
पटना। राजधानी के पॉश इलाकों में शुमार पत्रकारनगर थाना क्षेत्र के हनुमान नगर से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पारिवारिक विश्वास और रिश्तों की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहाँ समाज में बुजुर्गों को वटवृक्ष की तरह पूजनीय माना जाता है, वहीं दूसरी ओर लालच की अंधी दौड़ में अपनों ने ही एक 87 वर्षीय बुजुर्ग को पाई-पाई के लिए मोहताज करने की साजिश रच डाली। हनुमान नगर निवासी बिक्रमा लाल के साथ हुई इस धोखाधड़ी ने न केवल उनके बुढ़ापे की जमा-पूंजी छीन ली, बल्कि उन्हें उस गहरे सदमे में डाल दिया है जहाँ अपराधी कोई बाहरी नहीं, बल्कि उनकी अपनी सगी पोतियां हैं। इस पूरे प्रकरण में बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा और परिवार के भीतर पनप रहे ‘इनसाइडर थ्रेट’ (भीतरघाती खतरों) का एक खौफनाक चेहरा सामने आया है। बिक्रमा लाल ने अब न्याय की गुहार लगाते हुए अपनी तीन पोतियों, अपनी बहू और बैंक के तीन कर्मचारियों के विरुद्ध पत्रकारनगर थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है।
‘अपनों’ ने ही लगा दी सेंध: विश्वास की आड़ में बड़ी लूट
हनुमान नगर के रहने वाले बिक्रमा लाल अपनी उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहाँ व्यक्ति को शांति और अपनों के सहारे की जरूरत होती है। लेकिन उनके घर के भीतर ही एक ऐसी साजिश बुनी जा रही थी, जिसकी भनक उन्हें तब लगी जब उनके बैंक खाते से एक बड़ी रकम साफ हो चुकी थी। बिक्रमा लाल के अनुसार, उनकी तीन पोतियों—स्तुति लाल, आस्था लाल और ईशानी लाल—ने मिलकर एक सुनियोजित तरीके से उनकी गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ करने का मन बनाया।
इस साजिश में सिर्फ पोतियां ही शामिल नहीं थीं, बल्कि बिक्रमा लाल का आरोप है कि उनकी बहू की भी इसमें पूरी मिलीभगत रही है। जिस परिवार को बुजुर्ग की सेवा करनी चाहिए थी, वही परिवार उनकी संपत्ति और बैंक बैलेंस को हड़पने के लिए जाल बिछा रहा था। यह मामला केवल पैसों की चोरी का नहीं है, बल्कि एक बुजुर्ग के उस भरोसे की हत्या है जो उन्होंने अपने वारिसों पर किया था।
बैंकिंग प्रणाली से खिलवाड़: मोबाइल नंबर बदलने का ‘मास्टरस्ट्रोक’
इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए जिस तरीके का इस्तेमाल किया गया, वह बेहद शातिराना था। बिक्रमा लाल का बैंक खाता डॉक्टर कॉलोनी स्थित एक प्रतिष्ठित बैंक की शाखा में है। आधुनिक बैंकिंग में मोबाइल नंबर वह प्राथमिक सुरक्षा कवच है जो हर लेनदेन की सूचना खाताधारक को देता है। आरोपियों को पता था कि जब तक बिक्रमा लाल का मोबाइल नंबर बैंक खाते से जुड़ा रहेगा, वे पैसे नहीं निकाल पाएंगी क्योंकि हर ओटीपी (OTP) या मैसेज बुजुर्ग के पास जाएगा।
साजिश के तहत, पोतियों ने बैंक में बिक्रमा लाल का पंजीकृत मोबाइल नंबर बदलवा दिया और उसकी जगह अपना मोबाइल नंबर दर्ज करा दिया। यह कार्य इतनी गोपनीयता से किया गया कि बिक्रमा लाल को इसका आभास तक नहीं हुआ। नंबर बदलते ही खाते की सुरक्षा दीवार ढह गई। इसके बाद, 28 मार्च 2026 से निकासी का सिलसिला शुरू हुआ। चूंकि अब मोबाइल पर आने वाले संदेश पोतियों के पास जा रहे थे, इसलिए बिक्रमा लाल को पता ही नहीं चला कि उनके खाते से निरंतर पैसे निकाले जा रहे हैं।
बैंक कर्मियों की भूमिका और ‘इनसाइडर’ साजिश
बिक्रमा लाल का सबसे गंभीर आरोप बैंक के तीन कर्मियों पर है। उनके अनुसार, बिना बैंक कर्मियों की मिलीभगत के मोबाइल नंबर बदलना और इतनी बड़ी रकम की निकासी संभव नहीं थी। आरोपी पोतियों में से एक ने डॉक्टर कॉलोनी स्थित उसी बैंक के तीन कर्मचारियों के साथ मिलकर पूरी योजना तैयार की थी।
यह बैंकिंग नैतिकता और सुरक्षा प्रोटोकॉल का बड़ा उल्लंघन है। आमतौर पर मोबाइल नंबर बदलने के लिए खाताधारक की भौतिक उपस्थिति या कड़े सत्यापन की आवश्यकता होती है, लेकिन यहाँ नियमों को ताक पर रखकर साजिशकर्ताओं को लाभ पहुँचाया गया। जब तक बिक्रमा लाल को गड़बड़ी का शक हुआ और उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हालांकि शिकायत के बाद बैंक अकाउंट को ‘फ्रीज’ (लेनदेन रोकना) कर दिया गया, लेकिन उससे पहले ही आरोपियों ने 35 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि निकाल ली थी।
सिर्फ नकदी नहीं, संपत्ति पर भी थी नजर
इस मामले की गंभीरता केवल बैंक बैलेंस तक सीमित नहीं है। बिक्रमा लाल ने पुलिस को बताया कि उनकी पोतियों और बहू का लालच इतना बढ़ गया था कि उन्होंने उनकी अचल संपत्ति पर भी कब्जा करने की कोशिश शुरू कर दी। आरोप है कि बुजुर्ग पर मानसिक और शारीरिक दबाव बनाकर उनके नाम की कीमती संपत्ति को भी जबरन अपने नाम करवा लिया गया है।
अस्सी की उम्र पार कर चुके एक बुजुर्ग के लिए अपनी ही संतानों के इस व्यवहार का सामना करना किसी यातना से कम नहीं है। संपत्ति के इस अवैध हस्तांतरण और दबाव की शिकायत बिक्रमा लाल ने अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM) के न्यायालय में भी की है। उन्होंने अपनी संपत्ति को वापस पाने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई छेड़ दी है। हनुमान नगर जैसे शिक्षित इलाके में इस तरह की घटना ने सामाजिक ताने-बाने की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है।
पत्रकारनगर पुलिस और साइबर सेल की जांच
बिक्रमा लाल की शिकायत पर पत्रकारनगर थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस अब उन बैंक कर्मियों की भूमिका की जांच कर रही है जिनके नाम बिक्रमा लाल ने अपनी प्राथमिकी में दिए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या चेक पर किए गए हस्ताक्षर असली थे या उन्हें फर्जी तरीके से बनाया गया था। साथ ही, बैंक के सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि निकासी के समय बैंक में कौन-कौन मौजूद था।
पटना साइबर सेल की टीम भी इस मामले में तकनीकी साक्ष्य जुटा रही है। मोबाइल नंबर बदलने के लिए दिए गए आवेदन और उस पर किए गए हस्ताक्षरों का मिलान विशेषज्ञों से कराया जाएगा। पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित वित्तीय अपराध का मामला है जिसमें परिवार के सदस्य और बाहरी संस्थान के लोग शामिल हैं। दोषियों के विरुद्ध साक्ष्य मिलते ही गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
बुजुर्गों की सुरक्षा और सामाजिक सरोकार
पटना जैसे बढ़ते महानगरों में बुजुर्गों के खिलाफ होने वाले अपराधों में ‘अपनों’ की संलिप्तता एक चिंताजनक ट्रेंड बन गया है। अक्सर बुजुर्ग तकनीक से उतने वाकिफ नहीं होते, जिसका फायदा उनके ही परिवार के युवा सदस्य उठाते हैं। बिक्रमा लाल का मामला एक चेतावनी है उन तमाम वरिष्ठ नागरिकों के लिए जो अपने बैंक खातों और संपत्तियों का पूरा जिम्मा दूसरों पर छोड़ देते हैं।
इस घटना ने बैंकिंग सेक्टर के लिए भी एक सबक छोड़ा है कि वरिष्ठ नागरिकों के खातों में किसी भी तरह के बदलाव (जैसे मोबाइल नंबर या पता बदलना) के समय अतिरिक्त सावधानी और व्यक्तिगत सत्यापन अनिवार्य होना चाहिए। हनुमान नगर की इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में भी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर घर के भीतर ही बुजुर्ग सुरक्षित नहीं हैं, तो समाज और कानून को और अधिक सख्त होना होगा। बिक्रमा लाल आज न्याय की उम्मीद में थाने और कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं, और उनकी कहानी उन हजारों बुजुर्गों की आवाज बन गई है जो खामोशी से अपनों का अत्याचार सह रहे हैं।


