पटना के कारगिल चौक पर ‘नारी शक्ति’ की हुंकार: सम्राट चौधरी का तीखा हमला, कहा- विपक्ष ने गरीब बेटियों के सपनों का गला घोंटा

पटना। राजधानी पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान और उसके बगल में स्थित कारगिल चौक सोमवार को एक अभूतपूर्व राजनैतिक सरगर्मी का गवाह बना। अवसर था ‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’ का, जहाँ एनडीए की हजारों महिला कार्यकर्ताओं ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ की राह में रोड़ा अटकाने वाले विपक्षी दलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। चिलचिलाती धूप के बावजूद महिलाओं का उत्साह कम नहीं था, और उनके नारों से पूरा गांधी मैदान इलाका गूँज रहा था। इस सम्मेलन का मुख्य आकर्षण बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी रहे, जिन्होंने मंच से विपक्ष, विशेषकर राजद और कांग्रेस पर चुन-चुनकर राजनैतिक प्रहार किए। सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को उसका खोया हुआ सम्मान लौटाने का एक पवित्र माध्यम है, जिसे सत्ता के भूखे विपक्षी दलों ने अपनी संकीर्ण राजनीति की भेंट चढ़ा दिया। कारगिल चौक की इस धरती से आज एक नई राजनैतिक इबारत लिखी गई, जहाँ महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे अब उन चेहरों को बेनकाब करेंगी जिन्होंने दशकों तक उन्हें सदन की दहलीज से दूर रखा।

कारगिल चौक पर उमड़ा आक्रोश का ज्वार: नारों से गूँजा पटना

​सोमवार की सुबह से ही पटना की सड़कों पर भगवा और हरे झंडों के साथ एनडीए की महिला कार्यकर्ताओं का हुजूम जुटना शुरू हो गया था। कारगिल चौक पर आयोजित इस ‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’ का मुख्य उद्देश्य उस राजनैतिक बाधा के खिलाफ आवाज बुलंद करना था, जो संसद में महिला आरक्षण बिल के कार्यान्वयन को लेकर खड़ी की गई है। सम्मेलन में शामिल महिलाओं का कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब साहस दिखाते हुए इस बिल को पेश किया, तो विपक्ष ने तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर इसे लटकाने की कोशिश की।

​सम्राट चौधरी जब मंच पर पहुँचे, तो महिलाओं ने ‘नारी शक्ति जिंदाबाद’ और ‘विपक्ष का महिला विरोधी चेहरा पहचानो’ के नारों के साथ उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर किसी भी औपचारिक संबोधन के बजाय सीधे जनता से संवाद किया। उन्होंने कहा कि कारगिल चौक उन शहीदों की याद दिलाता है जिन्होंने देश के लिए जान दी, और आज इसी जगह से हम उन ‘लोकतंत्र के दुश्मनों’ के खिलाफ लड़ाई का एलान कर रहे हैं जो महिलाओं को कमजोर बनाए रखना चाहते हैं।

सम्राट चौधरी का प्रहार: ‘परिवारवाद’ बनाम ‘आम महिला’

​अपने संबोधन में सम्राट चौधरी ने सीधे तौर पर लालू प्रसाद और राहुल गांधी के नेतृत्व वाले गठबंधन को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” का विरोध वही लोग कर रहे हैं जिनके लिए राजनीति केवल एक ‘पारिवारिक बिजनेस’ है। उन्होंने सवाल पूछा कि आखिर राजद और कांग्रेस को इस बात से क्या परेशानी है कि गांव के गरीब की बेटी, एक साधारण किसान की बहू या एक शिक्षित दलित महिला संसद में बैठकर कानून बनाए?

​सम्राट चौधरी ने कहा, “लालू प्रसाद और उनके कुनबे को इस बात का डर सता रहा है कि अगर आम महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिल गया, तो उनकी परिवारवादी दुकान बंद हो जाएगी। ये लोग चाहते हैं कि केवल इनके घर की महिलाएं ही विधायक और सांसद बनें, लेकिन एनडीए का संकल्प है कि बिहार की हर सशक्त बेटी को सदन में स्थान मिले।” उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी दलों ने संसद में जिस तरह से इस बिल का विरोध किया और कोटे के भीतर कोटे की मांग उठाकर इसे फंसाने की साजिश रची, वह उनकी महिला विरोधी मानसिकता का सबसे बड़ा सबूत है।

30 साल का इंतज़ार और मोदी का संकल्प

​मुख्यमंत्री ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए उपस्थित जनसमूह को याद दिलाया कि महिला आरक्षण का मुद्दा पिछले 30 सालों से धूल फाँक रहा था। उन्होंने कहा कि “एचडी देवेगौड़ा से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक ने कोशिशें कीं, लेकिन हर बार राजद जैसे दलों ने संसद के भीतर बिल की कॉपी फाड़कर लोकतंत्र का अपमान किया। कांग्रेस ने भी अपने 10 साल के शासनकाल में इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया।”

​सम्राट चौधरी ने नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि केवल एक इच्छाशक्ति वाले नेता ने ही इस ‘असंभव’ को ‘संभव’ कर दिखाया। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे इस फर्क को समझें कि कौन उन्हें वास्तव में हक देना चाहता है और कौन केवल कागजों पर राजनीति कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने इस बिल को पारित होने से रोककर केवल राजनैतिक नुकसान नहीं पहुँचाया, बल्कि हमारी माताओं और बहनों के उन सपनों को कुचला है जो वे दशकों से देख रही थीं।

विपक्ष की दलीलें और एनडीए का ‘संतुलित’ रुख

​खबर की निष्पक्षता और संतुलन को बनाए रखने के लिए यह जानना भी जरूरी है कि विपक्षी दलों का तर्क क्या रहा है। राजद और अन्य समाजवादी दलों ने मांग की है कि 33 प्रतिशत आरक्षण के भीतर ‘ओबीसी, एससी और एसटी’ महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाए। उनका तर्क है कि बिना इसके केवल ‘संभ्रांत’ वर्ग की महिलाएं ही आगे बढ़ पाएंगी।

​हालांकि, सम्राट चौधरी ने इस तर्क को ‘गुमराह करने वाली राजनीति’ करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा सभी वर्गों की महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने की है, लेकिन विपक्ष ‘कोटा विदिन कोटा’ के नाम पर बिल को अनिश्चितकाल के लिए लटकाना चाहता है। सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि एनडीए का उद्देश्य महिलाओं का एक व्यापक और समावेशी सशक्तिकरण है, जिसमें जाति और धर्म के आधार पर फूट डालने की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह ‘टेक्निकल कार्ड’ दरअसल महिलाओं के प्रति उनके ‘तिरस्कार’ को छिपाने का एक तरीका है।

कारगिल चौक से गांव-गांव तक: एनडीए की नई रणनीति

​’जन आक्रोश महिला सम्मेलन’ केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहा। सम्राट चौधरी ने यहाँ से एक बड़े राजनैतिक अभियान की घोषणा की। उन्होंने एनडीए की महिला कार्यकर्ताओं को टास्क दिया कि वे बिहार के हर गांव और हर पंचायत में जाकर महिलाओं को बताएं कि उनका ‘दुश्मन’ कौन है। उन्होंने कहा कि “हमें महिलाओं को समझाना होगा कि जब उनके अधिकार की बात आई, तो कौन से नेता संसद में शोर मचा रहे थे और कौन खामोश बैठे थे।”

​मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इस आंदोलन को अब ब्लॉक और पंचायत स्तर पर ले जाया जाए। सम्राट चौधरी ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बिहार की महिलाएं ही विपक्ष के इस नकारात्मक रुख का अंत करेंगी। उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के नेतृत्व में पहले ही महिलाओं को पंचायत और नगर निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण देकर एक मिसाल कायम की गई है, और अब केंद्र की पहल के साथ इसे और ऊँचाइयों पर ले जाना है।

निष्कर्ष: 2026 और 2027 की राजनैतिक बिसात

​20 अप्रैल 2026 की यह दोपहर पटना के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। कारगिल चौक से सम्राट चौधरी ने जो बिगुल फूँका है, वह आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा तय कर सकता है। मुख्यमंत्री ने बहुत ही सफाई से इस मुद्दे को ‘गरीब बनाम अमीर’ और ‘जनता बनाम परिवारवाद’ की लड़ाई में तब्दील कर दिया है।

​आक्रोशित महिलाओं का यह महाजुटान इस बात का संकेत है कि ‘आधी आबादी’ अब केवल मूकदर्शक बनकर नहीं रहेगी। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए ने महिला वोट बैंक को साधने के लिए एक बड़ा कार्ड खेला है, जिसका मुकाबला करना विपक्ष के लिए आसान नहीं होगा। कारगिल चौक की यह सभा समाप्त हो गई है, लेकिन यहाँ से निकली आक्रोश की गूँज बिहार की गलियों में लंबे समय तक सुनाई देगी। अब देखना होगा कि विपक्ष इस ‘महिला विरोधी’ होने के ठप्पे का जवाब किस तरह देता है, क्योंकि सम्राट चौधरी ने आज लड़ाई का मैदान और हथियार दोनों तय कर दिए हैं।

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