
भागलपुर। सूचना क्रांति और डिजिटल सशक्तिकरण के इस युग में शासन की कार्यप्रणाली अब फाइलों के ढेर से निकलकर पारदर्शी ऑनलाइन पोर्टल्स पर अपनी जगह बना रही है। इसी कड़ी में बिहार के राजनैतिक और सामाजिक इतिहास में 17 अप्रैल 2026 की तारीख एक बड़े और क्रांतिकारी बदलाव की साक्षी बनने जा रही है। भागलपुर के समीक्षा भवन में गुरुवार, 16 अप्रैल को जिला पदाधिकारी नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले के तमाम बड़े अधिकारियों को आगामी जनगणना अभियान को सफल बनाने के लिए कड़े दिशा-निर्देश दिए गए। यह जनगणना केवल जनसंख्या गिनने का काम नहीं है, बल्कि यह सुशासन की उस दिशा में एक बड़ा कदम है जहाँ तकनीक के माध्यम से हर नागरिक की सटीक जानकारी संकलित की जाएगी। इस बार की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित होगी, जिसका उद्देश्य कार्य में न केवल सुगमता लाना है, बल्कि पारदर्शिता को भी नई ऊंचाइयों पर पहुँचाना है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि 17 अप्रैल से शुरू होने वाला यह अभियान बिहार की भावी विकास योजनाओं का आधार बनेगा।
स्व-गणना: पोर्टल के जरिए नागरिक बनेंगे अपनी जानकारी के संरक्षक
संवाददाताओं और अधिकारियों को संबोधित करते हुए नवल किशोर चौधरी ने बताया कि बिहार सरकार ने इस बार नागरिकों को अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करने का एक महत्वपूर्ण अधिकार दिया है। 17 अप्रैल 2026 से 01 मई 2026 तक ‘स्व-गणना’ (Self Enumeration) की विशेष सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके लिए एक समर्पित पोर्टल http://se.census.gov.in तैयार किया गया है। नागरिक अपने मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से इस पोर्टल पर जाकर अपना विवरण दर्ज कर सकेंगे।
इस प्रक्रिया को इतना सरल बनाया गया है कि परिवार का मुखिया घर बैठे ही अपने मकान और परिवार से जुड़ी 33 प्रकार की जानकारियों को पोर्टल पर अपलोड कर सकता है। पंजीकरण के लिए नागरिक को सबसे पहले अपना नाम और सक्रिय मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद उन्हें अपनी पसंदीदा भाषा चुनने की स्वतंत्रता होगी। मोबाइल नंबर का सत्यापन ओटीपी (OTP) के माध्यम से किया जाएगा, जिससे डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। सत्यापन के पश्चात नागरिक को अपने जिले और नजदीकी स्थान को मानचित्र (मैप) पर हाईलाइटर की मदद से चिह्नित करना होगा। इसके बाद उनके सामने 33 बहुविकल्पीय प्रश्न आएंगे, जिनके उत्तर पोर्टल पर दिए गए विकल्पों में से चुनकर देने होंगे। यह पूरी व्यवस्था इस तरह डिजाइन की गई है कि मानवीय त्रुटि की गुंजाइश कम से कम रहे।
यूनिक आईडी: डेटा सुरक्षा और भविष्य का सत्यापन आधार
जनगणना की इस डिजिटल प्रक्रिया में ‘यूनिक आईडी’ सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। जिलाधिकारी ने बताया कि जब नागरिक अपनी जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर लेंगे, तो उन्हें विवरणी को ‘सबमिट’ करने से पहले सुधार का पूरा मौका मिलेगा। एक बार डेटा अंतिम रूप से सबमिट हो जाने के बाद सिस्टम द्वारा एक यूनिक आईडी (Unique ID) जनरेट की जाएगी। नवल किशोर चौधरी ने विशेष रूप से आग्रह किया कि नागरिक इस आईडी को स्क्रीनशॉट लेकर या किसी डायरी में लिखकर अत्यंत सुरक्षित रखें।
यह आईडी आने वाले दूसरे चरण के लिए अनिवार्य होगी। 02 मई 2026 से जब सरकारी प्रगणक (Enumerators) घर-घर पहुँचेंगे, तब नागरिकों को यही आईडी उन्हें दिखानी होगी। प्रगणक इस आईडी के माध्यम से पूर्व में भरे गए विवरण को पुनः खोलेंगे और यदि उसमें कोई बदलाव या सुधार की आवश्यकता होगी, तो उसे मौके पर ही दुरुस्त कर डेटा को फाइनल सबमिट कर दिया जाएगा। यह दोहरी सत्यापन प्रणाली डेटा की शुद्धता को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करेगी, जिससे भविष्य में जनगणना के आंकड़ों पर कोई सवाल खड़ा न हो सके।
प्रशासनिक मुस्तैदी: पहले खुद का विवरण भरेंगे सरकारी कर्मी
नवल किशोर चौधरी ने प्रशासनिक अनुशासन का उदाहरण पेश करते हुए सभी जिला स्तरीय पदाधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक कड़ा आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि जनगणना के इस महाकुंभ में सरकारी सेवक सबसे पहले अपनी सहभागिता सुनिश्चित करेंगे। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी सरकारी पदाधिकारी और कर्मी 17 एवं 18 अप्रैल को सर्वप्रथम अपनी स्व-गणना (Self Enumeration) पूरी करेंगे।
इसके लिए उन्होंने हर विभाग के कार्यालय प्रधानों को जिम्मेदारी सौंपी है कि वे अपने-अपने अधीन कार्यरत कर्मियों का डेटा पोर्टल पर अपलोड करवाएं। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कल्याण और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों को विशेष रूप से सक्रिय रहने को कहा गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी, डीपीएम, डीपीओ आईसीडीएस, डीपीएम हेल्थ और जिला कृषि पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे अपने विशाल मानव संसाधन का उपयोग इस गणना कार्य में तेजी लाने के लिए करें। नवल किशोर चौधरी का मानना है कि जब सरकारी अमला स्वयं इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेगा, तभी वह आम जनता को बेहतर ढंग से गाइड कर पाएगा।
जनप्रतिनिधियों का सहयोग: मुखिया और वार्ड सदस्य बनेंगे सेतु
इस अभियान को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए जिलाधिकारी ने प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) को महत्वपूर्ण टास्क दिया है। उन्होंने निर्देश दिया कि बीडीओ अपने-अपने प्रखंडों में पंचायत के मुखियाओं और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ तुरंत बैठक करें। प्रशासन की योजना है कि सबसे पहले जनप्रतिनिधि पोर्टल पर अपनी स्व-गणना करें, जिससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाए।
जनप्रतिनिधियों के माध्यम से आम नागरिकों को पोर्टल के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। पंचायतों में मुखिया, वार्ड सदस्य और अन्य स्थानीय नेताओं की भूमिका एक सेतु की तरह होगी, जो तकनीक से दूर रहने वाले लोगों को भी इस डिजिटल अभियान से जोड़ेंगे। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ स्मार्टफोन या इंटरनेट की उपलब्धता कम है, वहां जनप्रतिनिधियों का सहयोग डेटा संग्रह में मील का पत्थर साबित होगा।
समीक्षा भवन में मौजूद रहे शासन के शीर्ष स्तंभ
समीक्षा भवन में आयोजित इस बैठक के दौरान प्रशासन के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया। बैठक में उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, अपर समाहर्ता दिनेश राम, अपर समाहर्ता (विधि व्यवस्था) राकेश रंजन, अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) कुंदन कुमार, संयुक्त निदेशक जनसंपर्क नागेंद्र कुमार गुप्ता और जिला सांख्यिकी पदाधिकारी लखीराम मुर्मू मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
इसके अलावा, जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी और अन्य प्रखंड स्तरीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाइन जुड़े रहे। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सांख्यिकी विभाग को नियमित रूप से पोर्टल के डेटा और प्रगति की समीक्षा करने का निर्देश दिया ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर भागलपुर जिला जनगणना के कार्य में अग्रणी रह सके।
डिजिटल जनगणना: विकास की नई बुनियाद
17 अप्रैल की सुबह से शुरू होने वाली यह जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं है, बल्कि यह विकसित बिहार के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा निवेश है। सटीक आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य में स्कूल, अस्पताल, सड़कों और राशन जैसी बुनियादी सुविधाओं का वितरण तय होगा। नवल किशोर चौधरी के नेतृत्व में भागलपुर प्रशासन ने जो रोडमैप तैयार किया है, वह तकनीक और जन-भागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
डिजिटल पोर्टल का उपयोग करने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ को भी कम किया जा सकेगा। भागलपुर की जनता से अपील की गई है कि वे इस 15 दिवसीय ‘स्व-गणना’ उत्सव में अपनी जिम्मेदारी निभाएं। 2 मई से होने वाले जमीनी सर्वे से पहले नागरिक अपनी जानकारी पोर्टल पर सुरक्षित कर प्रशासन का सहयोग कर सकते हैं। समीक्षा भवन की इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भागलपुर अब जनगणना के इस आधुनिक युग में कदम रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।


