
कटिहार/दिल्ली। बिहार का सीमावर्ती जिला कटिहार एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और एटीएस (ATS) की एक संयुक्त टीम ने एक बड़े आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए कटिहार के दो युवकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार संदिग्धों की पहचान मोहम्मद सोहेल और शेख इमरान के रूप में हुई है। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि ये युवक न केवल आतंकी गतिविधियों में संलिप्त थे, बल्कि देश के सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों—अयोध्या के राम मंदिर, भारतीय संसद भवन और सेना के रणनीतिक अड्डों पर आत्मघाती हमलों की योजना बना रहे थे। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि सोहेल ‘रिमोट कंट्रोल खिलौना कार’ के जरिए आईईडी (IED) ब्लास्ट करने की तकनीक विकसित कर रहा था। कटिहार जिले के मनिहारी थाना क्षेत्र से जुड़े इस ‘आतंकी कनेक्शन’ ने स्थानीय पुलिस और खुफिया महकमे के होश उड़ा दिए हैं। 18 अप्रैल 2026 की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि सीमांचल के इलाकों में स्लीपर सेल्स (Sleeper Cells) एक बार फिर सक्रिय होने की कोशिश कर रहे हैं।
10 दिनों तक मनिहारी में चली ‘गुप्त रेकी’ और सोहेल की गिरफ्तारी
इस पूरे ऑपरेशन की पटकथा दिल्ली में लिखी गई थी, लेकिन इसके तार कटिहार के मनिहारी से जुड़े थे। जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की एक टीम पिछले 10 दिनों से मनिहारी थाना क्षेत्र के नवाबगंज बालू टोला और आसपास के इलाकों में गुप्त रूप से डेरा डाले हुए थी। सादे लिबास में आए अधिकारियों ने संदिग्धों की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी। जांच में पता चला कि सोहेल सोशल मीडिया के माध्यम से संदिग्ध विदेशी संगठनों के संपर्क में था और युवाओं को भड़काने का काम कर रहा था।
सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने सोहेल को पकड़ने के लिए एक जाल बुना। उसे किसी बहाने से 14 अप्रैल को दिल्ली बुलाया गया। सोहेल जैसे ही दिल्ली की सीमा में दाखिल हुआ, पहले से तैनात स्पेशल सेल की टीम ने उसे दबोच लिया। इसके बाद उससे हुई कड़ी पूछताछ के आधार पर शेख इमरान और अन्य तीन संदिग्धों को भी अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि सोहेल विस्फोटक बनाने और हथियारों को असेंबल करने में माहिर है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को दोगुना कर दिया है।
रिमोट कंट्रोल कार बम: आतंक का नया और खतरनाक तरीका
सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती सोहेल द्वारा तैयार की जा रही ‘टेक्नोलॉजी’ है। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि सोहेल और उसके साथी एक रिमोट कंट्रोल खिलौना कार के भीतर आईईडी (IED) फिट करने की कोशिश कर रहे थे। यह तकनीक भीड़भाड़ वाले इलाकों में बिना किसी संदेह के विस्फोटक पहुँचाने के लिए इस्तेमाल की जानी थी। रिमोट से चलने वाली इन छोटी कारों के जरिए किसी भी महत्वपूर्ण इमारत या सैन्य ठिकाने के भीतर घुसपैठ करना आसान हो सकता था।
सोहेल की इस ‘विशेषज्ञता’ ने यह साबित कर दिया है कि आतंकी समूह अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर तकनीक आधारित हमलों की ओर बढ़ रहे हैं। वह इंटरनेट और डार्क वेब के माध्यम से बम बनाने की विधि सीख रहा था। पुलिस ने उसके पास से कई डिजिटल साक्ष्य और सर्किट डायग्राम बरामद किए हैं, जो उसकी खतरनाक मंशा की पुष्टि करते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते उसे गिरफ्तार नहीं किया जाता, तो देश को एक बड़े जान-माल के नुकसान का सामना करना पड़ सकता था।
निशाने पर थे राम मंदिर और संसद भवन
गिरफ्तार आतंकियों से हुई शुरुआती पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। इन संदिग्धों के निशाने पर अयोध्या का नवनिर्मित राम मंदिर, देश का संसद भवन और कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने थे। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, ये आरोपी किसी बड़े राष्ट्रीय पर्व या महत्वपूर्ण आयोजन के दौरान इन स्थानों को निशाना बनाना चाहते थे ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी जा सके।
राम मंदिर जैसे संवेदनशील स्थान की रेकी और वहां हमले की प्लानिंग करना इस बात का संकेत है कि ये आतंकी देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की भी फिराक में थे। संसद भवन और सैन्य ठिकानों को टारगेट करना सीधे तौर पर देश की संप्रभुता पर हमला करने की साजिश थी। सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या उनके पास इन ठिकानों के कोई नक्शे या आंतरिक जानकारी मौजूद थी और क्या विभाग के भीतर से कोई उन्हें मदद पहुँचा रहा था।
सोशल मीडिया का जाल और ‘डिजिटल’ फंड कलेक्शन
मोहम्मद सोहेल केवल विस्फोटक बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह ‘डिजिटल’ तरीके से फंड जुटाने और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने में भी सक्रिय था। जांच में पाया गया कि उसने टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर कई गुप्त ग्रुप बना रखे थे, जहाँ वह युवाओं को भड़काऊ वीडियो और साहित्य साझा करता था। इन ग्रुप्स के जरिए वह ऐसे लड़कों की तलाश करता था जो ‘जिहाद’ के नाम पर आत्मघाती हमलों के लिए तैयार हो सकें।
पैसे की उगाही के लिए सोहेल ने एक आधुनिक तरीका अपनाया था। वह सोशल मीडिया पर क्यूआर कोड (QR Code) और बैंक अकाउंट नंबर साझा करता था, जिसमें देश और विदेश से ‘दान’ के नाम पर पैसे मंगाए जाते थे। इस फंड का इस्तेमाल विस्फोटक सामग्री खरीदने और नेटवर्क विस्तार के लिए किया जाना था। सुरक्षा एजेंसियां अब उन सभी बैंक खातों की जांच कर रही हैं जिनसे सोहेल को पैसे भेजे गए थे। यह अंदेशा जताया जा रहा है कि इसके पीछे कोई विदेशी हेंडलर (Handler) हो सकता है जो सीमा पार से इस पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित कर रहा था।
स्थानीय पुलिस की अनभिज्ञता: कटिहार एसपी का बयान
इतने बड़े ऑपरेशन और गिरफ्तारी के बावजूद कटिहार जिला पुलिस का इस मामले में अनजान होना कई सवाल खड़े करता है। दिल्ली से आई टीम ने जिस तरह से 10 दिनों तक मनिहारी में रेकी की और फिर सोहेल को दिल्ली बुलाकर गिरफ्तार किया, उसकी कोई आधिकारिक सूचना स्थानीय पुलिस के पास नहीं थी। कटिहार पुलिस अधीक्षक (SP) शिखर चौधरी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि दिल्ली की किसी टीम के कटिहार आने या यहाँ से किसी की गिरफ्तारी की उन्हें कोई आधिकारिक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
हालांकि, यह अक्सर देखा गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों में केंद्रीय एजेंसियां स्थानीय स्तर पर सूचना लीक होने के डर से ‘गोपनीयता’ बरतती हैं। मनिहारी के नवाबगंज बालू टोला में अब सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग दहशत में हैं। सोहेल के परिवार और पड़ोसियों से भी पूछताछ की जा सकती है ताकि यह पता चल सके कि उसे स्थानीय स्तर पर कौन संरक्षण दे रहा था।
सीमांचल में स्लीपर सेल्स की सक्रियता और चुनौतियां
कटिहार, पूर्णिया, अररिया और किशनगंज जैसे सीमांचल के जिले भौगोलिक रूप से नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं के करीब हैं, जिससे यह क्षेत्र लंबे समय से घुसपैठियों और स्लीपर सेल्स के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना रहा है। सोहेल की गिरफ्तारी ने इस पुरानी समस्या को फिर से उजागर कर दिया है। आतंकियों के लिए इन इलाकों में छिपना और अपनी गतिविधियों को अंजाम देना आसान हो जाता है क्योंकि यहाँ की जनसांख्यिकीय स्थिति और गरीबी उन्हें ‘ह्यूमन शील्ड’ (Human Shield) के रूप में इस्तेमाल करने का मौका देती है।
सोहेल और इमरान जैसे युवाओं का इस रास्ते पर निकल जाना समाज और सुरक्षा तंत्र दोनों के लिए एक बड़ी विफलता है। यह मामला यह भी बताता है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में अब आतंकी समूहों को किसी ट्रेनिंग कैंप में जाने की जरूरत नहीं रही, वे घर बैठे ही कट्टरपंथी बन रहे हैं और बम बनाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए अब चुनौती केवल सीमाओं की रक्षा करना नहीं है, बल्कि डिजिटल सीमाओं पर भी नजर रखना है।
निष्कर्ष के बिना: देश की सुरक्षा पर नया खतरा
18 अप्रैल 2026 की यह घटना बिहार के लिए एक चेतावनी है। कटिहार की मिट्टी से उठकर दिल्ली में धमाके की साजिश रचने वाला सोहेल अब पुलिस की गिरफ्त में है, लेकिन सवाल यह है कि ऐसे कितने और ‘सोहेल’ हमारे बीच छिपे हो सकते हैं? दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अब सोहेल के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में लगी है। उसके मोबाइल और लैपटॉप से बरामद डेटा से आने वाले दिनों में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
राम मंदिर और संसद जैसे गौरवशाली प्रतीकों की सुरक्षा को लेकर अब सरकार और भी सख्त कदम उठा रही है। कटिहार के मनिहारी में हुई इस रेकी और गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि आतंकी अब छोटे शहरों को अपना केंद्र बना रहे हैं। फिलहाल, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल सोहेल और इमरान से रिमांड पर पूछताछ कर रही है, और जल्द ही इस पूरी साजिश की परतें देश के सामने होंगी। बिहार की जनता और प्रशासन को अब और भी अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि राज्य की शांति भंग न हो सके।


