शपथ के बाद सीधे सचिवालय पहुँचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मुख्य सचिव और वरीय अधिकारियों के साथ की पहली उच्च स्तरीय बैठक

पटना। बिहार की राजनैतिक फिजाओं में बुधवार का दिन एक बड़े और निर्णायक बदलाव का साक्षी बना। 15 अप्रैल 2026 की सुबह लोकभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के ठीक बाद सम्राट चौधरी ने अपनी कार्यशैली से यह स्पष्ट कर दिया कि वे ‘विश्राम’ नहीं, बल्कि ‘काम’ की राजनीति में विश्वास रखते हैं। शपथ ग्रहण समारोह की औपचारिकताओं और समर्थकों के उत्साह के बीच से निकलते ही मुख्यमंत्री सीधे पटना स्थित मुख्य सचिवालय पहुँचे। यहाँ उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में विधिवत अपना कार्यभार संभाला। कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही सम्राट चौधरी पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में नजर आए। उन्होंने बिना समय गवाए राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत सहित तमाम वरीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। मुख्यमंत्री की इस पहली बैठक ने राज्य की नौकरशाही को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि नई सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं और आने वाले दिनों में बिहार के प्रशासन की रफ़्तार क्या होने वाली है।

शपथ से सचिवालय तक: रस्मों के बाद सीधा काम

​बुधवार की सुबह लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में जैसे ही राज्यपाल ने सम्राट चौधरी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई, उसके तुरंत बाद वे सचिवालय के लिए रवाना हो गए। आमतौर पर मुख्यमंत्री शपथ लेने के बाद अपने आवास पर बधाई देने वालों से मिलते हैं, लेकिन सम्राट चौधरी ने इस परंपरा को तोड़ते हुए सीधे अपनी कार्यस्थली का रुख किया। मुख्य सचिवालय पहुँचने पर उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया, जिसके बाद वे सीधे अपने कक्ष में गए और फाइलों पर हस्ताक्षर कर अपना पदभार ग्रहण किया।

​सचिवालय के गलियारों में आज एक अलग तरह की हलचल देखी गई। नए मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत पहले से ही मौजूद थे। सम्राट चौधरी का सीधे सचिवालय पहुँचना इस बात का संकेत है कि वे शासन की बागडोर पर अपनी पकड़ पहले दिन से ही मजबूत करना चाहते हैं। उनके इस कदम को राजनैतिक विश्लेषक एक ‘सशक्त संदेश’ के रूप में देख रहे हैं, जो यह बताता है कि नई सरकार में प्रशासनिक ढिलाई के लिए कोई जगह नहीं होगी।

मुख्य सचिव के साथ पहली बैठक: क्या रही प्राथमिकता?

​मुख्यमंत्री कार्यालय में पदभार संभालने के तुरंत बाद सम्राट चौधरी ने मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और गृह विभाग, वित्त विभाग व अन्य महत्वपूर्ण विभागों के वरीय अधिकारियों के साथ लंबी चर्चा की। इस बैठक का मुख्य केंद्र राज्य की कानून-व्यवस्था और लंबित विकास परियोजनाओं की समीक्षा रहा। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से राज्य में अपराध की वर्तमान स्थिति और पिछले कुछ महीनों में की गई पुलिसिया कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा मांगा है।

​बैठक के दौरान सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि विकास की गाड़ी तभी तेज चलेगी जब राज्य में कानून का राज पूरी तरह से स्थापित होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। विशेष रूप से सीमावर्ती जिलों में तस्करी और अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए उन्होंने एक सख्त निगरानी तंत्र विकसित करने की बात कही। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने मुख्यमंत्री को राज्य की वर्तमान प्रशासनिक स्थिति और आगामी योजनाओं के बारे में ब्रीफिंग दी।

प्रशासनिक सर्जरी और ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अधिकारियों के साथ इस पहली मुलाकात ने सचिवालय के भीतर एक मनोवैज्ञानिक दबाव भी पैदा किया है। अपनी बेबाक कार्यशैली के लिए मशहूर सम्राट ने अधिकारियों को साफ कर दिया कि नौकरशाही को जनता के प्रति जवाबदेह होना पड़ेगा। उन्होंने भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात दोहराते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार की बिचौलिया संस्कृति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​चर्चा है कि आने वाले दिनों में बिहार की प्रशासनिक संरचना में एक बड़ी ‘सर्जरी’ देखने को मिल सकती है। कई जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान बदले जा सकते हैं ताकि सरकार अपने विजन को धरातल पर उतार सके। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से विकास योजनाओं की समय सीमा (Deadline) तय करने और उनकी नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि फाइलों का अंबार लगाने के बजाय उनके त्वरित निष्पादन पर ध्यान दिया जाए ताकि विकास कार्यों की गति में कोई अवरोध न आए।

बुलडोजर ऐक्शन और अतिक्रमण पर चर्चा

​सचिवालय में हुई इस बैठक में अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर भी चर्चा हुई। सम्राट चौधरी के समर्थक उन्हें ‘बुलडोजर बाबा’ के रूप में देख रहे हैं, और मुख्यमंत्री ने भी इस दिशा में अपनी गंभीरता दिखाई है। उन्होंने अधिकारियों से सरकारी जमीनों पर हुए अवैध कब्जों की सूची मांगी है और उन पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

​विशेष रूप से राजधानी पटना और राज्य के अन्य बड़े शहरों में ट्रैफिक की समस्या और जलजमाव के कारणों की समीक्षा करते हुए उन्होंने जल निकायों और नालों पर हुए अतिक्रमण को प्राथमिकता के आधार पर हटाने की बात कही। मुख्यमंत्री का मानना है कि शहर को व्यवस्थित किए बिना उसे स्मार्ट नहीं बनाया जा सकता। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि अतिक्रमण हटाते समय गरीब और बेसहारा लोगों के पुनर्वास का भी ध्यान रखा जाए, ताकि कार्रवाई केवल प्रतिशोधात्मक न लगे बल्कि व्यवस्थित शहर निर्माण का हिस्सा हो।

सम्राट सरकार की पहली अग्निपरीक्षा: 4 मई तक का रोडमैप

​चूँकि मंत्रिमंडल का पूर्ण विस्तार 4 मई के बाद होना तय है, इसलिए तब तक सम्राट चौधरी और उनके दो उपमुख्यमंत्री—बिजेंद्र प्रसाद यादव व विजय कुमार चौधरी—पर ही सरकार चलाने की पूरी जिम्मेदारी है। आज की बैठक में मुख्यमंत्री ने इस अंतरिम अवधि के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार करने को कहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि मंत्रिमंडल विस्तार तक शासन के किसी भी काम में रुकावट न आए।

​मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे सभी विभागों के बीच समन्वय बनाए रखें। मुख्यमंत्री ने खुद भी घोषणा की है कि वे नियमित रूप से विभागों की समीक्षा करेंगे और जरूरत पड़ने पर स्वयं फील्ड विजिट भी करेंगे। सम्राट चौधरी की यह सक्रियता विपक्षी दलों के लिए भी एक चुनौती है, जो नई सरकार को ‘अलोकतांत्रिक’ और ‘सत्ता का जोड़-तोड़’ बता रहे हैं। सम्राट ने सीधे सचिवालय पहुँचकर यह जता दिया है कि उनका ध्यान विपक्ष के बयानों पर नहीं, बल्कि बिहार के शासन पर है।

अधिकारियों में हलचल: बदली-बदली सी कार्यसंस्कृति

​मुख्यमंत्री के सचिवालय पहुँचते ही अधिकारियों और कर्मचारियों के हाव-भाव में भी बदलाव देखा गया। दफ्तरों में समय की पाबंदी और फाइलों के प्रति गंभीरता बढ़ गई है। सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि वे ‘पर्फोमेंस’ (प्रदर्शन) के आधार पर अधिकारियों का मूल्यांकन करेंगे। बैठक में मौजूद वरीय अधिकारियों को यह अहसास हो गया है कि नए मुख्यमंत्री के साथ काम करने के लिए उन्हें अपनी गति को बढ़ाना होगा।

​बैठक के समापन पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह आश्वासन भी दिया कि जो ईमानदारी और लगन से काम करेंगे, उन्हें सरकार का पूरा संरक्षण मिलेगा। लेकिन, भ्रष्टाचार और लापरवाही बरतने वालों के लिए नई सरकार में कोई स्थान नहीं होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह पहला दिन बिहार के प्रशासनिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है, जहाँ नेतृत्व सीधे मोर्चे पर खड़ा होकर शासन को दिशा दे रहा है।

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