​बीएयू सबौर को आईसीएआर से ‘ए’ ग्रेड रेटिंग

भागलपुर। बिहार की कृषि क्रांति और शोध के सबसे बड़े केंद्र, बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर के नाम आज 15 अप्रैल 2026 को एक और स्वर्णिम उपलब्धि जुड़ गई है। शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में निरंतर अपनी पहचान पुख्ता कर रहे इस विश्वविद्यालय को अब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ओर से ‘ए’ ग्रेड की रेटिंग प्रदान की गई है। हाल ही में नैक (NAAC) से ‘ए’ ग्रेड हासिल करने के बाद, राष्ट्रीय स्तर की एक और बड़ी संस्था से यह मान्यता मिलना बीएयू सबौर की शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध की गहराई पर मुहर लगाती है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि पिछली बार के मूल्यांकन में विश्वविद्यालय को ‘सी’ ग्रेड से संतोष करना पड़ा था। महज कुछ वर्षों के भीतर ‘सी’ से सीधे ‘ए’ पायदान तक पहुँचना यह दर्शाता है कि सबौर स्थित इस संस्थान ने अपनी कार्यप्रणाली, बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक दृष्टिकोण में कितना व्यापक और सकारात्मक बदलाव किया है। इस रेटिंग के बाद अब बीएयू सबौर को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर अधिक पहचान मिलेगी, बल्कि आने वाले समय में शोध और विकास के लिए मिलने वाले बजट और संसाधनों में भी बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है।

मूल्यांकन की प्रक्रिया और कसौटी: 16 से 19 फरवरी का वह दौर

​आईसीएआर द्वारा दिया जाने वाला यह ग्रेड कोई सामान्य रेटिंग नहीं है। यह परिषद प्रत्येक पाँच वर्ष में देश के सभी राज्य कृषि विश्वविद्यालयों का सघन और सूक्ष्म मूल्यांकन करती है। इस मूल्यांकन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कृषि शिक्षा और अनुसंधान प्रदान कर रहे हैं या नहीं। बीएयू सबौर के लिए यह परीक्षा इस साल 16 से 19 फरवरी के बीच हुई थी, जब आईसीएआर की पीयर रिव्यू टीम ने विश्वविद्यालय परिसर का दौरा किया था।

​चार दिनों तक चली इस लंबी प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञों की टीम ने विश्वविद्यालय के हर विभाग, प्रयोगशाला, प्रक्षेत्र और प्रशासनिक व्यवस्था की बारीकी से जांच की। टीम ने मुख्य रूप से शैक्षणिक कार्यक्रमों की गुणवत्ता, शोध की नई उपलब्धियां, किसानों तक तकनीक पहुँचाने की विस्तार सेवाएं, बुनियादी ढांचा और विश्वविद्यालय की समग्र कार्यप्रणाली को अपनी जांच का आधार बनाया। वैज्ञानिकों के शोध पत्र, छात्रों की प्लेसमेंट रिपोर्ट और नवाचार से जुड़े विभिन्न मानकों पर गौर करने के बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। ‘ए’ ग्रेड मिलना इस बात का प्रमाण है कि बीएयू अब देश के अग्रणी कृषि संस्थानों की कतार में मजबूती से खड़ा हो चुका है।

‘सी’ से ‘ए’ तक का सफर: मेहनत और समर्पण की गाथा

​बीएयू सबौर के इतिहास में यह रेटिंग एक बड़े ‘यू-टर्न’ की तरह देखी जा रही है। पिछली बार जब आईसीएआर ने मूल्यांकन किया था, तब विश्वविद्यालय को ‘सी’ ग्रेड मिला था, जिसे शैक्षणिक हलकों में काफी निराशाजनक माना गया था। लेकिन उस विफलता को विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक चुनौती के रूप में लिया। पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय के भीतर जो ढांचागत सुधार हुए, उनका परिणाम आज सबके सामने है।

​विश्वविद्यालय ने अपनी शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए आधुनिक शिक्षण तकनीकों को अपनाया, अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान किए और प्रक्षेत्रों में नवाचार आधारित कृषि को बढ़ावा दिया। बुनियादी सुविधाओं का उन्नयन और प्रयोगशालाओं को आधुनिक उपकरणों से लैस करना भी इस सुधार का एक अहम हिस्सा रहा। ‘ए’ ग्रेड तक की यह उन्नति रातों-रात नहीं आई, बल्कि इसके पीछे विश्वविद्यालय द्वारा कृषि शिक्षा को रोजगारोन्मुखी और किसान-केंद्रित बनाने के निरंतर प्रयासों का बड़ा हाथ है।

कुलपति दुनिया राम सिंह का दृष्टिकोण: गौरव का क्षण

​इस बड़ी उपलब्धि पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दुनिया राम सिंह ने इसे पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आईसीएआर द्वारा प्राप्त यह ग्रेड विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह सफलता केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि उन शिक्षकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत का परिणाम है जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में संस्थान की छवि बदलने के लिए अपना दिन-रात एक कर दिया।

​कुलपति के अनुसार, ‘ए’ ग्रेड मिलने से अब विश्वविद्यालय के लिए विकास के नए द्वार खुलेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि इस मान्यता से अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक सहयोग बढ़ेगा। अनुसंधान के लिए मिलने वाले वित्तपोषण में सुगमता आएगी और संस्थान में नई आधारभूत संरचनाओं के विकास के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह रेटिंग केवल एक प्रमाण पत्र नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में कृषि नवाचार और क्षमता निर्माण को आगे बढ़ाने की हमारी जिम्मेदारी को और बढ़ा देती है।

राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर बढ़ेगा संस्थान का रसूख

​आईसीएआर की ‘ए’ ग्रेड रेटिंग मिलने के बाद बीएयू सबौर अब केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूर्वी भारत के एक प्रमुख कृषि हब के रूप में अपनी धाक जमाएगा। इस रेटिंग का सबसे बड़ा लाभ यहाँ के विद्यार्थियों को होगा। राष्ट्रीय स्तर की संस्था से उच्च ग्रेड प्राप्त विश्वविद्यालय की डिग्री का महत्व और बढ़ जाता है, जिससे छात्रों को उच्च शिक्षा और प्रतिष्ठित नौकरियों में प्राथमिकता मिलती है।

​इसके साथ ही, शोध के क्षेत्र में काम कर रहे वैज्ञानिकों के लिए भी यह एक नई ऊर्जा लेकर आया है। अब विश्वविद्यालय को बड़े रिसर्च प्रोजेक्ट्स मिलने की संभावनाएं बढ़ गई हैं, जो सीधे तौर पर बिहार के किसानों की समस्याओं—जैसे बाढ़, सूखा और कीटों के प्रकोप—के समाधान में सहायक होंगे। नवाचार और तकनीकी प्रसार के जरिए विश्वविद्यालय अब अपनी सेवाओं को और अधिक प्रभावी बना सकेगा, जिससे कृषि क्षेत्र में नई क्षमता का निर्माण होगा।

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