टी.एन.बी कॉलेज में अंबेडकर स्मृति दिवस पर भव्य आयोजन, संविधान और समरसता पर जोर

भागलपुर: भागलपुर के प्रतिष्ठित टी.एन.बी कॉलेज परिसर में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर “संविधान और समरसता: डॉ. अंबेडकर स्मृति दिवस समारोह सह छात्र संवाद” विषय पर एक भव्य और गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र के गणमान्य लोगों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम ने न केवल बाबा साहेब के विचारों को जीवंत किया, बल्कि युवाओं को संविधान के मूल्यों के प्रति जागरूक करने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया।

विधिवत शुरुआत और स्वागत

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और सुव्यवस्थित मंच संचालन के साथ हुई। जैसे ही मुख्य अतिथि और अन्य विशिष्ट अतिथि मंच पर पहुंचे, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद छात्र राष्ट्रीय अध्यक्ष विराट सिंह कुशवाहा द्वारा दीप प्रज्ज्वलन किया गया, जो भारतीय परंपरा में ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है।

दीप प्रज्ज्वलन के बाद उपस्थित छात्रों द्वारा कुलगीत का सामूहिक गायन किया गया, जिसने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति और गरिमा से भर दिया। यह क्षण कार्यक्रम के सबसे भावनात्मक और प्रेरणादायक पलों में से एक रहा।

बाबा साहेब को श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के अगले चरण में सभी अतिथियों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने बाबा साहेब के योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रदेश सचिव सुमित सिंह कुशवाहा उपस्थित रहे। उनके साथ कई अन्य विशिष्ट अतिथि, शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता भी मंच पर मौजूद थे।

संविधान और समरसता पर विचार-विमर्श

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विभिन्न वक्ताओं के प्रेरणादायक संबोधन रहे। वक्ताओं ने डॉ. अंबेडकर द्वारा रचित भारतीय संविधान की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि यह देश के हर नागरिक के अधिकारों और कर्तव्यों का मार्गदर्शक है।

वक्ताओं ने सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए कहा कि बाबा साहेब का सपना एक ऐसे समाज का निर्माण करना था, जहां जाति, धर्म और वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव न हो। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे समानता, न्याय और भाईचारे के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज को बेहतर बनाने में योगदान दें।

छात्र संवाद और जागरूकता

इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें छात्र संवाद का भी आयोजन किया गया। छात्रों को अपने विचार व्यक्त करने और सवाल पूछने का अवसर दिया गया। इससे छात्रों में न केवल जागरूकता बढ़ी, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई।

कई छात्रों ने बाबा साहेब के विचारों पर अपने विचार साझा किए और बताया कि किस तरह उनके सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं।

क्विज प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रम

कार्यक्रम के मध्य चरण में क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता के माध्यम से छात्रों के ज्ञान का परीक्षण किया गया और उन्हें अंबेडकर के जीवन और संविधान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन में रंग भर दिया। छात्रों ने गीत, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक समरसता और एकता का संदेश दिया। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे सभागार में उत्साह का माहौल बना दिया।

विजेताओं का सम्मान

कार्यक्रम के अंत में क्विज प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के विजेताओं को सम्मानित किया गया। उन्हें प्रमाण पत्र, मेडल और मोमेंटो देकर प्रोत्साहित किया गया। इस सम्मान समारोह ने छात्रों के मनोबल को बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी

इस आयोजन में टी.एन.बी कॉलेज के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। उनकी सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को सफल और प्रभावशाली बना दिया। कॉलेज के शिक्षकों ने भी छात्रों का मार्गदर्शन किया और कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सामाजिक संदेश और निष्कर्ष

कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह एक सामाजिक और शैक्षणिक पहल के रूप में सामने आया, जिसने युवाओं को संविधान और समरसता के मूल्यों से जोड़ने का कार्य किया।

डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे। इस तरह के आयोजन समाज में जागरूकता फैलाने और नई पीढ़ी को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, लेकिन इसके जरिए दिए गए संदेश और प्रेरणा लंबे समय तक लोगों के दिलों में बनी रहेगी।

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