बापू टावर: चंपारण के सत्याग्रह से ‘मोहन से महात्मा’ तक का सफर; सम्राट चौधरी ने किया गर्दनीबाग स्थित गांधी विरासत का दीदार

पटना। बिहार की राजधानी पटना के गर्दनीबाग में नवनिर्मित बापू टावर अब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की स्थायी विरासत और उनके आदर्शों का जीवंत प्रमाण बन गया है। रविवार, 19 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस भव्य संरचना का विस्तृत भ्रमण किया। यह टावर केवल एक ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है, बल्कि यह गांधी जी के उन विचारों का प्रतिबिंब है जिन्होंने बिहार की मिट्टी से पूरे देश को स्वतंत्रता का मार्ग दिखाया था। मुख्यमंत्री ने टावर के भूतल से लेकर पांचवें तल तक की विभिन्न दीर्घाओं का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बापू टावर बहुत ही प्रभावशाली बना है और यह न केवल बिहार, बल्कि देश-दुनिया से आने वाले पर्यटकों के लिए गांधी दर्शन का सबसे बड़ा केंद्र बनेगा। निरीक्षण के दौरान सम्राट चौधरी ने गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और परिसर की व्यवस्थाओं के संबंध में अधिकारियों को कड़े निर्देश भी दिए।

102 फीट ऊंचा ऐतिहासिक स्मारक: आधुनिकता और आस्था का संगम

​गर्दनीबाग में बना यह बापू टावर अपनी बनावट में अनूठा है। इसकी ऊंचाई 102 फीट है और यह जी प्लस सिक्स (G+6) की तर्ज पर निर्मित किया गया है। भवन के दो मुख्य भाग हैं—एक आयताकार भवन और दूसरा शंकुकार भवन। शंकुकार भवन की बाहरी सतह पर महात्मा गांधी की आकृति उकेरी गई है, जो इसे दूर से ही एक भव्य पहचान देती है। इसमें पांच क्रमिक रैम्प बनाए गए हैं, जो दर्शकों को गांधी जी के जीवन के अलग-अलग कालखंडों की यात्रा कराते हैं।

​भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि ने निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री को बताया कि टावर के भीतर गांधी जी के जीवन से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को म्यूरल, कटआउट और अत्याधुनिक स्क्रीन प्रोजेक्टर्स के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। सम्राट चौधरी ने इन डिजिटल प्रदर्शों की तकनीक को सराहा और कहा कि यह नई पीढ़ी के लिए इतिहास को समझने का एक आकर्षक जरिया है।

पांच रैम्प: गांधीवादी विचारधारा की सीढ़ियां

​बापू टावर का शंकुकार हिस्सा दर्शकों को एक ऐतिहासिक यात्रा पर ले जाता है। यहां पांच अलग-अलग रैम्प बनाए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक एक विशेष दौर की कहानी कहता है:

  • प्रथम रैम्प (पांचवां से चौथा तल): यहां चम्पारण सत्याग्रह की पूरी गाथा को जीवंत किया गया है। गांधी जी का बिहार आगमन और नील की खेती के खिलाफ उनके संघर्ष को बारीकी से दिखाया गया है।
  • द्वितीय रैम्प (चौथा से तीसरा तल): यह हिस्सा द्वितीय विश्व युद्ध और उसके भारत पर प्रभाव को दर्शाता है। साथ ही, भारत छोड़ो आंदोलन में बिहार के क्रांतिकारियों और गांधी जी की भूमिका को यहां प्रमुखता दी गई है।
  • तृतीय रैम्प (तीसरा से दूसरा तल): इस तल पर गांधी-जिन्ना वार्ता, शिमला सम्मेलन और 1946 के चुनाव जैसी राजनीतिक घटनाओं का विवरण है। साथ ही कलकत्ता दंगे और नोआखली की शांति यात्रा के दौरान गांधी जी के कार्यों को रेखांकित किया गया है।
  • चतुर्थ रैम्प (दूसरा से पहला तल): यहां बिहार में गांधी जी की विभिन्न प्रार्थना सभाएं, माउंटबेटन के साथ उनकी मुलाकात और देश विभाजन की बातचीत के दौरान उनके संघर्ष को प्रदर्शित किया गया है।
  • पंचम रैम्प (पहला तल से भूतल): यह हिस्सा बापू को एक प्रेरणा स्रोत के रूप में स्थापित करता है। यहां उनके आदर्शों पर आधारित शपथ लेने हेतु विशेष प्रदर्श लगाए गए हैं।

आयताकार भवन और तीन प्रमुख प्रदर्श दीर्घाएं

​टावर के आयताकार भाग में तीन विशेष गैलरी बनाई गई हैं। पहली गैलरी गांधी जी के लंदन और दक्षिण अफ्रीका प्रवास से लेकर भारत वापसी की कहानी कहती है। दूसरी गैलरी उनके रचनात्मक कार्यक्रमों और स्वतंत्रता संग्राम के नेतृत्व पर आधारित है। वहीं, तीसरी गैलरी विशेष रूप से चम्पारण शताब्दी समारोह और बिहार सरकार द्वारा बापू के विचारों पर आधारित योजनाओं को समर्पित है।

​इस गैलरी में गांधी दर्शन पर राष्ट्रीय विमर्श, स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान और ‘बापू आपके द्वार’ जैसे अभियानों की जानकारी संकलित है। इसके अलावा, बिहार की सामाजिक क्रांतियां जैसे—पूर्ण नशाबंदी, बाल विवाह निषेध, दहेज प्रथा उन्मूलन और महिला सशक्तिकरण के अभियानों को भी यहां प्रमुखता से दिखाया गया है। मुख्यमंत्री ने इन प्रदर्शों का अवलोकन करते हुए कहा कि बिहार में बापू के आदर्शों को आज भी शासन की नीतियों के माध्यम से जीवित रखा गया है।

शिक्षा और पर्यटन का ‘इंटीग्रेटेड रूट’

​सम्राट चौधरी ने निरीक्षण के दौरान शिक्षा विभाग और पर्यटन विभाग के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि स्कूलों के शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम में बापू टावर को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बापू टावर, बिहार संग्रहालय, पटना म्यूजियम और साइंस सिटी का एक संयुक्त रूट चार्ट बनाया जाए ताकि स्कूली बच्चे एक ही यात्रा में बिहार के इतिहास और आधुनिक प्रगति को समझ सकें।

​उन्होंने भवन निर्माण विभाग के सचिव को यह भी निर्देश दिया कि पर्यटन और कला-संस्कृति विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के उपाय किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बापू टावर में स्कूली बच्चों और समूह में आने वाले लोगों के लिए निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था सराहनीय है, इससे समाज के हर तबके के लोग बापू के आदर्शों से जुड़ सकेंगे।

डिजिटल नवाचार और ‘सत्याग्रह’ पत्रिका का विमोचन

​बापू टावर में आधुनिक तकनीक का भरपूर उपयोग किया गया है। मुख्यमंत्री ने ‘टर्न टेबल थियेटर’ (रोटेटिंग पर्दे) का जायजा लिया, जहां दर्शक बैठकर गांधी जी के जीवन पर आधारित फिल्में देख सकते हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई किताबों—’बापू की पाती’ और ‘मोहन से महात्मा’ के डिजिटल संस्करणों का भी अवलोकन किया।

​इसी अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘सत्याग्रह-बापू टावर का प्रकाशन’ पत्रिका का विमोचन किया। उन्होंने अधिकारियों को इसे पूरी तरह से डिजिटलाइज करने का निर्देश दिया ताकि दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति इंटरनेट के माध्यम से गांधी जी के विचारों और बिहार की इस गौरवशाली विरासत के बारे में जान सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि बापू के विचार शाश्वत हैं और उन्हें हर माध्यम से प्रसारित किया जाना चाहिए।

हरियाली और भविष्य की रूपरेखा

​निरीक्षण के अंत में सम्राट चौधरी ने बापू टावर परिसर और उसके आसपास के वातावरण को और अधिक सुंदर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परिसर में हरियाली (Greenery) को और अधिक विकसित किया जाए ताकि यहां आने वाले आगंतुकों को शांति और सुकून का वातावरण मिल सके। उन्होंने प्रेक्षागृह, अनुसंधान केंद्र और आगंतुक सुविधाओं का भी जायजा लिया और वहां की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने को कहा।

​इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, गृह विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी संजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी डॉ० त्यागराजन एस०एम०, वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के० शर्मा और बापू टावर के निदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। 102 फीट ऊंचा यह टावर अब पटना के क्षितिज पर गांधीवादी मूल्यों की ज्योति बिखेरने के लिए तैयार है, जो आने वाली पीढ़ियों को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता रहेगा।

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