
बिहार शरीफ (नालंदा)। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) की परीक्षा में एक बार फिर सॉल्वर गैंग और परीक्षा माफियाओं की सक्रियता ने सुरक्षा दावों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। रविवार, 19 अप्रैल 2026 को नालंदा जिले से धांधली का एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जहाँ रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आए। नालंदा के सोहसराय थाना क्षेत्र स्थित पीएल साहू प्लस टू उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर तकनीकी जांच के नाम पर तैनात बायोमेट्रिक एजेंसी के कर्मियों ने ही परीक्षा की शुचिता को तार-तार करने की कोशिश की। पुलिस ने इस मामले में आंसर-की (उत्तरों की पर्ची) के साथ एक महिला अभ्यर्थी और बायोमेट्रिक एजेंसी के दो तकनीकी कर्मियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और कड़े नियमों के बावजूद, परीक्षा माफिया अब ‘इनसाइडर’ यानी व्यवस्था के भीतर के लोगों के जरिए सेंधमारी करने की नई रणनीति पर काम कर रहे हैं।
तकनीकी धोखे की पटकथा: होलोग्राम के भीतर ‘पर्ची’ का खेल
शनिवार को आयोजित इस परीक्षा के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे, लेकिन सोहसराय स्थित केंद्र पर जो कुछ हुआ, उसने पुलिस और आयोग के अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। दरअसल, बायोमेट्रिक जांच की जिम्मेदारी जिस एजेंसी को सौंपी गई थी, उसी के कर्मचारी इस पूरी साजिश के सूत्रधार निकले। जांच अधिकारियों के अनुसार, बायोमेट्रिक मशीन के होलोग्राम के नीचे बहुत ही सफाई से उत्तरों की पर्ची (Answer Key) छिपाई गई थी।
नियम के मुताबिक, हर परीक्षार्थी को प्रवेश और सत्यापन के समय बायोमेट्रिक मशीन पर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होती है। इसी प्रक्रिया का लाभ उठाते हुए, जैसे ही चिन्हित महिला अभ्यर्थी सत्यापन के लिए पहुँची, तकनीकी कर्मियों ने बड़ी चालाकी से होलोग्राम के भीतर रखी पर्ची उसे थमा दी। हालांकि, परीक्षा केंद्र पर तैनात सतर्क अधिकारियों को कर्मियों और अभ्यर्थी के बीच हुई इस संदिग्ध गतिविधि पर संदेह हुआ। जब अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर महिला अभ्यर्थी की गहन तलाशी ली, तो उसके पास से उत्तरों वाली वह पर्ची बरामद हो गई। इसके बाद मौके पर ही हंगामा मच गया और अधिकारियों ने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी।
गिरफ्तारियों का ब्यौरा: व्यवस्था में ‘दीमक’ की तरह बैठे कर्मी
नालंदा पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए लोगों में पटना जिला के बहादुरपुर निवासी अभ्यर्थी श्वेता कुमारी शामिल है, जिसे तत्काल प्रभाव से परीक्षा से निष्कासित कर दिया गया है। वहीं, सबसे बड़ा खुलासा बायोमेट्रिक एजेंसी के कर्मियों को लेकर हुआ है। गिरफ्तार कर्मियों में नूरसराय थाना क्षेत्र का रहने वाला एजेंसी का सुपरवाइजर चंदन कुमार और ऑपरेटर राहुल कुमार शामिल हैं।
प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इन तकनीकी कर्मियों को इस विशेष कार्य के लिए ही इस केंद्र पर तैनात कराया गया था या फिर सॉल्वर गैंग ने उन्हें भारी रकम का लालच देकर अपनी ओर मिला लिया था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन कर्मियों को यह आंसर-की कहाँ से मिली और उनके मोबाइल चैट्स या कॉल रिकॉर्ड्स के जरिए इस गिरोह के मास्टरमाइंड तक कैसे पहुँचा जा सकता है। यह मामला केवल एक केंद्र का है या अन्य केंद्रों पर भी ऐसे ‘तकनीकी मददगार’ सक्रिय थे, यह अब जांच का बड़ा विषय बन गया है।
सवालों के घेरे में ‘सॉल्वर गैंग’: कहाँ से लीक हुए उत्तर?
इस धांधली के खुलासे के बाद सबसे गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि परीक्षा शुरू होने से पहले या उसके दौरान इन तकनीकी कर्मियों के पास सही उत्तरों की सूची कहाँ से आई? नालंदा पुलिस द्वारा जारी प्रेस बयान के अनुसार, केंद्राधीक्षक के आवेदन पर सोहसराय थाना में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है और तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया है।
पुलिस की जांच अब दो मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित है। पहला यह कि क्या प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो गया था जिसके आधार पर यह आंसर-की तैयार की गई? और दूसरा यह कि इस पूरी ‘सेटिंग’ के लिए कितने रुपयों का सौदा हुआ था? पुलिस को संदेह है कि इसके पीछे कोई बड़ा ‘सॉल्वर गैंग’ काम कर रहा है जो तकनीकी एजेंसियों के कर्मचारियों को निशाना बनाकर उन्हें लालच देता है। जांच टीम अब चंदन और राहुल के बैंक खातों और हालिया डिजिटल लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है ताकि पैसे के प्रवाह का पता लगाया जा सके।
आधी से अधिक कुर्सियां रहीं खाली: परीक्षार्थियों की बेरुखी का रहस्य
शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, नालंदा जिले के 15 केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में परीक्षार्थियों की उपस्थिति बेहद निराशाजनक रही। प्रथम पाली में कुल पंजीकृत 9,732 परीक्षार्थियों में से केवल 4,285 छात्र ही उपस्थित हुए, यानी आधे से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। दूसरी पाली में यह संख्या और गिरकर 4,250 रह गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के प्रति इतनी बड़ी संख्या में बेरुखी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। हाल के वर्षों में पेपर लीक और धांधली की खबरों ने छात्रों के आत्मविश्वास को हिला कर रख दिया है। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि परीक्षा के कड़े नियमों और बायोमेट्रिक जैसी व्यवस्थाओं के डर से ‘फर्जी’ या ‘बिना तैयारी’ वाले परीक्षार्थी केंद्र तक नहीं पहुँचे। हालांकि, जिले के अन्य 14 केंद्रों पर परीक्षा शांतिपूर्ण रही, लेकिन सोहसराय केंद्र की इस घटना ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता पर सवालिया निशान जरूर लगा दिया है।
आयोग की साख और भविष्य की चुनौतियां
BPSC AEDO परीक्षा 2026 में हुई इस गड़बड़ी ने आयोग के सामने एक नई चुनौती पेश कर दी है। अब तक प्रशासन का ध्यान परीक्षार्थियों की तलाशी और जैमर लगाने पर होता था, लेकिन अब तकनीकी वेंडरों और एजेंसियों की विश्वसनीयता की जांच करना भी अनिवार्य हो गया है। अगर बायोमेट्रिक और अन्य डिजिटल उपकरणों का प्रबंधन करने वाले कर्मचारी ही भ्रष्टाचार में शामिल हो जाएंगे, तो पारदर्शी परीक्षा का सपना कभी पूरा नहीं हो पाएगा।
नालंदा के जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के० शर्मा ने स्पष्ट किया है कि इस गिरोह के तार जहाँ कहीं भी जुड़े होंगे, उन्हें बेनकाब किया जाएगा। अभ्यर्थियों में इस बात को लेकर काफी आक्रोश है कि मेहनत करने वाले छात्र बाहर रह जाते हैं और पैसे के दम पर ‘सेटिंग’ करने वाले लोग व्यवस्था में सेंध लगा देते हैं। फिलहाल, श्वेता कुमारी का भविष्य अधर में है और चंदन व राहुल सलाखों के पीछे अपने गुनाहों का हिसाब दे रहे हैं। आने वाले दिनों में नालंदा पुलिस के खुलासे यह तय करेंगे कि बिहार में परीक्षा माफियाओं की जड़ें कितनी गहरी हैं और उन्हें उखाड़ने के लिए प्रशासन के पास क्या ठोस योजना है।


