
भागलपुर की शांत सुबह सोमवार को उस वक्त चीखों और मातम में बदल गई, जब ललमटिया थाना क्षेत्र के जैन मंदिर रोड पर एक मासूम बच्चे का रक्तरंजित शव बरामद हुआ। यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि उस क्रूरता की पराकाष्ठा है जिसने पूरे सिल्क सिटी को झकझोर कर रख दिया है। एक सात-आठ साल का बच्चा, जो कल शाम तक अपने घर की गलियों में खेल रहा था, आज उसकी लाश सड़क किनारे मिट्टी में सनी मिली। मृतक की पहचान साहेबगंज कबीरपुर निवासी मोहम्मद इजहार के पुत्र समीर के रूप में हुई है। इस सनसनीखेज वारदात ने न केवल पुलिसिया गश्त के दावों की पोल खोल दी है, बल्कि शहरी आबादी के बीच असुरक्षा की एक गहरी भावना पैदा कर दी है। जैसे ही शव मिलने की खबर जंगल की आग की तरह फैली, जैन मंदिर रोड पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। हर आंख नम थी और हर दिल में इस घिनौनी करतूत को अंजाम देने वाले के खिलाफ नफरत और आक्रोश भरा था।
लापता होने से मौत के खौफनाक सफर की दास्तां
समीर की मौत की कहानी रविवार की शाम से शुरू होती है। बताया जा रहा है कि समीर बीती शाम घर से बाहर खेलने निकला था, लेकिन जब काफी देर तक वह वापस नहीं लौटा, तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। साहेबगंज कबीरपुर जैसे घनी आबादी वाले इलाके में किसी बच्चे का अचानक गायब हो जाना परिजनों के लिए किसी डरावने सपने जैसा था। मोहम्मद इजहार और उनके रिश्तेदारों ने रातभर कबीरपुर, ललमटिया और आसपास के इलाकों की खाक छानी। लोगों के घरों के दरवाजे खटखटाए गए, हर गली-कूचे को देखा गया, लेकिन समीर का कहीं कोई सुराग नहीं मिला।
पूरी रात परिजनों ने जागकर काटी, इस उम्मीद में कि शायद समीर रास्ता भटक गया होगा और सुबह तक घर लौट आएगा। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। सोमवार की अलसुबह जब लोग अपने घरों से बाहर निकले, तो जैन मंदिर रोड पर एक बच्चे का शव पड़ा देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। शव की स्थिति देखकर ही यह स्पष्ट हो गया था कि बच्चे के साथ किसी ने बहुत ही बेरहमी से मारपीट की है और फिर उसकी हत्या कर दी है। जैसे ही यह खबर समीर के पिता तक पहुँची, उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
अपराध का खौफनाक मंजर: शरीर पर जख्मों के निशान
घटनास्थल का दृश्य इतना विचलित करने वाला था कि कमजोर दिल वाले लोग वहां खड़े नहीं हो पा रहे थे। समीर का शव सड़क किनारे बेतरतीब तरीके से पड़ा था। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, मासूम के शरीर पर कई जगह गहरे जख्मों के निशान पाए गए हैं। गर्दन और चेहरे के पास चोट के निशान यह संकेत दे रहे थे कि समीर ने अपनी जान बचाने के लिए काफी संघर्ष किया होगा। हमलावर ने शायद गला घोंटकर या किसी भारी वस्तु से प्रहार कर उसकी जान ली है।
यह आशंका जताई जा रही है कि हत्या कहीं और की गई और साक्ष्य छिपाने या पुलिस को गुमराह करने के उद्देश्य से शव को ललमटिया थाना क्षेत्र के इस अपेक्षाकृत सुनसान रास्ते पर फेंक दिया गया। हत्या के पीछे क्या कारण हो सकता है, यह अभी भी रहस्य बना हुआ है। क्या यह किसी आपसी रंजिश का नतीजा है या फिर किसी सनकी अपराधी की करतूत? पुलिस इन तमाम पहलुओं पर गौर कर रही है। घटनास्थल पर बिखरे हुए साक्ष्य और शव की हालत यह बताने के लिए काफी है कि हत्यारे के मन में कानून का जरा सा भी डर नहीं था।
पुलिस की कार्रवाई और जांच का दायरा
जैसे ही इस सामूहिक हत्याकांड की सूचना मिली, ललमटिया थाना पुलिस और डायल 112 की टीम बिना समय गंवाए मौके पर पहुँची। पुलिस ने तुरंत भीड़ को नियंत्रित किया और शव को अपने कब्जे में लेकर कागजी कार्रवाई शुरू की। भागलपुर पुलिस के वरीय अधिकारियों को भी मामले की संवेदनशीलता से अवगत कराया गया है। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालना शुरू कर दिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि रात के किस पहर में शव को वहां लाया गया था।
अनुसंधान में जुटी पुलिस टीम अब समीर के घर के आसपास के लोगों और उसके दोस्तों से भी पूछताछ कर रही है। यह जानने की कोशिश की जा रही है कि आखिरी बार समीर को किसके साथ देखा गया था। पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक समय और कारणों का खुलासा हो पाएगा। हालांकि, प्राथमिक दृष्टि में यह स्पष्ट रूप से हत्या का मामला प्रतीत हो रहा है। पुलिस ने परिजनों को आश्वासन दिया है कि अपराधियों को पाताल से भी ढूँढ निकाला जाएगा, लेकिन आक्रोशित भीड़ के लिए केवल आश्वासन काफी नहीं था।
जनाक्रोश और सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल
मासूम की हत्या के बाद भागलपुर का यह इलाका सुलग उठा है। स्थानीय लोगों में पुलिस के खिलाफ भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि ललमटिया और साहेबगंज के इलाकों में रात के समय पुलिस गश्त नगण्य रहती है, जिसका फायदा उठाकर अपराधी ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। जैन मंदिर रोड जैसे इलाकों में अंधेरे का लाभ उठाकर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिसकी शिकायत कई बार की जा चुकी है, लेकिन प्रशासन की नींद तब खुली जब एक मासूम की जान चली गई।
विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों ने मांग की है कि इस मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया जाए और स्पीडी ट्रायल चलाकर आरोपियों को फांसी की सजा दी जाए। घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, जिसे देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। समीर की मौत ने पूरे भागलपुर के अभिभावकों को डरा दिया है। लोग अब अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने में कतरा रहे हैं।
सुशासन के दावे और जमीनी हकीकत
20 अप्रैल 2026 की यह घटना भागलपुर के इतिहास में एक काले दिन के रूप में याद रखी जाएगी। समीर की हत्या केवल एक परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की नैतिक विफलता भी है। मोहम्मद इजहार का रोता हुआ चेहरा और उनकी बेबस आवाज आज पूरे शहर से सवाल पूछ रही है कि आखिर एक मासूम का क्या कसूर था?
पुलिस के लिए यह मामला एक अग्निपरीक्षा की तरह है। यदि जल्द ही अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो यह जनाक्रोश किसी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। भागलपुर जैसे व्यापारिक और शैक्षिक केंद्र में अपराध का यह ग्राफ बढ़ना चिंताजनक है। समीर तो अब वापस नहीं आएगा, लेकिन उसके हत्यारों को मिलने वाली कड़ी सजा ही कानून के इकबाल को बहाल कर सकती है। फिलहाल, ललमटिया पुलिस की कई टीमें संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं और पूरे जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है।


