​भागलपुर: 24 घंटे में हटाएं बिजली खंभों से अवैध केबल

भागलपुर। सिल्क सिटी की खूबसूरती पर ग्रहण लगाने वाले बेतरतीब बिजली के तारों और अवैध केबल के जाल के खिलाफ नगर निगम ने अब निर्णायक जंग छेड़ दी है। शहर के गली-कूचों से लेकर मुख्य सड़कों तक बिजली के खंभों पर मकड़ी के जाले की तरह लिपटे इन तारों ने न केवल शहर की सूरत बिगाड़ दी है, बल्कि यह सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा खतरा बन चुके हैं। सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को नगर आयुक्त द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के बाद यह साफ हो गया कि अब प्रशासन और नरम रुख अपनाने के मूड में नहीं है। बिजली विभाग की ओर से बार-बार मिल रही शिकायतों और आम जनता की परेशानियों को देखते हुए नगर निगम ने शहर में सक्रिय निजी टेलीकॉम कंपनियों और वाईफाई प्रदाताओं को मात्र 24 घंटे का ‘अल्टीमेटम’ जारी किया है। आदेश स्पष्ट है—या तो अपनी अवैध संपत्तियों को खंभों से खुद हटा लें, या फिर निगम के कटर का सामना करने के लिए तैयार रहें। इस आदेश के बाद से ही निजी ऑपरेटरों के बीच हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि तय समय सीमा समाप्त होते ही निगम का दस्ता सड़कों पर उतरने वाला है।

निरीक्षण के बाद निगम का ‘सख्त’ अवतार

​भागलपुर की सड़कों पर घूमते हुए किसी भी व्यक्ति की नजर सबसे पहले उन खंभों पर पड़ती है जो लोहे या कंक्रीट के कम और तारों के बंडल ज्यादा नजर आते हैं। नगर आयुक्त ने जब शहर के प्रमुख व्यावसायिक और रिहायशी इलाकों का दौरा किया, तो पाया कि बिजली विभाग के बुनियादी ढांचे का उपयोग निजी लाभ के लिए धड़ल्ले से किया जा रहा है। इन खंभों पर बिना किसी अनुमति के दर्जनों इंटरनेट और टेलीफोन केबल लपेट दिए गए हैं।

​निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि बिजली विभाग के कर्मियों को खंभों पर चढ़ने के लिए जगह तक नहीं मिलती। कई जगहों पर तो इन केबलों के वजन से खंभे एक तरफ झुक गए हैं। नगर निगम ने इसे न केवल अतिक्रमण माना है, बल्कि इसे सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग की श्रेणी में रखा है। बिजली विभाग ने भी निगम को भेजी अपनी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की है कि इन अवैध तारों की वजह से शार्ट सर्किट और आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे पूरी बिजली व्यवस्था चरमरा सकती है।

मेंटेनेंस में बाधा: स्ट्रीट लाइट का संकट

​नगर प्रबंधक विनय प्रसाद यादव ने इस कार्रवाई की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शहर में स्ट्रीट लाइट की स्थिति सुधारने में ये तार सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। नगर निगम लगातार शहर को ‘स्मार्ट’ बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसके तहत आधुनिक एलईडी लाइटें लगाई जा रही हैं। लेकिन जब भी कोई लाइट खराब होती है और निगम के कर्मचारी उसे ठीक करने के लिए सीढ़ी लगाते हैं, तो उन्हें बिजली के तारों से ज्यादा इन निजी केबलों के जाल से जूझना पड़ता है।

​अक्सर यह देखा गया है कि ये केबल इतने उलझे हुए होते हैं कि स्ट्रीट लाइट के पॉइंट तक पहुँचना नामुमकिन हो जाता है। कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर इन तारों के बीच काम करते हैं। विनय प्रसाद यादव के अनुसार, “ये बेतरतीब तार न केवल तकनीकी खराबी पैदा करते हैं, बल्कि मेंटेनेंस टीम का समय भी बर्बाद करते हैं। कई बार तो यह पता लगाना भी मुश्किल होता है कि कौन सा तार बिजली का है और कौन सा इंटरनेट का।” इसी प्रशासनिक गतिरोध को खत्म करने के लिए 24 घंटे की समय सीमा तय की गई है।

सिल्क सिटी के सौंदर्य पर ‘काला’ प्रहार

​भागलपुर अपनी रेशमी विरासत और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है, लेकिन शहर के चौराहे आज इन झूलते तारों के कारण बदसूरत नजर आते हैं। नगर निगम पिछले कुछ महीनों से शहर के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। डिवाइडरों की पेंटिंग, वॉल पेंटिंग और पार्कों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। लेकिन इन सबके ऊपर जब काले और मोटे केबलों का गुच्छा लटकता है, तो सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है।

​प्रशासन का मानना है कि एक आधुनिक शहर की पहचान उसके साफ-सुथरे आसमान और सुव्यवस्थित बुनियादी ढांचे से होती है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत भागलपुर को एक नया रूप देने की कोशिश की जा रही है, जिसमें अंडरग्राउंड केबलिंग (भूमिगत तार) एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, जब तक अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट पूरी तरह लागू नहीं होता, तब तक खंभों को इस तरह ‘बंधक’ नहीं बनाया जा सकता। निगम ने साफ कर दिया है कि सुंदरता से समझौता अब बर्दाश्त नहीं होगा।

कंपनियों को चेतावनी: जुर्माना और जब्ती के लिए रहें तैयार

​नगर निगम का यह अल्टीमेटम केवल एक सामान्य नोटिस नहीं है, बल्कि इसके साथ दंडात्मक कार्रवाई की पूरी रूपरेखा तैयार की गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि मंगलवार शाम तक कंपनियां अपने तारों को नहीं हटाती हैं, तो बुधवार सुबह से निगम की टीम विशेष कटर मशीनों के साथ निकलेगी। इन तारों को काटकर सीधे जब्त कर लिया जाएगा।

​इतना ही नहीं, निगम ने यह भी चेतावनी दी है कि तारों को काटने में होने वाला खर्च और श्रम का पैसा भी संबंधित कंपनियों से वसूला जाएगा। दोषी कंपनियों के खिलाफ नगर पालिका अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) भी दर्ज की जा सकती है। निजी टेलीकॉम दिग्गजों और स्थानीय वाईफाई प्रदाताओं को निर्देश दिया गया है कि वे अपने तकनीकी दलों को तुरंत काम पर लगाएं। निगम का तर्क है कि ये कंपनियां मोटा मुनाफा कमाती हैं, लेकिन शहर की व्यवस्था और सुरक्षा के प्रति उनकी कोई जिम्मेदारी नजर नहीं आती।

सुरक्षा का सवाल: हादसों को न्योता देते ‘झूलते’ तार

​बरसात का मौसम आने वाला है और ऐसे में ये झूलते तार मौत का फंदा साबित हो सकते हैं। तेज हवा चलने पर ये तार अक्सर टूटकर सड़कों पर गिर जाते हैं। चूंकि ये तार बिजली के खंभों के संपर्क में रहते हैं, इसलिए इनमें करंट उतरने की संभावना हमेशा बनी रहती है। भागलपुर के भीड़भाड़ वाले बाजारों जैसे स्टेशन रोड, खलीफाबाग चौक और वेराइटी चौक पर स्थिति और भी भयावह है।

​वहां ये तार दुकानों के साइन बोर्ड और घरों की छतों को छू रहे हैं। नगर निगम ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि इन अवैध कनेक्शनों के कारण बिजली विभाग को राजस्व की भी हानि हो रही है, क्योंकि कई जगहों पर बिजली के तारों से ही इन मशीनों को अवैध रूप से पावर दिया जा रहा है। 24 घंटे के भीतर इन तारों की सफाई से शहर न केवल सुंदर दिखेगा, बल्कि सुरक्षित भी महसूस करेगा।

उपभोक्ताओं पर असर और भविष्य की योजना

​इस कार्रवाई का सीधा असर इंटरनेट और केबल टीवी के उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। यदि कंपनियां समय रहते तारों को व्यवस्थित नहीं करती हैं या वैकल्पिक मार्ग नहीं तलाशती हैं, तो शहर के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं बाधित हो सकती हैं। हालांकि, नगर निगम का कहना है कि इसके लिए पूरी तरह से कंपनियां जिम्मेदार हैं, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर बिना अनुमति के सरकारी खंभों का उपयोग किया है।

​प्रशासन ने कंपनियों को सुझाव दिया है कि वे अपने नेटवर्क को व्यवस्थित करने के लिए आधिकारिक चैनल का उपयोग करें और जहां संभव हो, अंडरग्राउंड डक्ट का इस्तेमाल करें। भविष्य में नगर निगम एक ऐसी नीति लाने पर विचार कर रहा है जहाँ खंभों का उपयोग करने के लिए कंपनियों को ‘रेंटल’ देना होगा और तारों को एक निर्धारित मानक के अनुसार ही लगाया जा सकेगा। फिलहाल, पहली प्राथमिकता इन जालों से शहर को मुक्त कराना है।

निष्कर्ष: सुशासन का कड़ा संदेश

​भागलपुर नगर निगम की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि विकास और सुंदरता के बीच कोई समझौता नहीं होगा। 24 घंटे का यह अल्टीमेटम केवल निजी कंपनियों के लिए नहीं, बल्कि उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग करते हैं। मंगलवार का दिन भागलपुर के लिए काफी हलचल भरा रहने वाला है। अब देखना यह है कि कंपनियां अपनी जिम्मेदारी समझती हैं या फिर निगम को अपना ‘रौद्र रूप’ दिखाना पड़ता है। शहरवासियों ने निगम के इस कदम का स्वागत किया है, क्योंकि वे भी लंबे समय से इन लटकते तारों से परेशान थे। अगर यह अभियान सफल रहता है, तो भागलपुर का आसमान जल्द ही साफ और सुंदर नजर आएगा, जो स्मार्ट सिटी की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

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