
भागलपुर। रेशम नगरी भागलपुर न केवल अपने व्यावसायिक ताने-बाने के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह आध्यात्म और प्राचीन ज्ञान का भी एक बड़ा केंद्र रही है। इसी ऐतिहासिक कड़ी को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। 16 अप्रैल 2026 को जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने नाथनगर स्थित ऐतिहासिक जैन मंदिर का विस्तृत भ्रमण किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य मंदिर परिसर में सुरक्षित रखी गई सदियों पुरानी पांडुलिपियों और ग्रंथों का अवलोकन करना तथा उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की योजना को अमलीजामा पहनाना था। जिलाधिकारी ने यहाँ जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य की जीवनी से संबंधित दुर्लभ अभिलेखों को देखा और उनके संरक्षण के निर्देश दिए। यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत इन प्राचीन ज्ञान संपदाओं को ‘ज्ञान भारतम्’ पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। इस पहल के बाद नाथनगर के इस मंदिर में छिपे आध्यात्मिक और ऐतिहासिक रहस्य अब पूरी दुनिया के शोधकर्ताओं और श्रद्धालुओं के लिए महज एक क्लिक पर उपलब्ध होंगे।
भगवान वासुपूज्य की जीवनी और प्राचीन ग्रंथों का सान्निध्य
नाथनगर का जैन मंदिर जैन धर्मावलंबियों के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र है, क्योंकि यह 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य की जन्मभूमि और तपोभूमि मानी जाती है। जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने मंदिर पहुँचकर सबसे पहले भगवान वासुपूज्य के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों और प्राचीन ग्रंथों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने उन पांडुलिपियों में गहरी रुचि दिखाई जो प्राकृत और संस्कृत जैसी प्राचीन भाषाओं में लिखी गई हैं। इन ग्रंथों में न केवल धार्मिक उपदेश हैं, बल्कि तत्कालीन समाज, संस्कृति और दर्शन की भी गहरी जानकारी छिपी है।
जिलाधिकारी ने मंदिर प्रबंधन से इन ग्रंथों के संरक्षण की स्थिति के बारे में भी पूछताछ की। उन्होंने कहा कि ये पांडुलिपियां हमारे पूर्वजों की मेधा का प्रमाण हैं और इनका सुरक्षित रहना आने वाली पीढ़ियों के लिए अनिवार्य है। भ्रमण के दौरान उन्होंने मंदिर में स्थापित 23 जैन मुनियों की प्रतिमाओं का भी अवलोकन किया। प्रत्येक प्रतिमा की बनावट और उनसे जुड़ी जीवनी के बारे में उन्होंने विस्तार से जानकारी प्राप्त की। नवल किशोर चौधरी ने स्वीकार किया कि नाथनगर की यह धरती आध्यात्मिक ऊर्जा से भरी है और यहाँ का इतिहास बहुत ही गौरवशाली है।
ज्ञान भारतम् पोर्टल: 6117 पांडुलिपियों का होगा डिजिटल कायाकल्प
इस भ्रमण की सबसे बड़ी उपलब्धि पांडुलिपियों के डिजिटल दस्तावेजीकरण की घोषणा रही। मंदिर के प्रतिनिधि जागेश जैन ने जिलाधिकारी को बताया कि मंदिर पुस्तकालय और अभिलेखागार में कुल 6117 पांडुलिपियां मौजूद हैं। इन सभी पांडुलिपियों का व्यापक सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। अब प्रशासन का लक्ष्य इन सभी को ‘ज्ञान भारतम्’ पोर्टल पर अपलोड करना है।
”6117 पांडुलिपियों का डिजिटल होना भागलपुर के लिए गर्व की बात है। यह कदम हमारी प्राचीन धरोहरों को समय की धूल से बचाकर अनंत काल के लिए सुरक्षित कर देगा।”
ज्ञान भारतम् पोर्टल एक ऐसा मंच है जहाँ देश भर की दुर्लभ पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों को हाई-रिज़ॉल्यूशन स्कैनिंग के साथ अपलोड किया जाता है। इससे न केवल मूल प्रतियों को बार-बार छूने से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा, बल्कि दुनिया भर के विद्वान घर बैठे इन पर शोध कर सकेंगे। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि स्कैनिंग और अपलोडिंग की प्रक्रिया में पूरी सावधानी बरती जाए ताकि एक भी शब्द या आकृति स्पष्टता से दूर न रहे। यह प्रक्रिया भागलपुर को सांस्कृतिक पर्यटन और शोध के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगी।
प्रशासनिक अमले की मौजूदगी और विशेषज्ञों का समन्वय
जिलाधिकारी के इस महत्वपूर्ण दौरे के समय उनके साथ जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह ने इस पहल को विकास और विरासत का एक सुंदर समन्वय बताया। उन्होंने कहा कि पर्यटन की दृष्टि से नाथनगर के जैन मंदिर का विकास जिला प्रशासन की प्राथमिकता में है। डायरेक्टर एनईपी अमर कुमार मिश्रा और जिला कला संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन पाठक ने भी पांडुलिपियों के कलात्मक और भाषाई महत्व पर चर्चा की।
अंकित रंजन पाठक ने बताया कि कला संस्कृति विभाग इन पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। जागेश जैन ने जिलाधिकारी को सभी विभिन्न ग्रंथों और पांडुलिपियों की विषय-वस्तु के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इनमें से कई ग्रंथ ऐसे हैं जो अब दुनिया में कहीं और उपलब्ध नहीं हैं। जिलाधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि पोर्टल पर अपलोडिंग के साथ-साथ इन पांडुलिपियों का हिंदी और अंग्रेजी अनुवाद भी किया जाना चाहिए ताकि इनका संदेश जन-जन तक पहुँच सके।
जैन मुनियों की जीवनी: शांति और अहिंसा का संदेश
भ्रमण के दौरान जिलाधिकारी ने मंदिर में लगी विभिन्न 23 जैन मुनियों की प्रतिमाओं का एक-एक कर अवलोकन किया। उन्होंने प्रत्येक मुनि के जीवन, उनके त्याग और उनके द्वारा दिए गए शांति के संदेशों के बारे में जानकारी प्राप्त की। नवल किशोर चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में जब दुनिया संघर्षों से गुजर रही है, तब जैन मुनियों के सत्य और अहिंसा के विचार और भी प्रासंगिक हो जाते हैं।
उन्होंने मंदिर की वास्तुकला की भी प्रशंसा की और कहा कि प्रतिमाओं का रख-रखाव और उनकी शुद्धता मंदिर की गरिमा को बढ़ाती है। जिलाधिकारी ने सुझाव दिया कि मंदिर परिसर में एक ‘डिजिटल गैलरी’ भी बनाई जानी चाहिए जहाँ आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु इन 23 मुनियों और भगवान वासुपूज्य के बारे में ऑडियो-विजुअल माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकें। इससे युवाओं में अपनी संस्कृति के प्रति रुचि बढ़ेगी।
सांस्कृतिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
भागलपुर प्रशासन का यह कदम केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा आर्थिक और पर्यटन विजन भी है। नाथनगर जैन मंदिर में इतनी बड़ी संख्या में पांडुलिपियों का मिलना यह साबित करता है कि यह क्षेत्र प्राचीन काल में शिक्षा और लेखन का भी बड़ा केंद्र था। जब ये 6117 पांडुलिपियां ‘ज्ञान भारतम्’ पोर्टल पर लाइव होंगी, तो दुनिया भर के जैन धर्मावलंबी और इतिहासकार भागलपुर का रुख करेंगे।
इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और नाथनगर का नाम अंतर्राष्ट्रीय पटल पर चमकेगा। जिलाधिकारी ने कहा कि वे इस परियोजना की प्रगति की स्वयं निगरानी करेंगे। उन्होंने बिजली, सड़क और सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी मंदिर के आसपास की व्यवस्था को सुदृढ़ करने का भरोसा दिलाया। भागलपुर में कला और संस्कृति की इस अनमोल पूंजी को सहेजने का यह अभियान अब अपने निर्णायक दौर में है।
अगली डगर: स्कैनिंग से लेकर ग्लोबल एक्सेस तक
आने वाले हफ्तों में तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मंदिर में अपनी मशीनें स्थापित करेगी। पांडुलिपियों की कोमलता को देखते हुए बिना फ्लैश वाली स्कैनिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा। प्रत्येक पन्ने को डिजिटाइज़ करने के बाद उसे पोर्टल के सर्वर पर सुरक्षित किया जाएगा। जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने इस कार्य को समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। 16 अप्रैल की यह शाम भागलपुर की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक नई सुबह लेकर आई है, जहाँ अब प्राचीन ज्ञान के पन्ने कभी पीले नहीं पड़ेंगे, बल्कि वे डिजिटल स्क्रीन पर हमेशा के लिए चमकते रहेंगे।


