नीट पेपर लीक के आरोपों पर भागलपुर में छात्र संगठनों का प्रदर्शन, पीएम और सीएम का पुतला फूंका

भागलपुर में नीट परीक्षा को लेकर छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर गुरुवार को छात्र राजद और आइसा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के पास आयोजित इस विरोध कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र और संगठन के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन किया।

छात्र संगठनों का कहना था कि नीट जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षा को लेकर किसी भी तरह की अनियमितता की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए। प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने कथित पेपर लीक मामले की जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग उठाई।

प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली और पटना में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का भी विरोध किया। उनका आरोप था कि अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से रखने वाले छात्रों के साथ सख्ती नहीं की जानी चाहिए। छात्र संगठनों ने कहा कि सरकार को छात्रों की समस्याओं को सुनकर बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए।

विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर जुटे छात्र

गुरुवार को तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के मुख्य गेट के पास छात्र राजद और आइसा के कार्यकर्ता एकत्रित हुए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। छात्र नेताओं ने कहा कि नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में लाखों विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर मेहनत करते हैं। ऐसे में परीक्षा की प्रक्रिया पर किसी भी प्रकार का सवाल उठना गंभीर विषय है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि देशभर में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए वर्षों तक मेहनत करते हैं। आर्थिक और मानसिक रूप से बड़ी चुनौतियों का सामना करते हुए विद्यार्थी परीक्षा में शामिल होते हैं। यदि परीक्षा से जुड़ी किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत सामने आती है तो उसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ता है।

छात्र संगठनों ने मांग की कि परीक्षा व्यवस्था में ऐसी तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था तैयार की जाए, जिससे भविष्य में पेपर लीक या अन्य अनियमितताओं की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का पुतला दहन

विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन किया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को सामने रखा।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार को छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर छात्रों के बीच लगातार चिंता बनी हुई है। छात्र संगठनों ने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।

पुतला दहन के दौरान मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर है और जब तक परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक छात्र संगठनों की ओर से आवाज उठाई जाती रहेगी।

कथित पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच की मांग

प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों ने नीट परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि यदि परीक्षा से संबंधित किसी भी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आनी चाहिए।

छात्र नेताओं ने कहा कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, उन विद्यार्थियों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, जिन्होंने पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ परीक्षा की तैयारी की है।

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता विद्यार्थियों के विश्वास के लिए बेहद जरूरी है। छात्रों को यह भरोसा होना चाहिए कि परीक्षा में उनकी मेहनत और योग्यता के आधार पर ही उनका भविष्य तय होगा।

दिल्ली और पटना में पुलिस कार्रवाई का भी विरोध

भागलपुर में प्रदर्शन के दौरान छात्र संगठनों ने दिल्ली और पटना में आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज किए जाने का भी विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि छात्रों को अपनी मांग रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का लोकतांत्रिक अधिकार है।

छात्र नेताओं ने कहा कि किसी भी आंदोलन की स्थिति में प्रशासन को पहले बातचीत के जरिए समाधान तलाशना चाहिए। उनका आरोप था कि छात्रों की आवाज को दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया, जिसकी वे निंदा करते हैं।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्र देश के भविष्य हैं और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर उनकी चिंताओं का समाधान निकाला जाए।

परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग

छात्र संगठनों ने नीट सहित सभी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की। उनका कहना था कि परीक्षा केंद्रों से लेकर प्रश्नपत्र की सुरक्षा और परिणाम जारी होने तक हर स्तर पर मजबूत निगरानी व्यवस्था होनी चाहिए।

प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने कहा कि किसी भी परीक्षा में अनियमितता की आशंका से लाखों विद्यार्थियों का विश्वास प्रभावित होता है। इसलिए परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर लगातार सुधार करने की जरूरत है।

उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा से संबंधित शिकायतों की जांच के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को अपनी बात रखने के लिए सड़क पर उतरने की जरूरत न पड़े।

प्रदर्शन को लेकर पुलिस रही अलर्ट

छात्र संगठनों के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के आसपास किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।

पुलिस की मौजूदगी में प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और पुतला दहन किया। प्रशासन की ओर से पूरे कार्यक्रम पर नजर रखी गई। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली और कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया।

पुलिस बल की तैनाती का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी संभावित विवाद को रोकना था। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद स्थिति सामान्य रही।

छात्र नेताओं ने रखी अपनी बात

प्रदर्शन के दौरान राजद नेता उमर चंद ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। छात्र संगठनों की ओर से नीट परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।

वहीं, आइसा नेता प्रवीण कुशवाहा ने भी प्रदर्शन के दौरान छात्रों की समस्याओं और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले विद्यार्थियों के साथ किसी भी प्रकार की सख्ती नहीं की जानी चाहिए।

दोनों नेताओं ने छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं होने दी गई।

आगे भी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शन के अंत में छात्र संगठनों ने कहा कि नीट परीक्षा को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान जल्द किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।

भागलपुर में हुए इस प्रदर्शन के दौरान छात्र संगठनों ने एक तरफ परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग उठाई, तो दूसरी ओर छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। पुतला दहन और नारेबाजी के बावजूद कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

फिलहाल छात्र संगठनों की मुख्य मांग नीट परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता के साथ कदम उठाना चाहिए। वहीं, भागलपुर में प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति सामान्य रही और कार्यक्रम बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हो गया।

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