
बिहार के नालंदा जिले से एक ऐसी हृदयविदारक और विडंबनापूर्ण खबर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और ‘हर्ष फायरिंग’ जैसी कुप्रथाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नालंदा के बिंद थाना क्षेत्र अंतर्गत अमावां गांव में एक शादी समारोह की खुशियां उस वक्त चीख-पुकार और सन्नाटे में बदल गईं, जब एक 21 वर्षीय युवक की अपनी ही गोली लगने से मौत हो गई। सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि मृतक युवक की खुद की शादी महज सात दिनों के बाद यानी 27 अप्रैल को होने वाली थी। जिस घर में मंगल गीत गाए जा रहे थे और जहाँ बारात ले जाने की तैयारियां अपने चरम पर थीं, वहां अब केवल आंसुओं का सैलाब और गहरा सन्नाटा पसरा है। मृतक की पहचान सरमेरा थाना क्षेत्र के गौसनगर गांव निवासी छोटू कुमार के रूप में हुई है। यह घटना उस वक्त घटी जब वह अपने एक मित्र के तिलक समारोह में शामिल होने गया था। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उत्सव के दौरान हथियारों का प्रदर्शन और ‘हर्ष फायरिंग’ का शौक किस तरह किसी की जान पर बन आता है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
तिलक का जश्न और मौत का साया: अमावां गांव की वह खौफनाक रात
घटनाक्रम की शुरुआत रविवार की रात नालंदा के बिंद थाना क्षेत्र के अमावां गांव से होती है। वहां मंटू कुमार के तिलक समारोह का आयोजन था। गांव में चारों तरफ उत्सव का माहौल था, नाच-गाने के लिए डीजे बज रहा था और मेहमानों की चहल-पहल थी। इसी उत्सव में शामिल होने के लिए छोटू कुमार अपने दोस्तों के साथ पहुँचा था। छोटू और उसके दोस्त पूरी तरह जश्न के मूड में थे। चश्मदीदों के अनुसार, जब नीचे नाच-गाना चल रहा था, तभी छोटू अचानक छत पर चला गया।
कुछ ही मिनट बीते थे कि संगीत की गूँज के बीच एक तेज धमाका सुनाई दिया। छत से आई गोली की आवाज ने नीचे मौजूद मेहमानों के बीच हड़कंप मचा दिया। लोग बदहवास होकर जब ऊपर पहुँचे, तो वहां का नजारा दहला देने वाला था। 21 साल का छोटू कुमार खून से लथपथ जमीन पर पड़ा तड़प रहा था। उसके पेट में गोली लगी थी और अत्यधिक खून बह चुका था। उसे तुरंत आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया। जो दोस्त कुछ देर पहले उसके साथ हंस-बोल रहे थे, वे अब पुलिसिया कार्रवाई के डर से भाग खड़े हुए।
दिल्ली से लौटा था बारात सजाने, 27 अप्रैल को होनी थी शादी
छोटू कुमार के परिवार के लिए यह क्षति असहनीय है। वह दिल्ली में मजदूरी कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करता था। करीब 10 दिन पहले ही वह दिल्ली से अपने गांव गौसनगर लौटा था। घर लौटने का मकसद बेहद खास था—उसकी अपनी शादी। घर में 27 अप्रैल को बारात निकलने की तैयारियां चल रही थीं। कार्ड बांटे जा चुके थे, हलवाई तय हो गए थे और घर की महिलाएं शादी के गीत गा रही थीं।
हैरानी की बात यह है कि जिस दिन उसकी मौत की खबर आई, यानी 20 अप्रैल 2026 को ही उसका अपना तिलक आना था। एक दूल्हा, जिसका तिलक आज चढ़ना था, वह कल रात अपने दोस्त की खुशी में शामिल होने गया और खुद की जान गँवा बैठा। परिजनों ने बताया कि वह अपनी शादी को लेकर बेहद उत्साहित था और इसी उत्साह में वह अपने दोस्त के घर पहुँचा था। अब उस घर में जहाँ बारात की चर्चा होनी थी, वहां उसकी अर्थी उठाने की तैयारी हो रही है। यह नियति का क्रूर मजाक ही है कि जो हाथ 7 दिन बाद सेहरा सजाने वाले थे, वे अब मिट्टी में मिल चुके हैं।
पुलिसिया खुलासा: अपनी ही बंदूक और ‘मिसफायर’ ने ली जान
बिंद थाना अध्यक्ष मुरली मनोहर आजाद ने इस पूरी घटना की जांच के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। पुलिस जांच के अनुसार, छोटू कुमार की मौत किसी और की गोली से नहीं, बल्कि उसके खुद के पास मौजूद हथियार से हुई है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि छोटू अपने साथ एक अवैध देसी कट्टा (हथियार) लेकर दोस्त के घर गया था। वह छत पर शायद हर्ष फायरिंग करने की कोशिश कर रहा था या हथियार को चेक कर रहा था, तभी अचानक ‘मिसफायर’ हो गया।
गोली सीधे उसके पेट में जा लगी, जिससे आंतरिक अंगों को गंभीर क्षति पहुँची। थाना अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि छोटू कुमार का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। वह पहले भी हथियार रखने और लूटपाट के संगीन मामलों में जेल की सजा काट चुका था। संभवतः इसी आपराधिक बैकग्राउंड के कारण वह अपनी शादी और दोस्तों के समारोहों में भी हथियार साथ रखना अपनी शान समझता था। लेकिन कानून के उल्लंघन का यही शौक उसके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में काल बनकर सामने आया।
फरार दोस्त और एफएसएल की जांच: न्याय की तलाश
घटना के बाद अमावां गांव में स्थिति तनावपूर्ण और अजीबोगरीब बनी हुई है। जैसे ही गोली चली और छोटू की मौत की खबर फैली, मंटू कुमार के घर मौजूद अधिकांश लोग और छोटू के दोस्त मौके से फरार हो गए। पुलिस को अंदेशा है कि कई लोग इस अवैध हथियार की जानकारी रखते थे और हर्ष फायरिंग के साक्षी थे। पुलिस ने अब उन लोगों की पहचान शुरू कर दी है जो घटना के वक्त छोटू के साथ छत पर मौजूद थे।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। एफएसएल के विशेषज्ञों ने छत से खून के नमूने, बारूद के अवशेष और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गोली किस दूरी से और किस कोण पर चली थी। हालांकि पुलिस मान रही है कि यह एक दुर्घटना (Self-inflicted injury) है, लेकिन हत्या के पहलू को भी पूरी तरह नकारा नहीं जा रहा है। पुलिस अब उस अवैध देसी कट्टे की बरामदगी के लिए छापेमारी कर रही है, जो घटना के बाद से गायब है। अंदेशा है कि भागते समय किसी साथी ने हथियार को छिपा दिया होगा।
हर्ष फायरिंग: बिहार के उत्सवों में घुलता खून का जहर
नालंदा की यह घटना एक बार फिर बिहार में जड़ें जमा चुकी ‘हर्ष फायरिंग’ की कुप्रथा पर प्रहार करती है। सरकार और प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी और कानूनी कार्रवाई के बावजूद, शादियों में अवैध हथियारों का प्रदर्शन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। छोटू कुमार की मौत इस बात का प्रमाण है कि ये हथियार न केवल दूसरों के लिए, बल्कि खुद चलाने वाले के लिए भी उतने ही घातक हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक हथियारों को ‘मर्दानगी’ या ‘रसूख’ का प्रतीक माना जाएगा, तब तक ऐसे बेगुनाह और जवान लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे। छोटू का आपराधिक इतिहास होने के बावजूद उसका समाज में इस तरह हथियार लेकर घूमना पुलिसिया तंत्र की उस कमजोरी को भी दर्शाता है, जहाँ अवैध हथियारों की सप्लाई पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है। 21 साल की उम्र में जेल जाना और फिर शादी से ठीक पहले ऐसी मौत मरना, युवाओं के लिए एक कड़ा सबक है।
निष्कर्ष: सुलगते सवाल और अधूरा सेहरा
20 अप्रैल 2026 की यह तारीख गौसनगर और अमावां गांव के लोगों के लिए कभी न भूलने वाला जख्म बन गई है। एक मां जो अपने बेटे का सेहरा देखने का सपना देख रही थी, अब उसकी लाश देख रही है। छोटू कुमार की अपनी गलती और हथियारों के प्रति उसका आकर्षण उसके पूरे परिवार को उम्र भर का गम दे गया। पुलिस अपनी चार्जशीट तैयार करेगी, जांच पूरी होगी, लेकिन 27 अप्रैल की वह तारीख अब कभी नहीं आएगी जिसका इंतजार उस परिवार को था।
बिंद थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और फरार लोगों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। नालंदा की यह घटना उन तमाम लोगों के लिए चेतावनी है जो कानून को ताक पर रखकर जश्न मनाने में यकीन रखते हैं। खुशियां बांटने का तरीका अगर बारूद से होकर गुजरता है, तो उसका अंत अक्सर ऐसा ही भयावह होता है। फिलहाल, छोटू का शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है और गांव में मातमी सन्नाटे के बीच उसके अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही है।


