
बिहार सरकार राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इस पहल के तहत हर जिले में एक गांव को “मॉडल सोलर विलेज” के रूप में विकसित किया जाएगा। इस योजना की शुरुआत बांका जिले से की जा रही है, जहां पहले चरण में 11 गांवों को शॉर्टलिस्ट किया गया है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे गांवों का विकास करना है, जो पूरे जिले के लिए नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में उदाहरण बन सकें। चयनित गांवों को सौर ऊर्जा आधारित मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि अन्य गांव भी इससे प्रेरित होकर सौर ऊर्जा अपनाएं और ऊर्जा आत्मनिर्भर बनें।
इस योजना को बिहार रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (BREDA) द्वारा लागू किया जा रहा है। इसके तहत सभी जिलों से संभावित गांवों की सूची मांगी गई है। गांवों के चयन के लिए कुछ मानक तय किए गए हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण शर्त गांव की आबादी 5,000 से अधिक होना है। इसके बाद जिला स्तरीय समिति द्वारा गांवों का मूल्यांकन किया जाएगा। अंततः एक प्रतियोगिता के माध्यम से सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले गांव को “मॉडल सोलर विलेज” का दर्जा दिया जाएगा।
यह पूरी पहल केंद्र सरकार की “पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना” पर आधारित है। इस योजना के तहत घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी प्रदान की जा रही है। इसमें 1 किलोवाट पर ₹30,000, 2 किलोवाट पर ₹60,000 और 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता पर ₹78,000 तक की सहायता दी जाती है। साथ ही, लाभार्थियों को 7% ब्याज दर पर अधिकतम ₹2 लाख तक का बैंक लोन भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसे 7 से 8 वर्षों में आसान किस्तों में चुकाया जा सकता है।
जिला प्रशासन की ओर से अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को इस योजना के प्रति जागरूक करें। जिला अधिकारी ने कहा कि यह योजना ग्रामीणों के लिए बिजली बिल के बोझ को कम करने का एक सुनहरा अवसर है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु जिला कार्यालयों में विशेष कैंप भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि ग्रामीण आसानी से इस योजना का लाभ उठा सकें।


