​शादी के जेवर पर दूल्हे का ‘खूनी’ तांडव: बुआ की हत्या, 5 घायल

सीवान। जिस घर में शहनाइयों की गूँज सुनाई देनी थी, जहाँ मंगल गीत गाए जा रहे थे और जिस आँगन में खुशियों की रंगोली सज रही थी, वहाँ अचानक खून की होली खेल दी गई। सीवान जिले के जीबीनगर (तरवारा) थाना क्षेत्र अंतर्गत ओलीपुर गांव में एक ऐसी खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसने मानवीय रिश्तों को शर्मसार कर दिया है। एक सिरफिरे दूल्हे ने, जो पेशे से इंजीनियर है, शादी के गहनों को लेकर हुए मामूली विवाद में अपने ही परिवार के छह सदस्यों पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस हिंसक उन्माद में दूल्हे की सगी बुआ की मौत हो गई, जबकि चाचा-चाची और भाई-बहन समेत पांच अन्य लोग जीवन और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को जिस युवक के सिर पर सेहरा सजने वाला था, उसने रविवार की रात अपने ही हाथों अपनी खुशियों का गला घोंट दिया और परिवार के दामन पर कभी न मिटने वाली कालिख पोत दी। यह घटना दर्शाती है कि भौतिकता की दौड़ और क्षणिक क्रोध किस तरह शिक्षित युवाओं के विवेक पर हावी हो रहा है।

शॉपिंग से शुरू हुआ विवाद: जेवर बनाम जेब की जंग

​घटना की जड़ें रविवार की दोपहर एक ज्वेलरी शॉप से जुड़ी हैं। आरोपी इंजीनियर दीपक कुमार की शादी मंगलवार को होनी तय थी। शादी की रस्मों के बीच दीपक अपने माता-पिता और परिजनों के साथ अपनी होने वाली पत्नी के लिए आभूषण खरीदने बाजार गया था। दीपक की जिद थी कि उसकी होने वाली जीवनसंगिनी के लिए कुछ विशेष और महंगे आभूषण खरीदे जाएं। दुकान पर दीपक ने कुछ गहने पसंद किए, लेकिन उनकी कीमत बजट से बाहर जा रही थी।

​परिजनों ने दीपक को समझाने की कोशिश की कि अभी जितने पैसे हैं, उससे खरीदारी कर ली जाए या बाद में इंतजाम किया जाएगा। लेकिन दीपक अपनी जिद पर अड़ा रहा। जब पैसे कम पड़ गए, तो काफी मान-मनौव्वल के बाद भी बात नहीं बनी और परिजन बिना आभूषण खरीदे ही घर लौट आए। दुकान से खाली हाथ घर लौटना दीपक के ‘इगो’ पर गहरी चोट कर गया। घर पहुँचते ही उसके भीतर का आक्रोश ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा। उसे लग रहा था कि उसके माता-पिता ने उसकी इच्छा का सम्मान नहीं किया, जबकि परिजन व्यावहारिक स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे थे।

रविवार की काली रात: चाकू का वार और अपनों की चीखें

​रात गहराने के साथ ही ओलीपुर गांव के उस घर में शांति की जगह विवाद ने ले ली। दीपक लगातार अपने माता-पिता से झगड़ा कर रहा था। विवाद इतना बढ़ गया कि परिवार के अन्य सदस्य, जो शादी में शामिल होने आए थे, बीच-बचाव करने पहुँचे। दीपक के भीतर नफरत और गुस्से का ऐसा सैलाब उमड़ा कि उसने पास रखा एक धारदार चाकू उठा लिया। सबसे पहले उसने अपने माता-पिता पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन जब रिश्तेदारों ने उसे रोकने का प्रयास किया, तो वह हिंसक हो उठा।

​उसने एक-एक कर उन सभी लोगों पर चाकू से प्रहार करना शुरू कर दिया जो उसे शांत करने की कोशिश कर रहे थे। घर के भीतर भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-बचाव की गुहार लगा रहे थे, लेकिन दीपक मानो हैवान बन चुका था। उसने अपनी बुआ, चाचा, चाची और चचेरे भाई-बहनों को अपना निशाना बनाया। चीख-पुकार सुनकर पड़ोस के लोग भी दौड़े, लेकिन तब तक दीपक कई लोगों को लहूलुहान कर चुका था। शादी वाला घर पल भर में युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गया, जहाँ फर्श पर खुशियों के गुलाल की जगह अपनों का खून बिखरा पड़ा था।

बुआ की मौत और घायलों की दास्तां

​इस जानलेवा हमले में जामो थाना क्षेत्र के विशुनपुरा गांव निवासी अजय सिंह की पत्नी फूल कुमारी उर्फ बुद्धि देवी (बुआ) की मौके पर ही मौत हो गई। वह अपने भतीजे की शादी में बड़े अरमानों के साथ आई थीं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस भतीजे को वे बचपन से दुलारती रहीं, वही उनकी जान का दुश्मन बन जाएगा। उनके शरीर पर चाकू के गहरे निशान पाए गए हैं।

​वारदात में घायल होने वाले अन्य सदस्य गंभीर रूप से जख्मी हैं, जिन्हें स्थानीय अस्पताल के बाद बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर किया गया है। घायलों की सूची इस प्रकार है:

  • नागेंद्र सिंह (चाचा): दीपक को रोकने के प्रयास में गंभीर रूप से घायल।
  • शोभा देवी (चाची): दीपक के हमले का शिकार बनीं।
  • अंजलि उर्फ जुगनू देवी (चचेरी बहन): भाई के क्रोध की भेंट चढ़ीं।
  • अभिषेक कुमार (चचेरा भाई): बीच-बचाव के दौरान लहूलुहान।
  • योगेंद्र शर्मा (ग्रामीण): शोर सुनकर बचाने आए थे, लेकिन दीपक ने उन्हें भी नहीं बख्शा।

पुलिसिया कार्रवाई और थानाध्यक्ष का बयान

​जीबीनगर थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी दीपक कुमार एक शिक्षित इंजीनियर है, लेकिन उसका यह कृत्य किसी पेशेवर अपराधी से भी अधिक क्रूर है। पुलिस ने घटनास्थल से खून से सना चाकू बरामद करने की कोशिश की है और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

​थानाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मामला पूरी तरह से शादी के आभूषणों की खरीद से उत्पन्न विवाद का है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या दीपक पहले से ही किसी मानसिक तनाव में था या आभूषण महज एक बहाना था। फिलहाल, जिस दूल्हे के हाथों में मंगलवार को मेहंदी लगनी थी, अब वहां पुलिस की हथकड़ी लगने की तैयारी है। पुलिस फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है, हालांकि कुछ अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि उसे हिरासत में ले लिया गया है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

शिक्षित समाज पर सवाल: इंजीनियर की हैवानियत

​यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि हमारे आधुनिक समाज और शिक्षा तंत्र पर एक बड़ा सवालिया निशान है। दीपक, जो एक इंजीनियर है और जिससे उम्मीद की जाती थी कि वह तर्क और विवेक से काम लेगा, उसने अपनी मंगेतर के लिए गहने न खरीद पाने की खीझ में अपने ही परिवार का कत्लेआम कर दिया। क्या हमारी शिक्षा हमें केवल डिग्री देती है, संस्कार और धैर्य नहीं?

​ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर गहरी नाराजगी और दुख है। लोगों का कहना है कि दीपक की शादी को लेकर पूरा गांव उत्साहित था, लेकिन अब हर कोई इस खौफनाक मंजर की चर्चा कर रहा है। शादी की रस्में अब मातम में बदल चुकी हैं। जिस लड़की की डोली दीपक के घर आनी थी, उसके घर में भी इस खबर के बाद कोहराम मचा हुआ है। गहनों की चमक तो फीकी पड़ गई, लेकिन रिश्तों के खून के धब्बे इस परिवार के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गए।

निष्कर्ष: सुलगते सवाल और बेबस परिवार

​सीवान की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अनियंत्रित क्रोध इंसान को अंधा बना देता है। एक तरफ जहां सरकार और समाज महिलाओं के सम्मान और आभूषणों को संस्कृति का हिस्सा मानते हैं, वहीं दूसरी तरफ वही आभूषण एक महिला की मौत का कारण बन गए। बुआ फूल कुमारी की मौत ने दो परिवारों के बीच के सेतु को तोड़ दिया है।

​आने वाले दिनों में इस मामले में कानूनी प्रक्रिया चलेगी, दीपक को सजा भी मिलेगी, लेकिन क्या वह उस विश्वास को वापस ला पाएगा जो उसने अपने परिवार के सीने में चाकू घोंपकर खत्म कर दिया है? ओलीपुर गांव में सन्नाटा पसरा है और शादी वाले घर के बाहर टंगी लाइटें अब किसी उत्सव का नहीं, बल्कि एक बड़ी त्रासदी का संकेत दे रही हैं। सीवान पुलिस के लिए यह मामला एक चुनौती है ताकि वह सुनिश्चित कर सके कि ऐसे जघन्य कृत्य करने वालों को समाज में कोई रियायत न मिले।

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