रक्सौल में नगर परिषद कार्यालय के पीछे चल रहा था अवैध देह व्यापार, पुलिस ने 7 लोगों को दबोचा

बिहार के में पुलिस ने एक बड़े अवैध देह व्यापार गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने नगर परिषद कार्यालय के पीछे चल रहे एक संदिग्ध ठिकाने पर छापेमारी कर सात लोगों को हिरासत में लिया है। इस घटना ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है और स्थानीय लोगों के बीच भी काफी चर्चा का विषय बन गई है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शहर के एक मोहल्ले में लंबे समय से अवैध गतिविधियों के संचालित होने की सूचना मिल रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम का गठन किया गया और पूरी योजना के साथ छापेमारी की गई। इस ऑपरेशन का नेतृत्व थाना प्रभारी आईपीएस अधिकारी हेमंत सिंह ने किया।

छापेमारी में पुलिस टीम ने पूरी गोपनीयता बरतते हुए कार्रवाई की, ताकि किसी को पहले से भनक न लगे। टीम में एसआई रवि कुमार, अनीता सिन्हा, अंशुली आर्य, कृष्ण मुरारी, जितेंद्र कुमार और लालबहादुर सहित कई पुलिसकर्मी शामिल थे। सभी ने समन्वय के साथ इस ऑपरेशन को सफल बनाया।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि नगर परिषद कार्यालय के पीछे स्थित एक मकान में लंबे समय से यह अवैध धंधा चल रहा था। बाहरी तौर पर यह एक सामान्य घर की तरह दिखता था, लेकिन अंदर संगठित तरीके से देह व्यापार संचालित किया जा रहा था।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से पांच महिलाओं और दो पुरुषों को आपत्तिजनक स्थिति में हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि सभी लोग मौके पर अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए गए।

कार्रवाई के दौरान कई आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई है, जिसमें कंडोम, शक्ति वर्धक दवाएं, सिगरेट और कई मोबाइल फोन शामिल हैं। पुलिस के अनुसार ये सभी चीजें इस बात की पुष्टि करती हैं कि वहां संगठित तरीके से देह व्यापार का संचालन किया जा रहा था।

हिरासत में लिए गए लोगों में दो पुरुषों की पहचान भी सामने आई है। एक आरोपी बिहार के मुजफ्फरपुर जिले का निवासी बताया जा रहा है, जबकि दूसरा मध्य प्रदेश के मुरैना जिले का रहने वाला है। इसके अलावा पांच महिलाओं को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच अभी जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस रैकेट के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि यह गिरोह कितने समय से सक्रिय था और इसके तार किन-किन जगहों से जुड़े हुए हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस इलाके में काफी समय से संदिग्ध गतिविधियां देखी जा रही थीं, लेकिन किसी ने खुलकर इसकी शिकायत नहीं की थी। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब लोगों में जागरूकता भी बढ़ी है और वे इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाने की बात कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संगठित अपराध को खत्म करने के लिए लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई जरूरी है। साथ ही समाज में जागरूकता बढ़ाने की भी जरूरत है, ताकि ऐसे मामलों की समय रहते जानकारी प्रशासन तक पहुंच सके।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की अवैध गतिविधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि छोटे शहरों में भी संगठित अपराध किस तरह पनप रहा है और उसे खत्म करने के लिए प्रशासन को लगातार सतर्क रहना होगा।

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