​एक ही कार, तीन बड़े किरदार: फ्रंट सीट पर विजय तो बैक सीट पर नीतीश-सम्राट; 1 अणे मार्ग से निकले ‘पावर सरप्राइज’ के बड़े संकेत

पटना। बिहार की सत्ता में होने जा रहे महा-परिवर्तन के बीच मंगलवार की सुबह पटना की सड़कों पर एक ऐसी तस्वीर दिखी, जिसने सियासी पंडितों और आम जनता को चौंका दिया है। मुख्यमंत्री आवास (1 अणे मार्ग) से जब गाड़ियों का काफिला बाहर निकला, तो सबकी नजरें उस एक कार पर टिक गईं जिसमें बिहार की राजनीति के तीन सबसे बड़े धुरंधर एक साथ सवार थे। गाड़ी की फ्रंट सीट पर विजय कुमार चौधरी बैठे थे, जबकि पिछली सीट पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक साथ नजर आए। राजनीति में ‘विजुअल्स’ (Visuals) और प्रतीकों का बड़ा महत्व होता है, और यह एक तस्वीर आने वाले घंटों में होने वाले बड़े बदलावों की पूरी कहानी बयां कर रही है। एक ही गाड़ी में निवर्तमान मुख्यमंत्री और उनके संभावित उत्तराधिकारी का साथ बैठना यह साफ संदेश दे रहा है कि सत्ता के हस्तांतरण की पटकथा पूरी तरह लिखी जा चुकी है और एनडीए के भीतर समन्वय (Coordination) अपने चरम पर है।

फ्रंट और बैक सीट का ‘पावर गेम’

​इस एक कार की सवारी के गहरे राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। फ्रंट सीट पर विजय कुमार चौधरी की मौजूदगी उन्हें गठबंधन के बीच के एक मजबूत सेतु (Bridge) के रूप में दर्शा रही है। वे नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक हैं और प्रशासनिक बारीकियों के जानकार माने जाते हैं। वहीं, पिछली सीट पर नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी का एक साथ बैठना जेडीयू और भाजपा के बीच ‘पावर शिफ्ट’ के सहज होने का प्रतीक है।

​आमतौर पर नीतीश कुमार अपनी गाड़ी में अकेले या अपने बेहद निजी सचिवों के साथ सफर करते हैं, लेकिन विदाई के इस क्षण में सम्राट चौधरी को अपने बगल में बिठाना यह बताता है कि उन्होंने भाजपा के नेतृत्व को न केवल स्वीकार कर लिया है, बल्कि वे उसे अपना पूरा समर्थन भी दे रहे हैं। यह दृश्य उन तमाम अटकलों को खारिज करता है जिनमें गठबंधन के भीतर किसी भी प्रकार की कड़वाहट की बात कही जा रही थी।

सुबह से ही 1 अणे मार्ग पर हलचल: रणनीतिक बैठकों का दौर

​मंगलवार की सुबह से ही मुख्यमंत्री आवास किसी अभेद्य किले और रणनीतिक मुख्यालय जैसा नजर आ रहा है। नीतीश कुमार के इस्तीफे से पहले उनके सबसे खास सिपहसालार—जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और विजय कुमार चौधरी—वहां पहुँचे। इन नेताओं के बीच काफी देर तक बंद कमरे में मंत्रणा हुई।

​चर्चा है कि इस बैठक में नई सरकार के स्वरूप, मंत्रियों की संख्या और जदयू की भविष्य की भूमिका पर अंतिम मुहर लगाई गई। इसी बीच सम्राट चौधरी का वहां पहुँचना और फिर तीनों का एक ही गाड़ी में बाहर निकलना यह संकेत देता है कि अब केवल औपचारिकताएं बाकी रह गई हैं। यह काफिला संभवतः राजभवन या कैबिनेट की अंतिम बैठक के लिए रवाना हुआ है।

अगला पड़ाव: इस्तीफा और एनडीए की ‘महाबैठक’

​नीतीश कुमार का यह सफर अब सीधे राजभवन की ओर बढ़ रहा है, जहाँ वे राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपकर दो दशकों के एक लंबे युग का औपचारिक समापन करेंगे। इस्तीफे के तुरंत बाद पूरी मशीनरी नई सरकार के गठन में जुट जाएगी।

  • दोपहर 2 बजे: जदयू विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नए नेता का चुनाव होगा।
  • दोपहर 3 बजे: भाजपा विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी के नाम पर आधिकारिक मुहर लग सकती है।
  • शाम 4 बजे: विधानसभा के सेंट्रल हॉल में एनडीए के सभी घटक दल एक साथ बैठेंगे और बिहार के नए भाग्यविधाता का चयन करेंगे।

​पटना की सड़कों पर दौड़ती यह कार इस समय बिहार के भविष्य का पहिया है। सम्राट चौधरी के चेहरे पर आत्मविश्वास और नीतीश कुमार की संयत मुद्रा यह बता रही है कि बिहार एक नए ‘कमल युग’ में प्रवेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 15 अप्रैल की सुबह होने वाले शपथ ग्रहण समारोह की नींव आज इसी एक गाड़ी के सफर के साथ मजबूती से रख दी गई है।

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