पूर्व रेलवे का स्वच्छता अभियान बना जनआंदोलन, स्टेशनों से ट्रेनों तक ‘स्वच्छ भारत, स्वच्छ रेल’ का संदेश

कोलकाता से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूर्व रेलवे द्वारा चलाया जा रहा ‘स्वच्छ भारत, स्वच्छ रेल’ अभियान अब केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक व्यापक आंदोलन बनता जा रहा है। अभियान के चौथे दिन, 18 अप्रैल 2026 को यह पहल और अधिक जीवंत रूप में सामने आई, जहां स्वच्छता को एक सतत यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस दिन का आयोजन विश्व धरोहर दिवस की भावना से भी जुड़ा रहा, जिसमें यह संदेश दिया गया कि स्वच्छता केवल स्मारकों की रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम भी है।

पूर्व रेलवे के विभिन्न स्टेशनों और ट्रेनों में इस अभियान के तहत कई गतिविधियां आयोजित की गईं। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के माझेरहाट और दक्षिणेश्वर रेलवे स्टेशनों पर स्वयंसेवकों ने यात्रियों के बीच जागरूकता फैलाने का जिम्मा उठाया। कुल 18 स्वयंसेवकों ने हाथों में तख्तियां लेकर लोगों से संवाद किया और स्वच्छता के महत्व को समझाया। इनमें घोलेशापुर समूह और विवेकानंद समूह के सदस्य शामिल थे, जिन्होंने यात्रियों को कचरा प्रबंधन और साफ-सफाई की आदतों के बारे में जागरूक किया।

इन व्यस्त स्टेशनों पर रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच स्वयंसेवकों ने लोगों से व्यक्तिगत रूप से बात की और उन्हें यह समझाने का प्रयास किया कि स्वच्छता केवल रेलवे की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। इस पहल के जरिए यह संदेश दिया गया कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर बड़े स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

बैरकपुर रेलवे स्टेशन पर ‘पूर्व रेलवे भारत स्काउट्स एंड गाइड्स’ के तत्वावधान में एक विशेष अभियान चलाया गया। यहां स्काउट्स और गाइड्स ने स्टेशन परिसर, मंदिर क्षेत्र और आसपास के इलाकों में सफाई अभियान चलाया। इस दौरान यात्रियों, दुकानदारों और रेलवे कर्मचारियों को भी इसमें शामिल किया गया, जिससे यह एक सामूहिक प्रयास बन गया। हर साफ किया गया कोना और हर दिया गया संदेश इस बात का प्रतीक बना कि स्वच्छता एक साझा जिम्मेदारी है।

अज़ीमगंज में यह अभियान एक रैली के रूप में सामने आया, जिसमें 15 स्काउट्स, गाइड्स, रोवर्स और रेंजर्स ने भाग लिया। उन्होंने नारों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को स्वच्छता अपनाने के लिए प्रेरित किया। स्थानीय निवासियों और यात्रियों के बीच यह संदेश दिया गया कि कचरे को निर्धारित स्थान पर डालना और साफ-सफाई बनाए रखना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। इस रैली ने पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।

डानकुनी रेलवे स्टेशन पर भी एक छोटे समूह ने बड़ा संदेश दिया। यहां छह स्काउट्स की टीम ने यात्रियों से संवाद कर उन्हें स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। उन्होंने यह साबित किया कि बदलाव लाने के लिए बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती, बल्कि छोटी-छोटी कोशिशें भी बड़ा असर डाल सकती हैं।

यह अभियान केवल स्टेशनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ट्रेनों में भी इसे प्रभावी तरीके से लागू किया गया। ट्रेन संख्या 12303 पूर्वा एक्सप्रेस और 03202 पटना–आसनसोल मेमू एक्सप्रेस में यात्रियों के बीच जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। आसनसोल जिले के 15 प्रतिभागियों ने यात्रियों से संवाद कर उन्हें कूड़ा न फैलाने, कूड़ेदान का उपयोग करने और प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने के लिए प्रेरित किया।

ट्रेन के डिब्बों को जागरूकता के मंच में बदलते हुए प्रतिभागियों ने यह संदेश दिया कि स्वच्छता केवल स्टेशन तक सीमित नहीं, बल्कि यात्रा के हर पल का हिस्सा होनी चाहिए। यात्रियों ने भी इस पहल की सराहना की और स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करने का आश्वासन दिया।

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने इस अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक संस्कृति है, जिसे सभी को मिलकर विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पटरियां और स्वच्छ विचार मिलकर ही एक बेहतर और सुरक्षित रेलवे वातावरण का निर्माण कर सकते हैं।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना है, ताकि वे स्वच्छता को अपनी आदत बना सकें। रेलवे प्रशासन लगातार इस दिशा में काम कर रहा है और यात्रियों को सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें जागरूक भी कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियानों से न केवल रेलवे परिसरों की सफाई में सुधार होता है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव आता है। जब लोग सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने की जिम्मेदारी समझते हैं, तो यह एक स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण के निर्माण में मदद करता है।

हालांकि, इस तरह के अभियानों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि लोग इसे कितनी गंभीरता से अपनाते हैं। यदि हर यात्री अपनी जिम्मेदारी समझे और नियमों का पालन करे, तो रेलवे को साफ-सुथरा बनाए रखना आसान हो जाएगा।

कुल मिलाकर, पूर्व रेलवे का यह स्वच्छता अभियान एक प्रेरणादायक पहल के रूप में सामने आया है, जो यह दिखाता है कि सामूहिक प्रयासों से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। यह अभियान केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी सोच को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें स्वच्छता को जीवन का अभिन्न हिस्सा माना जाता है।

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