
भागलपुर, 19 अप्रैल 2026। भागलपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां सांप के काटने से एक 12 वर्षीय किशोर की मौत हो गई। इस घटना ने न केवल एक परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने अस्पताल पर समय पर इलाज न देने और लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
यह घटना सजौर थाना क्षेत्र के मनियारपुर गांव की है, जहां रहने वाले आयुष कुमार की सांप के काटने से मौत हो गई। आयुष की उम्र महज 12 साल थी और वह अपने परिवार का सबसे बड़ा बेटा था। बताया जा रहा है कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ भी था, जिससे परिवार को पहले से ही कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था।
परिजनों के अनुसार, घटना उस समय हुई जब आयुष घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान अचानक एक सांप ने उसे काट लिया। कुछ ही देर में उसके पैर से खून निकलने लगा और उसकी हालत बिगड़ने लगी। पास में मौजूद दादा की नजर जब इस पर पड़ी, तो उन्होंने तुरंत परिवार के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी दी।
घटना की गंभीरता को समझते हुए आयुष के पिता रतन कुमार सिंह ने बिना देर किए उसे मोटरसाइकिल पर बैठाया और इलाज के लिए भागलपुर के मायागंज अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। लेकिन परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्हें समय पर उचित इलाज नहीं मिल सका।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल में न तो डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया और न ही सांप के जहर को निष्क्रिय करने के लिए जरूरी इंजेक्शन (एंटी-वेनम) समय पर दिया गया। इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल की ओर से कोई एंबुलेंस या आपातकालीन सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई।
सबसे मार्मिक दृश्य उस समय देखने को मिला जब आयुष के पिता अपने बेटे को गोद में लेकर अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटकते नजर आए। मदद की गुहार लगाते हुए उनकी बेबसी और दर्द ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद आयुष की जान नहीं बचाई जा सकी।
परिजनों का साफ आरोप है कि अगर समय पर सही इलाज मिलता, तो आयुष की जान बचाई जा सकती थी। उनका कहना है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण ही उनके बेटे की मौत हुई है। इस घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
आयुष चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा था और परिवार की जिम्मेदारी भी धीरे-धीरे उसी पर आने वाली थी। उसके पिता रतन कुमार सिंह पेशे से राजमिस्त्री हैं और मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। इस हादसे ने उनके जीवन को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहां समय पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पातीं। सांप के काटने जैसे मामलों में त्वरित उपचार बेहद जरूरी होता है, क्योंकि कुछ ही मिनटों की देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सांप के काटने के बाद तुरंत एंटी-वेनम इंजेक्शन देना सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा, मरीज को जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए और प्राथमिक उपचार के नियमों का पालन करना चाहिए।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे सरकारी अस्पताल आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं? क्या वहां पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद है?
स्थानीय लोगों ने भी इस घटना को लेकर नाराजगी जताई है और प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही, अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
कुल मिलाकर, भागलपुर की यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है। अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो ऐसी घटनाएं आगे भी दोहराई जा सकती हैं।
अब सभी की नजर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर है कि वे इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।


