविष्य के लिए एक बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अब उनका पूरा ध्यान संगठन और जनता पर केंद्रित रहेगा। नीतीश कुमार ने विधायकों से कहा कि चूंकि वे अब मुख्यमंत्री की जिम्मेदारियों से मुक्त हैं, इसलिए उनके पास पहले से कहीं अधिक समय होगा जो वे अपनी पार्टी और राज्य की जनता को दे पाएंगे।

​नीतीश कुमार ने सभी विधायकों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में सक्रिय होने का निर्देश देते हुए ‘मिशन 200’ का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में एनडीए को बिहार में 200 से अधिक सीटें जीतनी हैं और इसके लिए जमीनी स्तर पर काम शुरू कर देना चाहिए। अनंत सिंह ने बताया कि नीतीश कुमार ने विधायकों को आश्वस्त किया है कि वे पहले की तरह ही उनके बीच उपलब्ध रहेंगे और विकास कार्यों की निगरानी व्यक्तिगत रूप से करते रहेंगे। नीतीश कुमार का यह रुख यह दर्शाता है कि वे सक्रिय राजनीति से संन्यास नहीं ले रहे हैं, बल्कि एक नई भूमिका में बिहार की राजनीति को नियंत्रित करेंगे।

नेतृत्व पर सवाल: “नीतीश कुमार ही सर्वेसर्वा हैं”

​विधायक दल की बैठक के बाद जब मीडिया ने अनंत सिंह से यह सवाल पूछा कि जेडीयू विधायक दल का नया नेता किसे चुना जाएगा, तो उन्होंने बहुत ही सीधा और सख्त जवाब दिया। अनंत सिंह ने कहा, “नीतीश कुमार ही पार्टी के मालिक हैं। जिसको भी चुनना है, वही चुनेंगे। हमें इसमें कुछ नहीं कहना है।” अनंत सिंह का यह बयान उन तमाम कयासों पर विराम लगाने के लिए काफी है जो पार्टी के भीतर किसी गुटबाजी या असंतोष की ओर इशारा कर रहे थे।

​अनंत सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया कि जेडीयू में लोकतंत्र का मतलब नीतीश कुमार की सहमति है। विधायकों ने सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को यह अधिकार दिया है कि वे ही तय करें कि सदन में पार्टी का नेतृत्व कौन करेगा। अनंत सिंह का यह ‘मालिक’ वाला संबोधन बिहार की सामंती और राजनैतिक शब्दावली का एक अनोखा मेल है, जो नीतीश कुमार के निर्विवाद नेतृत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि नीतीश कुमार ने वादा किया है कि वे पहले से अधिक समय विधायकों के साथ बिताएंगे, जिससे पार्टी की अंदरूनी कड़ियाँ और मजबूत होंगी।

निशांत कुमार पर चर्चा? अनंत सिंह ने किया खंडन

​पिछले कुछ दिनों से बिहार के राजनैतिक हलकों में नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कयास लगाए जा रहे थे कि क्या निशांत कुमार को पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है या विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर कोई चर्चा होगी। इन सवालों का जवाब देते हुए अनंत सिंह ने बहुत ही स्पष्ट लहजे में कहा, “विधायक दल की बैठक में निशांत कुमार को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है।”

​उन्होंने कहा कि बैठक पूरी तरह से पार्टी की रणनीति, आगामी विधानसभा सत्र और जनता के बीच जाने के कार्यक्रमों पर केंद्रित थी। किसी परिवारवाद या उत्तराधिकार के मुद्दे पर कोई बात नहीं की गई। अनंत सिंह का यह स्पष्टीकरण उन अफवाहों पर लगाम लगाने की कोशिश है जो नीतीश कुमार की ‘विरासत’ को लेकर बाजार में गर्म थीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने केवल विकास और काम की बात की है और उनका पूरा जोर इस बात पर है कि पहले से और अधिक काम होना चाहिए।

शराबबंदी पर अपनी राय: “हम सरकार के मालिक नहीं हैं”

​बिहार की राजनीति में ‘शराबबंदी’ हमेशा से एक विवादित और चर्चा का विषय रही है। अनंत सिंह से जब यह पूछा गया कि क्या शराबबंदी से हो रहे आर्थिक नुकसान को लेकर उन्होंने कोई राय दी है, तो उन्होंने बहुत ही व्यवहारिक जवाब दिया। अनंत सिंह ने कहा, “हम तो राय ही दे सकते हैं, और हमने अपनी राय दे दी है। हम कोई सरकार के मालिक तो नहीं हैं। अब सरकार हमारी राय माने या न माने, यह उनका काम है।”

​अनंत सिंह ने आगे कहा कि उन्हें जो सही लगता है, वह उसे मीडिया और पार्टी के सामने रखने में कभी नहीं हिचकिचाते। उन्होंने कहा कि उन्हें जो अच्छा लगता है, वह बोलते हैं, चाहे वह किसी को पसंद आए या न आए। शराबबंदी के मुद्दे पर उनकी यह टिप्पणी यह संकेत देती है कि पार्टी के भीतर भी इस नीति की समीक्षा को लेकर कहीं न कहीं सुगबुगाहट जरूर है, लेकिन अंतिम निर्णय ‘मालिक’ यानी नीतीश कुमार के हाथ में ही है। अनंत सिंह की यह बेबाकी उन्हें अन्य विधायकों से अलग खड़ा करती है।

नए समीकरण और एनडीए का भविष्य

​सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह जेडीयू की पहली बड़ी बैठक थी। नीतीश कुमार ने विधायकों को निर्देश दिया है कि वे नई सरकार के साथ पूरा समन्वय बनाकर चलें। उन्होंने कहा कि बिहार में विकास की जो गति उन्होंने शुरू की थी, उसे और तेज करना है। अनंत सिंह के बयानों से यह साफ झलकता है कि जेडीयू फिलहाल एक ‘सपोर्टिंग रोल’ में होने के बावजूद अपना प्रभाव कम नहीं होने देना चाहती।

​नीतीश कुमार का बार-बार यह कहना कि “वे अब अधिक समय देंगे” और “पहले जैसा ही व्यवहार रहेगा”, विधायकों के भीतर विश्वास भरने की एक कोशिश है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार को आगामी 24 अप्रैल को विश्वास मत हासिल करना है, और उससे पहले जेडीयू का यह शक्ति प्रदर्शन और एकजुटता काफी मायने रखती है। अनंत सिंह जैसे कद्दावर नेता का नीतीश कुमार के प्रति समर्पण यह बताता है कि सरकार भले ही बदल गई हो, लेकिन जेडीयू का ‘कंट्रोल रूम’ अभी भी एक ही है।

निष्कर्ष: 2026 की जंग और नीतीश का विजन

​पटना में हुई इस बैठक ने बिहार की राजनीति के अगले दो वर्षों का खाका खींच दिया है। 200 सीटों का लक्ष्य रखकर नीतीश कुमार ने यह जता दिया है कि वे हार मानने वालों में से नहीं हैं। अनंत सिंह की टिप्पणियों ने पार्टी के भीतर के अनुशासन और नेतृत्व की निष्ठा को सार्वजनिक कर दिया है। ‘The Voice of Bihar’ की इस विशेष रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि बिहार में सत्ता का परिवर्तन भले ही तकनीकी रूप से हो गया हो, लेकिन राजनैतिक रूप से नीतीश कुमार आज भी सबसे बड़े खिलाड़ी बने हुए हैं।

​अनंत सिंह का यह कहना कि नीतीश कुमार ही तय करेंगे कि कौन क्या बनेगा, यह साबित करता है कि जेडीयू में ‘कमान’ आज भी पुराने हाथों में ही सुरक्षित है। अब देखना यह होगा कि नीतीश कुमार का यह ‘नया अवतार’ और विधायकों को मिला ‘200 सीटों का टास्क’ धरातल पर क्या रंग लाता है। बिहार की जनता अब काम की रफ्तार और नीतीश कुमार की नई सक्रियता को किस रूप में लेती है, यह आने वाला वक्त बताएगा। फिलहाल, अनंत सिंह की बातों ने विपक्षी खेमे में भी खलबली मचा दी है, जो नीतीश कुमार को कमजोर आंकने की भूल कर रहे थे।

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