
नवगछिया। मानवीय संवेदनाओं के पतन और प्रतिशोध की आग जब धधकती है, तो वह रिश्तों और मित्रता के हर मुखौटे को उतार फेंकती है। नवगछिया के पकड़ा गाँव में शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 की देर रात जो कुछ भी हुआ, उसने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पनप रहे ‘धोखे के अपराध’ की एक डरावनी तस्वीर भी पेश की। 35 वर्षीय कन्हैया राय, जो अपने घर में निश्चिंत होकर सो रहे थे, उन्हें यह भनक तक नहीं थी कि शादी के जिस भोज के लिए उन्हें नींद से जगाया जा रहा है, वह वास्तव में उनकी अंतिम यात्रा का आमंत्रण है। कन्हैया राय की पीट-पीटकर की गई इस जघन्य हत्या ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। अपराधियों ने न केवल जान ली, बल्कि साक्ष्य मिटाने और हत्या को ‘हादसे’ की शक्ल देने के लिए फिल्मी अंदाज में शव को ट्रैक्टर के आगे डाल दिया। यह रिपोर्ट उस खौफनाक रात की कड़वी हकीकत को बयां करती है, जहाँ ‘भोज’ के नाम पर एक इंसान की बलि चढ़ा दी गई।
नींद से मौत के सफर तक: वह कालजयी रात
पकड़ा गाँव निवासी कन्हैया राय, पिता स्व. गिरो राय, शुक्रवार की रात अपने परिवार के साथ भोजन करने के बाद गहरी नींद में सोए हुए थे। उनके घर में शांति थी, लेकिन बाहर प्रतिशोध की खिचड़ी पक रही थी। रात के लगभग एक बज रहे थे, जब गाँव के ही अरविंद राय, सुशील राय और शंकर राय उनके दरवाजे पर पहुँचे। इन लोगों ने कन्हैया को आवाज देकर जगाया और पड़ोस में हो रही एक शादी में भोज खाने चलने का आग्रह किया। कन्हैया की पत्नी, जाओ देवी ने इस अस्वाभाविक समय पर जाने से मना भी किया, लेकिन आरोपियों के अत्यधिक आग्रह और ‘तुरंत लौटने’ के वादे पर कन्हैया उनके साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकल गए।
यही वह क्षण था जब कन्हैया ने अंतिम बार अपने घर की चौखट लांघी थी। मोटरसाइकिल पर बैठते समय शंकर ने कन्हैया का मोबाइल भी अपने पास रख लिया, ताकि वह किसी से संपर्क न कर सकें। इसके बाद कन्हैया को गाँव के एक सुनसान हिस्से में ले जाया गया, जहाँ भोज के स्थान पर लाठियों और लोहे के रड से उनका स्वागत किया गया। आरोपियों ने उन पर तब तक प्रहार किया जब तक कि उनके शरीर की हलचल बंद नहीं हो गई। हत्या के बाद अपराधियों ने शव को एक ट्रैक्टर के सामने फेंक दिया ताकि सुबह जब ग्रामीण उसे देखें, तो इसे सड़क दुर्घटना माना जाए।
होली की रंजिश: माफी के बाद भी नहीं बुझी प्रतिशोध की आग
इस हत्याकांड की जड़ें पिछले महीने खेली गई होली के त्योहार में छिपी हैं। मृतक के भाई ललन राय के अनुसार, होली के दिन अरविंद राय और सुशील राय का कन्हैया के साथ किसी बात को लेकर तीखा झगड़ा हुआ था। उस समय आरोपियों ने सरेआम हथियार निकाल लिए थे और कन्हैया को जान से मारने की धमकी दी थी। उस वक्त मामला बढ़ता देख कन्हैया और उनके परिवार ने हाथ-पैर जोड़कर उन लोगों से माफी मांगी थी, जिसके बाद मामला शांत हुआ था।
लेकिन वह माफी केवल एक दिखावा थी। आरोपियों के मन में अपमान की वह टीस अभी भी सुलग रही थी। सुशील राय ने कथित तौर पर कन्हैया को चेतावनी दी थी कि “तुमने माँ लगाकर गाली दी है, तुम्हें छोड़ेंगे नहीं। एक केस लड़ेंगे लेकिन तुमको जान से मार देंगे।” यह बयान इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि यह हत्या आवेश में आकर नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई थी। आरोपियों ने एक महीने तक सही मौके का इंतजार किया और अंततः शादी के माहौल का फायदा उठाकर कन्हैया को ठिकाने लगा दिया।
जाओ देवी की पीड़ा: ‘एक केस लड़ेंगे, लेकिन छोड़ेंगे नहीं’
कन्हैया राय की पत्नी जाओ देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने पुलिस और मीडिया के सामने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि उनके पति को साजिश के तहत घर से ले जाया गया। “जब वे लोग आए, तो मेरा मन घबरा रहा था। मैंने कहा कि इतनी रात को कहाँ जा रहे हैं, लेकिन शंकर ने जोर दिया। जाने के बाद मैं लगातार उनके मोबाइल पर कॉल करती रही, लेकिन शंकर ने फोन नहीं उठाया।” जाओ देवी ने यह भी खुलासा किया कि कन्हैया के गले में सोने की एक चकती (पेंडेंट) थी, जिसे हत्यारों ने लूट लिया है।
मृतक के पुत्र किशन कुमार ने भी अपने पिता की हत्या को पूर्व नियोजित बताया। किशन के अनुसार, होली के बाद से ही उसके पिता डरे हुए थे और घर से कम निकलते थे, लेकिन पुराने दोस्तों पर भरोसा करना उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई। जाओ देवी ने संकल्प लेते हुए कहा कि वे न्याय के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगी। उनके शब्दों में— “उन्होंने मेरे सुहाग को छीन लिया, अब कानून उन्हें उनके किए की सजा देगा।”
पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
हत्या की सूचना मिलते ही नवगछिया पुलिस सक्रिय हुई और रात में ही घटनास्थल पर पहुँचकर शव को अपने कब्जे में लिया। पुलिस ने शव को तुरंत अनुमंडल अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने कन्हैया राय को ‘ब्रॉट डेड’ घोषित कर दिया। थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर रविशंकर सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में यह मामला स्पष्ट रूप से हत्या का लग रहा है। शव पर चोट के कई निशान पाए गए हैं, जो किसी भारी वस्तु से प्रहार के संकेत देते हैं।
जाओ देवी के लिखित बयान के आधार पर पुलिस ने अरविंद राय, सुशील राय और शंकर राय सहित कुल पाँच लोगों के खिलाफ हत्या की नामजद प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। थानाध्यक्ष ने आश्वासन दिया है कि अपराधियों ने चाहे कितनी भी चालाकी से इसे दुर्घटना साबित करने की कोशिश की हो, फॉरेंसिक साक्ष्य और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सच सामने लाकर रख देगी। ट्रैक्टर के एंगल की भी जांच की जा रही है कि क्या वह ट्रैक्टर भी आरोपियों का ही था या किसी और का उपयोग साक्ष्य मिटाने में किया गया।
ग्रामीण परिवेश में प्रतिशोध की संस्कृति और सुरक्षा पर सवाल
नवगछिया का पकड़ा गाँव फिलहाल शोक और तनाव में है। एक मामूली विवाद का परिणति इतनी वीभत्स हत्या में होना, ग्रामीण समाज के भीतर बढ़ती असहनशीलता को दर्शाता है। होली के झगड़े को लेकर दी गई धमकी को यदि पुलिस ने समय रहते गंभीरता से लिया होता या परिवार ने सुरक्षा की गुहार लगाई होती, तो शायद कन्हैया आज जीवित होते। यह घटना यह भी उजागर करती है कि अपराधी अब सीधे मुठभेड़ के बजाय ‘धोखे से बुलाकर’ हत्या करने की रणनीति अपना रहे हैं, ताकि भीड़ या गवाहों का सामना न करना पड़े।
सोने की चकती की लूट यह भी संकेत देती है कि इस हत्या के पीछे केवल रंजिश नहीं, बल्कि लूट का भी इरादा हो सकता है। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों का कोई पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। गाँव के लोग दबी जुबान में कह रहे हैं कि इन आरोपियों का इलाके में दबदबा था और वे अक्सर छोटी-छोटी बातों पर लोगों को डराते-धमकाते थे।
निष्कर्ष के बिना: न्याय की प्रतीक्षा में पकड़ा गाँव
19 अप्रैल 2026 की यह दोपहर पकड़ा गाँव के लिए बहुत भारी है। कन्हैया राय का पार्थिव शरीर अब पंचतत्व में विलीन होने की राह पर है, लेकिन पीछे छोड़ गया है एक बेसहारा पत्नी, अनाथ बच्चे और न्याय के लिए तड़पता एक भाई। यह हत्याकांड केवल कन्हैया राय की मौत नहीं है, बल्कि उस भरोसे की भी हत्या है जो एक ग्रामीण अपने पड़ोसी और दोस्त पर करता है।
पुलिस की सक्रियता और आरोपियों की गिरफ्तारी ही इस पीड़ित परिवार को कुछ हद तक सांत्वना दे सकती है। बिहार में बढ़ते अपराध के ग्राफ के बीच नवगछिया की यह घटना एक बार फिर प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कैसे ‘भोज’ जैसा पवित्र शब्द एक खूनी साजिश का कवर बन गया। अब सबकी निगाहें पुलिस की चार्जशीट और अदालत के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि ‘एक केस लड़ेंगे, लेकिन छोड़ेंगे नहीं’ कहने वाले अपराधियों के लिए कानून के पास क्या जवाब है।


