
भागलपुर: भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर भागलपुर के नयाबाज़ार स्थित महानगर जिला जदयू कार्यालय में एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व महानगर जिला जदयू के जिलाध्यक्ष संजय साह ने किया, जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने भाग लिया। यह आयोजन न केवल श्रद्धांजलि का अवसर था, बल्कि बाबा साहेब के विचारों को आत्मसात करने और समाज में समानता एवं न्याय स्थापित करने का संकल्प लेने का भी महत्वपूर्ण मंच बना।
पुष्पांजलि के साथ कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. भीमराव अंबेडकर के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने बारी-बारी से बाबा साहेब को श्रद्धांजलि दी और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस दौरान पूरे कार्यालय परिसर में गंभीरता और सम्मान का वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने एक स्वर में बाबा साहेब के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। श्रद्धांजलि अर्पित करते समय कार्यकर्ताओं के चेहरे पर उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता स्पष्ट झलक रही थी।
जिलाध्यक्ष संजय साह का संबोधन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष संजय साह ने डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब केवल भारतीय संविधान के निर्माता ही नहीं थे, बल्कि वे एक महान समाज सुधारक, अर्थशास्त्री, विधिवेत्ता और शिक्षाविद् भी थे।
उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने अपना पूरा जीवन समाज के वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए बिताया। उनके प्रयासों के कारण ही आज देश में समानता, न्याय और अधिकारों की अवधारणा मजबूत हो सकी है।
संजय साह ने आगे कहा कि बाबा साहेब का सबसे बड़ा संदेश था—“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।” यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना उनके समय में था। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इस संदेश को अपने जीवन में उतारें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें।
सामाजिक समरसता पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने विशेष रूप से सामाजिक समरसता और भाईचारे पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को सबसे अधिक जरूरत आपसी एकता और समानता की है।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने जिस समाज की कल्पना की थी, उसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं था। उनका सपना एक ऐसे भारत का था, जहां हर व्यक्ति को समान अवसर मिले और किसी के साथ अन्याय न हो।
कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि हमें जाति, धर्म और वर्ग के आधार पर भेदभाव खत्म करने के लिए मिलकर काम करना होगा।
अन्य वक्ताओं के विचार
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी बाबा साहेब के विचारों को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचार केवल किताबों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें व्यवहार में उतारना जरूरी है।
कई वक्ताओं ने यह भी कहा कि आज की युवा पीढ़ी को बाबा साहेब के जीवन से प्रेरणा लेकर शिक्षा और संघर्ष के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।
कार्यकर्ताओं ने लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे समाज में व्याप्त भेदभाव, असमानता और अन्याय को समाप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे।
उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करेंगे और समाज में जागरूकता फैलाएंगे।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की उपस्थिति
इस कार्यक्रम में जदयू महानगर के कई प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें संजय साह, शेखर पाण्डेय, संजू तिवारी, हसनैन अंसारी, दीपक सिंह, दीपक चौहान, प्रिंस खान, डॉ. सुमन सौरभ, अमित आर्यन, चंदन सहाय, सुबोध शर्मा, परवेज खान, डॉ. बी.बी. जासमीन, विकास सिंह, सपना गुप्ता, डॉ. कृष्णमोहन आज़ाद, आशीष कुमार, जावेद इकबाल, महबूब आलम, शाबान खान, प्रीति देवी, लाखी देवी, कविता देवी, बबलू सिंह सहित कई अन्य कार्यकर्ता शामिल हुए।
सभी ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
कुल मिलाकर, महानगर जिला जदयू कार्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों और आदर्शों को याद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ।
यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे समाज में समानता, न्याय और भाईचारे का संदेश भी मजबूत हुआ। ऐसे कार्यक्रम यह साबित करते हैं कि आज भी बाबा साहेब के विचार समाज को दिशा देने में सक्षम हैं।
अंततः यह कहा जा सकता है कि यदि उनके आदर्शों को सही मायनों में अपनाया जाए, तो एक समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण संभव है।


