सिर्फ यात्राएँ नहीं, स्वच्छ भविष्य का संकल्प: पूर्व रेलवे का स्वच्छता अभियान बना जनभागीदारी का प्रतीक

कोलकाता, भारतीय रेलवे के प्रमुख जोनों में शामिल पूर्व रेलवे इन दिनों स्वच्छता और जन-जागरूकता को लेकर एक व्यापक अभियान चला रहा है, जो केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में व्यवहारिक परिवर्तन लाने की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में उभर रहा है। स्वच्छ भारत, स्वच्छ रेल अभियान के तहत एक माह तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तीसरे दिन 17 अप्रैल को पूर्व रेलवे के विभिन्न मंडलों और जिलों में स्काउट्स और गाइड्स की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। इस पहल ने यह स्पष्ट कर दिया कि स्वच्छता केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सामूहिक संस्कार है, जिसे जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है।

पूर्व रेलवे भारत स्काउट्स एवं गाइड्स (ERBSG) के तत्वावधान में आयोजित इस अभियान में न केवल स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाई गई, बल्कि यात्रियों को सीधे जोड़कर उन्हें इस मिशन का सहभागी बनाने का प्रयास भी किया गया। आसनसोल जिले में इस अभियान का प्रभाव विशेष रूप से देखने को मिला, जहां 25 से अधिक स्काउट्स, गाइड्स, रोवर्स और रेंजर्स ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने ट्रेन संख्या 18184 बक्सर–टाटानगर एक्सप्रेस और 63518 आसनसोल–बर्धमान पैसेंजर में कोच-कोच जाकर यात्रियों से संवाद स्थापित किया। इस दौरान यात्रियों को कचरा डस्टबिन में डालने, प्लास्टिक का सीमित उपयोग करने और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया। यात्रियों ने इस पहल को गंभीरता से लिया और कई जगहों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया भी दी।

मालदा जिले में भी इसी प्रकार का अभियान चलाया गया, जहां ट्रेन संख्या 13033 अप हावड़ा–कटिहार एक्सप्रेस के माध्यम से यात्रियों को स्वच्छता का संदेश दिया गया। स्काउट्स और गाइड्स ने यात्रियों से अपील की कि वे रेलवे परिसरों को स्वच्छ बनाए रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं और कचरे का उचित निस्तारण करें। यह पहल केवल संदेश देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यात्रियों के साथ संवाद स्थापित कर उन्हें व्यवहारिक रूप से जागरूक करने का प्रयास किया गया।

सियालदह जिले के बैरकपुर समूह ने इस अभियान को और व्यापक रूप देते हुए स्टेशन परिसरों, रेलवे कॉलोनियों, खाद्य स्टॉलों और कार्यालय परिसरों में स्वच्छता संदेश का प्रचार-प्रसार किया। उनके प्रयासों ने यह साबित किया कि स्वच्छता केवल स्टेशन या ट्रेन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे आसपास के हर सार्वजनिक स्थान से जुड़ी हुई है। स्वच्छ परिवेश ही स्वस्थ जीवन की आधारशिला है—इस संदेश को उन्होंने प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाया।

कटवा में आयोजित कार्यक्रम इस अभियान का एक आकर्षक और प्रभावशाली उदाहरण रहा। यहां स्काउट्स और गाइड्स ने प्लेकार्ड्स और नारों के माध्यम से यात्रियों और स्थानीय नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। स्टेशन परिसर और लोकल ट्रेनों में चलाए गए इस अभियान ने लोगों को अनुशासन, जिम्मेदारी और नागरिक कर्तव्यों के प्रति सचेत किया। यह पहल दर्शाती है कि रचनात्मक तरीकों से भी बड़े सामाजिक संदेश दिए जा सकते हैं।

इसी क्रम में सेंट्रल जिले के घोलेशापुर समूह ने बीबीडी बाग रेलवे स्टेशन और माझेरहाट–हसनाबाद लोकल (30321) तथा बनगांव–माझेरहाट लोकल (30346) में यात्रियों के साथ संवाद स्थापित किया। उन्होंने स्वच्छता के साथ-साथ सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को भी बढ़ावा दिया। इस दौरान यात्रियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि रेलवे केवल एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि एक साझा सार्वजनिक संपत्ति है, जिसकी स्वच्छता और सुरक्षा की जिम्मेदारी हम सभी की है।

कांचरापाड़ा जिले में इस अभियान को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 55 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम के तहत पोस्टर अभियान, रोड रैली और नुक्कड़ नाटक जैसे रचनात्मक माध्यमों का उपयोग किया गया। कांचरापाड़ा रेलवे वर्कशॉप के समीप आयोजित नुक्कड़ नाटक ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया और स्वच्छता के महत्व को सरल और प्रभावी तरीके से समझाया। इसके बाद जिला प्रशिक्षण केंद्र में सफाई अभियान चलाकर कचरा एकत्रित किया गया और परिसर को स्वच्छ बनाया गया। यह पहल न केवल जागरूकता फैलाने में सफल रही, बल्कि लोगों को प्रत्यक्ष रूप से सफाई अभियान में शामिल करने का भी माध्यम बनी।

पूर्व रेलवे के विभिन्न मंडलों और जिलों में चल रहे इन कार्यक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब समाज सेवा, अनुशासन और जन-जागरूकता एक साथ मिलते हैं, तो सकारात्मक परिवर्तन अवश्य होता है। स्काउट्स और गाइड्स ने इस अभियान के माध्यम से न केवल स्वच्छता का संदेश दिया, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

यह अभियान केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि जनभागीदारी का एक सशक्त मॉडल बनता जा रहा है। इसमें युवाओं की भागीदारी, रचनात्मक गतिविधियों का उपयोग और सीधे संवाद की रणनीति इसे प्रभावी बना रही है। रेलवे जैसे विशाल नेटवर्क में इस प्रकार की पहलें न केवल यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाती हैं, बल्कि समाज में स्वच्छता के प्रति जागरूकता भी बढ़ाती हैं।

पूर्व रेलवे का यह प्रयास “स्वच्छ, हरित और सुंदर भारत” के व्यापक लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह अभियान यह संदेश देता है कि यदि हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे और छोटे-छोटे प्रयास करे, तो बड़ा परिवर्तन संभव है। आने वाले समय में ऐसे अभियानों के माध्यम से न केवल रेलवे परिसरों में स्वच्छता सुनिश्चित होगी, बल्कि देशभर में स्वच्छता के प्रति एक सकारात्मक वातावरण भी तैयार होगा।

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