अनुभव और ऊर्जा का संगम: पटना के खाजपुरा पहुँचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद का लिया आशीर्वाद; विधायक संजीव चौरसिया की मौजूदगी में हुई शिष्टाचार मुलाकात

पटना। बिहार की सत्ता की कमान संभालने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी निरंतर अपनी सक्रियता और सादगी से न केवल जनता, बल्कि राजनीति के पुराने दिग्गजों के बीच भी अपनी पैठ मजबूत कर रहे हैं। इसी कड़ी में पटना की राजनैतिक सरगर्मी उस समय खाजपुरा इलाके की ओर मुड़ गई, जब मुख्यमंत्री का काफिला पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद के निवास स्थान पहुँचा। यह कोई औपचारिक सरकारी बैठक नहीं थी, बल्कि यह ‘शिष्टाचार और आत्मीयता’ का वह संगम था, जहाँ वर्तमान बिहार की ऊर्जा, अतीत के गौरवशाली अनुभव से मार्गदर्शन लेने पहुँची थी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गंगा प्रसाद से मिलकर न केवल उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली, बल्कि प्रदेश के विकास और वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य पर भी चर्चा की। इस विशेष मुलाक़ात के दौरान गंगा प्रसाद के सुपुत्र और दीघा से विधायक संजीव चौरसिया भी उपस्थित रहे, जिसने इस मिलन को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। राजनैतिक गलियारों में इस मुलाकात को सम्राट चौधरी के ‘सबको साथ लेकर चलने’ और ‘बुजुर्गों के सम्मान’ वाले विजन के रूप में देखा जा रहा है।

खाजपुरा में ‘बड़ों का आशीर्वाद’: परंपरा और सम्मान की तस्वीर

​पटना का खाजपुरा इलाका सोमवार की सुबह सुरक्षा घेरों और कार्यकर्ताओं की चहल-पहल से गुलजार रहा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद के निजी आवास पर पहुँचना एक पारंपरिक और गौरवशाली राजनैतिक संस्कृति को रेखांकित करता है। गंगा प्रसाद, जिनका व्यक्तित्व केवल एक पूर्व राज्यपाल (सिक्किम और मेघालय) तक सीमित नहीं है, बल्कि वे बिहार की राजनीति के उन स्तंभों में से एक हैं जिन्होंने दशकों तक संगठन और समाज की सेवा की है।

​जैसे ही सम्राट चौधरी उनके आवास पर पहुँचे, गंगा प्रसाद और संजीव चौरसिया ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले गंगा प्रसाद का चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया। यह दृश्य बिहार की उस सनातनी और राजनैतिक परंपरा का प्रतीक था, जहाँ पद से ऊपर ‘अनुभव और उम्र’ को वरीयता दी जाती है। मुलाक़ात के दौरान सम्राट चौधरी काफी सहज नजर आए और उन्होंने काफी समय गंगा प्रसाद के साथ बिताया। सम्राट चौधरी का मानना है कि जो मार्गदर्शन अनुभवी नेताओं से प्राप्त होता है, वह शासन को अधिक मानवीय और जनोन्मुखी बनाने में सहायक सिद्ध होता है।

संजीव चौरसिया की मौजूदगी और संगठन की मजबूती

​इस शिष्टाचार मुलाक़ात के दौरान विधायक संजीव चौरसिया की उपस्थिति ने इस मिलन को पारिवारिक के साथ-साथ राजनैतिक रूप से भी सुदृढ़ बनाया। संजीव चौरसिया, जो स्वयं पटना की राजनीति में एक मजबूत पकड़ रखते हैं और दीघा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्होंने मुख्यमंत्री को क्षेत्र की गतिविधियों और गंगा प्रसाद के लंबे राजनैतिक जीवन की स्मृतियों से अवगत कराया।

​सम्राट चौधरी और संजीव चौरसिया के बीच का यह तालमेल संगठन के भीतर की एकजुटता को भी प्रदर्शित करता है। भाजपा और एनडीए सरकार में सम्राट चौधरी जिस तरह से नए और पुराने नेताओं के बीच एक सेतु (Bridge) का काम कर रहे हैं, उसकी झलक खाजपुरा की इस बैठक में स्पष्ट रूप से देखने को मिली। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी मुलाकातें कार्यकर्ताओं में यह संदेश देती हैं कि सरकार और संगठन के शीर्ष पर बैठे लोग अपनी जड़ों और अपने मार्गदर्शकों को कभी नहीं भूलते। गंगा प्रसाद ने भी मुख्यमंत्री को उनके आगामी कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं और बिहार के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

अनुभव की पाठशाला: गंगा प्रसाद का मार्गदर्शन

​पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद का जीवन संघर्ष और सुशासन की एक खुली किताब रहा है। जब सम्राट चौधरी उनसे संवाद कर रहे थे, तो चर्चा के केंद्र में बिहार का गौरव और यहाँ की विकासपरक नीतियां रहीं। गंगा प्रसाद ने अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न राज्यों में जो अनुभव हासिल किए, उसे उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ साझा किया। मुख्यमंत्री ने भी बड़ी एकाग्रता से उनके सुझावों को सुना।

​यह मुलाक़ात इसलिए भी विशेष है क्योंकि सम्राट चौधरी इन दिनों बिहार में ‘समृद्धि यात्रा’ और जन-संवाद के माध्यम से शासन को सीधे जनता की चौखट तक ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। गंगा प्रसाद जैसे अनुभवी राजनेता से मिलना उन्हें उन बारीकियों को समझने में मदद करता है, जो अक्सर फाइलों के अंबार में दब जाती हैं। सम्राट चौधरी ने कहा कि गंगा प्रसाद जैसे व्यक्तित्व का सानिध्य मात्र ही ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करता है। यह मुलाक़ात केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें बिहार के सर्वांगीण विकास और सामाजिक समरसता को लेकर भी संक्षिप्त मंथन हुआ।

राजनैतिक निहितार्थ: खाजपुरा से निकला बड़ा संदेश

​पटना के खाजपुरा से उठी इस मुलाक़ात की गूँज केवल एक कमरे तक सीमित नहीं है। सम्राट चौधरी का पूर्व राज्यपाल के घर जाना यह दर्शाता है कि वे अपनी कार्यशैली में ‘विरासत और विकास’ का संतुलन बनाए रखना चाहते हैं। एक तरफ जहाँ वे युवाओं को तकनीक और रोजगार से जोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे बिहार की पुरानी पीढ़ी के नेताओं का सम्मान कर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उनकी सरकार में ‘अनुभव’ की कोई कमी न रहे।

​संजीव चौरसिया की सक्रियता और सम्राट चौधरी के साथ उनका समन्वय यह भी बताता है कि पटना की राजनीति में संगठन के भीतर तालमेल बहुत गहरा है। विपक्ष अक्सर आरोप लगाता है कि भाजपा में नए चेहरों के आने से पुरानों को दरकिनार किया जा रहा है, लेकिन सम्राट चौधरी ने गंगा प्रसाद के पैर छूकर और उनके साथ बैठकर उन तमाम कयासों पर विराम लगा दिया है। यह मुलाक़ात राजनैतिक रूप से यह संदेश देती है कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार की एनडीए सरकार हर वर्ग और हर पीढ़ी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री का व्यस्त कार्यक्रम और सांस्कृतिक चेतना

​पिछले कुछ दिनों के सम्राट चौधरी के कार्यक्रमों पर नजर डाली जाए, तो एक पैटर्न उभर कर सामने आता है। उन्होंने रविवार को बाबा बैद्यनाथ और बासुकीनाथ धाम में पूजा-अर्चना की, बापू टावर का निरीक्षण किया और फिर पटना में जनता के बीच जाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। सोमवार को पूर्व राज्यपाल से यह मुलाकात इसी कड़ी का हिस्सा है। वे निरंतर आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और राजनैतिक स्थलों व व्यक्तियों से जुड़कर बिहार की एक ‘समग्र तस्वीर’ पेश कर रहे हैं।

​खाजपुरा स्थित आवास पर चाय की चुस्कियों के साथ हुई इस चर्चा ने यह साबित कर दिया कि सम्राट चौधरी के पास न केवल राजनैतिक विजन है, बल्कि उनमें मानवीय संबंधों को संजोने की भी अद्भुत क्षमता है। मुलाक़ात के दौरान वहां मौजूद अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी मुख्यमंत्री की इस पहल की सराहना की। संजीव चौरसिया ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का समय निकालकर उनके पिता का हालचाल जानना और मार्गदर्शन लेना पूरे परिवार और क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।

भरोसे की नयी बुनियाद

​20 अप्रैल 2026 की यह शिष्टाचार मुलाकात बिहार की राजनीति में एक सकारात्मक अध्याय की तरह देखी जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद से मिलना और उनके साथ समय बिताना यह दर्शाता है कि वे सत्ता के अहंकार से दूर, एक ‘सेवक’ की भांति बड़ों के प्रति सम्मान रखते हैं। संजीव चौरसिया की मौजूदगी ने इस संवाद को और अधिक अर्थपूर्ण बनाया।

​खाजपुरा के इस घर से निकली तस्वीरें यह संदेश दे रही हैं कि बिहार में अब एक ऐसा नेतृत्व है जो तकनीक को अपनाता है, विकास को रफ्तार देता है, लेकिन अपनी जड़ों और अपने पुरखों के योगदान को कभी नहीं बिसराता। सम्राट चौधरी की यह सादगी और गंगा प्रसाद का वह आशीर्वाद, आने वाले समय में बिहार की राजनीति और सुशासन के लिए एक मजबूत आधारशिला सिद्ध होगा। प्रदेश की जनता अपने मुख्यमंत्री के इस व्यवहार को देखकर यह विश्वास कर रही है कि बिहार अब उन हाथों में है जो सबको साथ लेकर, सबको सम्मान देकर ही आगे बढ़ेंगे।

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