
जमुई। बिहार के जमुई जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने समाज के सुरक्षा दावों और मानवीय संवेदनाओं को गहरे जख्म दिए हैं। झाझा थाना क्षेत्र के एक गांव में शिक्षा के आंगन से जुड़ी एक मासूम बच्ची को हवस का शिकार बनाया गया है। शनिवार की सुबह जब एक 8 वर्षीय बच्ची अपने उज्ज्वल भविष्य का सपना लेकर मदरसे में तालीम हासिल करने गई थी, उसे क्या पता था कि गांव का ही एक परिचित उसके लिए काल बनकर खड़ा है। आरोपी ने न केवल मासूमियत को तार-तार किया, बल्कि दरिंदगी की सारी हदें पार करते हुए बच्ची को उस वक्त तक प्रताड़ित किया जब तक वह बेहोश नहीं हो गई। इसके बाद वह उसे मरणासन्न स्थिति में छोड़कर फरार हो गया। 19 अप्रैल 2026 की यह रिपोर्ट जमुई पुलिस की सक्रियता और समाज के भीतर छिपे ‘भेड़ियों’ की उस मानसिकता को उजागर करती है, जो अब पवित्र संस्थानों के आसपास भी शिकार तलाश रहे हैं। फिलहाल, बच्ची की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है और पुलिस की कई टीमें आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
मदरसा परिसर और वह काली सुबह: कैसे हुई वारदात
झाझा थाना क्षेत्र के इस गांव में शनिवार की सुबह अन्य दिनों की तरह ही शांत थी। सुबह करीब 6 बजे 8 साल की यह मासूम बच्ची अपने घर से तैयार होकर पास के ही मदरसे में पढ़ने के लिए निकली थी। परिवार को भरोसा था कि उनकी बेटी सुरक्षित जगह पर जा रही है। लेकिन गांव का ही रहने वाला इकबाल शाह पहले से ही किसी नापाक साजिश को अंजाम देने की फिराक में था। जानकारी के अनुसार, जब बच्ची मदरसा परिसर के पास पहुँची या वहां पढ़ाई कर रही थी, तभी इकबाल शाह ने उसे बहला-फुसलाकर अपने विश्वास में लिया।
आरोपी उसे मदरसा के बिल्कुल बगल में स्थित एक सुनसान खेत में ले गया। वहां उसने मासूम के साथ नृशंस तरीके से दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। बच्ची के विरोध और उसकी चीख-पुकार को आरोपी ने अपनी हैवानियत के शोर में दबा दिया। शारीरिक पीड़ा और सदमे के कारण मासूम बच्ची वहीं खेत में ही बेहोश हो गई। आरोपी इकबाल शाह, यह देखकर कि बच्ची अब कोई हलचल नहीं कर रही है, उसे उसी हाल में झाड़ियों के बीच छोड़कर मौके से फरार हो गया। यह घटना न केवल एक जघन्य अपराध है, बल्कि यह उन सुरक्षा इंतजामों पर भी बड़ा सवालिया निशान है जहाँ बच्चों को शिक्षा दी जाती है।
बेहोशी से घर तक का ‘लहूलुहान’ सफर: माँ के सामने आया खौफनाक सच
खेत में काफी देर तक बेहोश रहने के बाद जब मासूम को होश आया, तो उसके लिए वह पल किसी प्रलय से कम नहीं था। होश में आने पर उसने खुद को खून से लथपथ और गंभीर शारीरिक कष्ट में पाया। महज 8 साल की उम्र, जहाँ बच्चों को चोट लगने पर माँ की गोद याद आती है, वहां वह नन्ही जान अकेले उस वीरान खेत में अपनी जिंदगी और अस्मत के टुकड़ों को समेट रही थी। वह किसी तरह लड़खड़ाते कदमों से चलते हुए अपने घर पहुँची।
घर के दरवाजे पर अपनी बेटी को इस हाल में देख माँ के पैरों तले जमीन खिसक गई। खून से सने कपड़े और मासूम के चेहरे पर फैला वह खौफ यह बताने के लिए काफी था कि उसके साथ कुछ बहुत बुरा हुआ है। सिसकते हुए बच्ची ने अपनी माँ को पूरी आपबीती सुनाई और गांव के ही इकबाल शाह का नाम लिया। यह सुनकर परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में आक्रोश की लहर दौड़ गई। बिना किसी देरी के परिजनों ने पुलिस को सूचना दी और बच्ची को तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल में संघर्ष और पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस’ कार्रवाई
बच्ची की नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए अस्पताल में भर्ती किया है। अत्यधिक रक्तस्राव और आंतरिक चोटों के कारण उसकी स्थिति अभी भी स्थिर नहीं बताई जा रही है। इस बीच, झाझा थानाध्यक्ष लाल बहादुर सिंह दल-बल के साथ पीड़ित परिवार के पास पहुँचे। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
थानाध्यक्ष ने बताया कि पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करा लिया गया है और उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। पुलिस ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में बच्ची का बयान दर्ज कराया है, जिसे न्यायालय में मुख्य साक्ष्य के तौर पर पेश किया जाएगा। थानाध्यक्ष ने कड़े शब्दों में कहा है कि “यह एक अत्यंत जघन्य अपराध है और अपराधी चाहे पाताल में भी छिपा हो, उसे ढूंढ निकाला जाएगा।” पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
फरार आरोपी इकबाल शाह: पुलिस की छापेमारी और तकनीकी सर्विलांस
वारदात को अंजाम देने के बाद से ही आरोपी इकबाल शाह अपने घर से फरार है। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि उसने घटना के तुरंत बाद गांव छोड़ दिया था। जमुई पुलिस की विशेष टीम उसकी लोकेशन ट्रेस करने के लिए तकनीकी सर्विलांस और मोबाइल टावर डंप का सहारा ले रही है। इकबाल शाह के रिश्तेदारों और करीबियों के यहां भी पुलिस ने छापेमारी की है ताकि उसका कोई सुराग मिल सके।
गांव के लोगों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि उनके बीच रहने वाला व्यक्ति इतना बड़ा दरिंदा हो सकता है। पुलिस ने ग्रामीणों से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की उत्तेजना में न आएं और कानून को अपना काम करने दें। झाझा पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि 24 से 48 घंटों के भीतर आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा। जिले के वरीय पुलिस अधिकारियों ने भी इस मामले में थानाध्यक्ष को पल-पल की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
मदरसा और शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा पर उठते सवाल
इस घटना ने एक बार फिर बिहार में शिक्षण संस्थानों, विशेषकर धार्मिक और निजी संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। मदरसे जैसे स्थान, जहाँ बच्चों को नैतिकता और धर्म की शिक्षा दी जाती है, वहां के बिल्कुल नजदीक ऐसी वारदात होना यह दर्शाता है कि अपराधी अब कहीं भी सुरक्षित नहीं रहने दे रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि स्कूलों और मदरसों के आसपास गश्त बढ़ाई जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाए।
बाल अधिकार विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं का बच्चों के कोमल मन पर जो असर पड़ता है, वह ताउम्र नहीं मिटता। बच्ची को शारीरिक उपचार के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श (Counselling) की भी सख्त जरूरत होगी। समाज को भी यह सोचना होगा कि आखिर क्यों हमारे गाँवों में ऐसी विकृत मानसिकता के लोग बेखौफ घूम रहे हैं। जमुई की यह घटना एक अलार्म की तरह है, जो प्रशासन और अभिभावकों, दोनों को अपनी चौकसी बढ़ाने के लिए मजबूर करती है।


