
पटना। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक महापर्वों में से एक ‘भारत की जनगणना’ अब अपने नए और आधुनिक अवतार में बिहार की धरती पर दस्तक दे चुकी है। तकनीक और डेटा की सटीकता के इस नए युग में ‘जनगणना–2027’ केवल कागजों का ढेर नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य की रूपरेखा तैयार करने वाला एक डिजिटल दस्तावेज बनने जा रहा है। रविवार, 19 अप्रैल 2026 को बिहार की राजनीति के दिग्गज और उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इस अभियान की कमान संभालते हुए एक बड़ी मिसाल पेश की। उन्होंने पटना स्थित अपने आवास पर स्वयं अपनी ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) की प्रक्रिया पूरी की और यह संदेश दिया कि आधुनिक बिहार अब हर डिजिटल पहल में देश का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। यह पहला मौका है जब देश की जनगणना में नागरिकों को यह शक्ति दी गई है कि वे प्रगणक (Enumerator) के घर आने का इंतजार किए बिना खुद अपनी और अपने परिवार की जानकारी सरकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकें। उपमुख्यमंत्री की इस सक्रियता ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच एक नई चेतना का संचार किया है।
लालटेन के युग से ‘डिजिटल क्लिक’ तक का सफर
बिहार में जनगणना की यादें अक्सर उन प्रगणकों से जुड़ी रही हैं जो हाथ में मोटे रजिस्टर और पेन लेकर घर-घर जाते थे और घंटों बैठकर परिवार का ब्यौरा दर्ज करते थे। लेकिन 2027 की जनगणना इस पारंपरिक छवि को पूरी तरह बदलने वाली है। उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने स्व-गणना करने के बाद स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था जनसहभागिता को सशक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने कहा कि अब नागरिक केवल एक ‘क्लिक’ के माध्यम से अपनी पहचान और अपने परिवार की स्थिति को सरकार के डेटाबेस में सुरक्षित तरीके से दर्ज कर सकते हैं।
इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसकी समयसीमा है। बिहार में स्व-गणना की यह सुविधा 17 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होकर 01 मई 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इसके ठीक बाद, 02 मई 2026 से जनगणना का प्रथम चरण पूरे राज्य में आधिकारिक रूप से शुरू होगा, जिसमें प्रगणक फील्ड में उतरेंगे। उपमुख्यमंत्री का खुद इस प्रक्रिया में शामिल होना यह दर्शाता है कि सरकार इस अभियान को कितनी गंभीरता से ले रही है। यह केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं है, बल्कि बिहार को डिजिटल मैप पर और अधिक स्पष्टता से स्थापित करने की कोशिश है।
स्व-गणना की प्रक्रिया: सादगी, सुरक्षा और सटीकता का मेल
उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने राज्यवासियों को संबोधित करते हुए इस पूरी प्रक्रिया की सरलता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कोई भी नागरिक आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in पर जाकर अपना विवरण भर सकता है। इसके लिए किसी विशेष तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं है; एक साधारण स्मार्टफोन, लैपटॉप या कंप्यूटर के माध्यम से इसे पूरा किया जा सकता है।
पंजीकरण की प्रक्रिया को बेहद सुरक्षित बनाया गया है। परिवार का मुखिया अपने मोबाइल नंबर और ओटीपी के माध्यम से पोर्टल पर लॉग-इन कर सकता है। इसके बाद परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा, व्यवसाय और अन्य बुनियादी जानकारियां दर्ज करनी होती हैं। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जैसे ही कोई व्यक्ति अपनी स्व-गणना पूरी करता है, उसे एक विशिष्ट Self-Enumeration ID (SE ID) प्राप्त होती है। यह आईडी इस पूरी प्रक्रिया की ‘कुंजी’ है। जब सरकारी प्रगणक सत्यापन के लिए घर पहुँचेंगे, तो नागरिकों को केवल यह आईडी उन्हें दिखानी होगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आंकड़ों में मानवीय त्रुटि की संभावना भी शून्य हो जाएगी।
विकास की नई पटकथा लिखेगा सटीक डेटा
जनगणना को लेकर अक्सर आम लोगों के मन में यह सवाल होता है कि इससे उन्हें क्या लाभ होगा। उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इस शंका का समाधान करते हुए विकास की एक बड़ी तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार के पास हर टोले, हर मुहल्ले और हर घर की सटीक जानकारी नहीं होगी, तब तक जनकल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन संभव नहीं है।
डिजिटल जनगणना से प्राप्त आंकड़े यह तय करेंगे कि आने वाले समय में बिहार के किस इलाके में कितने नए स्कूल चाहिए, कहाँ अस्पतालों की आवश्यकता है और किन क्षेत्रों में बिजली और पानी की बुनियादी सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ करना है। सामाजिक सुरक्षा की पेंशन हो या राशन कार्ड की व्यवस्था, हर डेटा इस डिजिटल जनगणना के माध्यम से परिष्कृत होगा। बिजेंद्र प्रसाद यादव ने जोर देकर कहा कि गलत या अधूरे आंकड़ों के कारण कई बार पात्र लोग योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं। स्व-गणना के माध्यम से नागरिक स्वयं यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनकी जानकारी पूरी तरह सही और पारदर्शी है।
बिहार को अग्रणी राज्य बनाने का आह्वान
उपमुख्यमंत्री ने बिहार की जनता की मेधा और उनकी तकनीकी सजगता पर भरोसा जताते हुए अपील की कि बिहार को डिजिटल जनगणना के मामले में देश का नंबर-वन राज्य बनाना है। उन्होंने कहा कि बिहार के युवा आज दुनिया भर में अपनी तकनीकी क्षमता का लोहा मनवा रहे हैं, ऐसे में अपने घर की जनगणना को डिजिटल रूप में पूरा करना उनके लिए गौरव का विषय होना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से शिक्षित युवाओं और पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की कि वे अपने आस-पास के उन लोगों की मदद करें जो तकनीक के इस्तेमाल में थोड़े हिचकिचा रहे हैं। स्व-गणना का यह 15 दिवसीय अवसर बिहार के लिए एक ‘डिजिटल ट्रायल’ की तरह है। यदि बड़ी संख्या में लोग स्व-गणना करते हैं, तो इससे प्रशासनिक मशीनरी पर बोझ कम होगा और डेटा की विश्वसनीयता बढ़ेगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की चमक अब अंतरिक्ष से भी दिखती है, और अब हमें अपनी डिजिटल उपस्थिति को भी उतना ही चमकदार बनाना है।
प्रशासनिक मुस्तैदी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
जनगणना–2027 के इस प्रथम चरण को लेकर बिहार का प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। उपमुख्यमंत्री ने भवन निर्माण विभाग और सांख्यिकी विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पोर्टल की कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए, इसे सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, साइबर सुरक्षा को लेकर भी कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि नागरिकों का डेटा पूरी तरह गोपनीय रहे।
बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि प्रगणकों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी अंतिम दौर में है। जो लोग स्व-गणना नहीं कर पाएंगे, उनके लिए प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे ही, लेकिन स्व-गणना करने वाले परिवारों का सत्यापन प्राथमिकता के आधार पर और बहुत ही कम समय में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय गौरव का विषय है और इसमें हर बिहारी को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
निष्कर्ष: उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला
19 अप्रैल 2026 की यह दोपहर बिहार के लिए एक नए संकल्प की दोपहर है। उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का स्वयं स्व-गणना करना यह साबित करता है कि नेतृत्व जब खुद उदाहरण पेश करता है, तो जनता का विश्वास और अधिक दृढ़ होता है। जनगणना–2027 केवल संख्या गिनने का काम नहीं है, बल्कि यह बिहार की शक्ति, उसकी जरूरतों और उसकी आकांक्षाओं को मापने का एक वैज्ञानिक पैमाना है।
अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ता बिहार अब अपने आंकड़ों को भी ‘रोशन’ कर रहा है। स्व-गणना की यह सुविधा 01 मई तक उपलब्ध है, और उम्मीद की जा रही है कि राज्य के करोड़ों नागरिक इस अवसर का लाभ उठाकर बिहार को डिजिटल इंडिया के मानचित्र पर एक ‘मॉडल राज्य’ के रूप में स्थापित करेंगे। उपमुख्यमंत्री की यह अपील अब राज्य के हर कोने में गूँज रही है, और यह तय है कि 2 मई से शुरू होने वाली आधिकारिक गणना से पहले ही बिहार स्व-गणना के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर चुका होगा।


